Get Updates
Get notified of breaking news, exclusive insights, and must-see stories!

उन्नाव रेप केस के आरोपी कुलदीप सिंह सेंगर का 'चाल-चेहरा और चरित्र': लोगों की जुबानी

नई दिल्ली- उत्तर प्रदेश के बहुचर्चित उन्नाव रेप केस में जब सुप्रीम कोर्ट ने दखल दिया तो 'चाल-चरित्र और चेहरा' की राजनीति करने की बात करने वाली बीजेपी की भी नींद खुल गई है। अब पार्टी ने उन्नाव रेप केस के आरोपी विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को भारतीय जनता पार्टी से 6 वर्षों के लिए बाहर कर दिया है। इससे पहले जब पीड़िता की कार संदिग्ध ट्रक हादसे की शिकार हो गई थी और उंगली उसी विधायक की ओर उठनी शुरू हुई, तब पार्टी ने सिर्फ इतना कहकर पल्ला झाड़ लिया था कि वे निलंबित हैं और निलंबित ही रहेंगे। लेकिन, अब पार्टी को आरोपी एमएलए को निष्कासित करना पड़ गया है। आइए जानते हैं कि जिस व्यक्ति के चलते 'पार्टी विद डिफरेंस' की इतनी फजीहत हो रही है, खुद उसके 'चाल-चरित्र और चेहरा' के बारे में उसे करीब से जानने वाले लोग क्या कहते हैं; और कैसे पूरे देश की नजर में विलेन बना वह शख्स, अब अपनी पार्टी नेतृत्व की आंखों का भी कांटा बन गया है।

नाना से विरासत में मिली राजनीति

नाना से विरासत में मिली राजनीति

कुलदीप सिंह सेंगर का जन्म तो फतेहपुर में हुआ था, लेकिन बाद में उसके परिवार वाले उन्नाव के माखी गांव आकर रहने लगे। यहां उनका ननिहाल है। उनके परिवार को नजदीक से जानने वाले एक आदमी ने हिंदुस्तान टाइम्स को बताया कि, "उनके पिता मुलायम सिंह फतेहपुर जिले के थे.....जब उनका परिवार माखी आया तो सेंगर बहुत छोटे थे। उनके दो भाइयों अतुल सिंह सेंगर और मनोज सिंह सेंगर उन्नाव में ही पैदा हुए हैं।" उसने बताया कि सेंगर के नाना बाबू सिंह ने 37 साल तक माखी गांव की प्रधानी की। 37 साल बाद 1988 में उनका यही नाती उनके उत्तराधिकारी बने। सेंगर 7 साल तक उस गांव के प्रधान रहे। लेकिन, जब 1995 में यह सीट महिलाओं के लिए आरक्षित कर दी गई, तब उनकी चाची को किस्मत आजमाने के लिए परिवार वालों ने उतार दिया। लेकिन, उन्हें हार का सामना करना पड़ गया। हालांकि, 2000 में कुलदीप सिंह सेंगर की मां चुन्नी देवी ने किस्मत आजमाया तो वो सफल रहीं और 2005 में उन्हें दोबारा भी चुन लिया गया।

विधानसभा के जरिए प्रदेश की राजनीति में कदम

विधानसभा के जरिए प्रदेश की राजनीति में कदम

कुलदीप सिंह सेंगर पहली बार 2002 में मायावती की बसपा से उन्नाव सदर विधानसभा क्षेत्र से एमएलए चुने गए। 2007 में बीएसपी ने उन्हें जब पार्टी-विरोधी गतिविधियों के चलते बाहर किया तो वे समाजवादी पार्टी में शामिल हो गए और उन्नाव के ही बांगरमऊ विधानसभा सीट से चुनाव जीते। उनके परिवार को करीब से जानने वाले उसी शख्स ने कहा कि "2012 में वे उन्नाव के ही भगवंत नगर विधानसभा क्षेत्र से समाजवादी पार्टी के टिकट पर चुने गए। 2017 के विधानसभा चुनाव से ठीक पहले वे बीजेपी में शामिल हो गए और बांगरमऊ विधानसभा क्षेत्र से दोबारा जीत गए।"

उन्नाव के पॉलिटिकल सर्किल में परिवार का दबदबा

उन्नाव के पॉलिटिकल सर्किल में परिवार का दबदबा

सेंगर की मां और चाची ही नहीं उनके परिवार के दूसरे सदस्यों का भी उन्नाव की स्थानीय राजनीति में जबर्दस्त दबदबा रहा है। उनके परिवार वालों का उन्नाव के स्थानीय निकायों के कई पदों पर वर्षों से कब्जा रहता आया है। 2015 में उनकी भाभी अर्चना सिंह माखी की ग्राम प्रधान चुनी गई थीं और शायद इसी चुनाव ने सेंगर के अर्श से फर्श पर पहुंचने की ऐसी कहानी लिखनी शुरू कर दी थी, जिसका अंत उनके लिए बहुत ही खौफनाक नजर आ रहा है। इसपर विस्तार से बात करें उससे पहले इस बात का जिक्र करना जरूरी लगता है कि मौजूदा वक्त में सेंगर की पत्नी भी उन्नाव जिला पंचायत की प्रमुख बनी हुई हैं। यानि उन्नाव में सेंगर परिवार का रसूख कैसा होगा इसकी सिर्फ कल्पना ही की जा सकती है और उसके खिलाफ आवाज उठाने वालों का अंजाम क्या होता है, इसका अंदाजा पीड़िता की चाची के अंतिम संस्कार में दिख चुका है, जहां सिर्फ पुलिस ही पुलिस दिखाई दे रही थी और गांव के लोग पीड़ितों के परिवार वालों के पास फटकने से भी बचने की कोशिश कर रहे थे।

रेप पीड़िता के परिवार से कैसे शुरू हुआ विवाद

रेप पीड़िता के परिवार से कैसे शुरू हुआ विवाद

उन्नाव में पहले पदास्थापित रहे एक पुलिस अधिकारी के मुताबिक रेप पीड़िता के पिता की मौत कुलदीप सिंह सेंगर के भाई अतुल सिंह सेंगर और उसके दबंगों द्वारा कथित पिटाई के बाद हुई थी। यही नहीं उन्होंने ये भी बताया कि रेप पीड़िता के चाचा और पिता भी पहले कुलदीप सिंह सेंगर के लिए ही काम करते थे। जब पीड़िता के पिता और चाचा विधायक सेंगर के लिए काम करते थे तब उन्हें कई तरह के आपराधिक मुकदमों का भी सामना करना पड़ा था। लेकिन, रेप पीड़िता और रेप के आरोपी सेंगर के परिवारों में तब से दरार पड़नी शुरू हो गई, जब 2015 में रेप पीड़िता की मां ने ग्राम प्रधान के चुनाव में सेंगर की भाभी अर्चना सिंह के खिलाफ चुनाव लड़ने का फैसला किया। पुलिस वाले ने बताया कि "हालांकि, पीड़िता की मां ने पीड़िता के चाचा के दखल के बाद अपना नामांकन वापस ले लिया था, लेकिन दुश्मनी की ऐसी बीज पड़ी की अभी भी देखी जा सकती है।"

संदिग्ध हादसे से कसा शिकंजा

संदिग्ध हादसे से कसा शिकंजा

विधायक कुलदीप सिंह पर 2017 में ही रेप का आरोप लगा था और तब पीड़ित नाबालिग थी। लेकिन, अपने राजनीतिक रसूख के चलते वे कानून के शिकंजे से बचते रहे। पिछले साल उसने तब जाकर सरेंडर किया जब इस रेपकांड में उनके खिलाफ चौतरफा सियासी बवाल मचना शुरू हुआ। लेकिन, गिरफ्तारी के बावजूद बीजेपी ने उन्हें सिर्फ सस्पेंड करके ही छोड़ दिया था। पर अब जब पीड़िता और उसके वकील ट्रक हादसे के शिकार होकर गंभीर हालत में अस्पताल में पहुंच गए हैं और उसकी चाची और मौसी दम तोड़ चुकी है, तब जाकर इस मामले में उनपर और मजबूती से शिकंजा कसना शुरू हुआ है। आरोपी विधायक पर हत्या और हत्या की कोशिश का तो अलग से केस दर्ज हुआ ही, पीड़िता के वो 30 से ज्यादा शिकायती पत्र भी सामने आने शुरू हो गए, जो उसने अदना पुलिस अधिकारियों से लेकर देश के चीफ जस्टिस तक से न्याय की गुहार लगाते हुए और विधायक सेंगर से जान की रक्षा के लिए लिखी थी। इतने बवाल के बाद बीजेपी नेतृत्व भी लाचार हो गया और उसे आखिरकार कुलदीप सिंह सेंगर से अपना नाम छीनने को मजबूर होना पड़ा।

More From
Prev
Next
Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+