Shyama Prasad Mukharji Rurban Mission: गांवों के विकास का अनूठा मिशन, जानिए कैसे विकसित हो रहे ग्रामीण क्षेत्र
Shyama Prasad Mukharji Rurban Mission: केंद्र सरकार गांवों के विकास के लिए एक योजना लेकर आई है। इस योजना में मिशन के तहत गांव के ऐसे समूह का विकास करना है। जो ग्रामीण जीवन के स्तर को सुरक्षित और पोषित करते हुए समानता और समावेशित पर ध्यान केंद्रित करे। इस मिशन के तहत शहरी प्रकृति के अनुरूप गांवों का विकास किया जा रहा है। इसके लिए रुर्बन गांव का एक समूह तैयार करना है।
इस योजना को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 21 फरवरी 2016 को ग्रामीण क्षेत्र के विकास के विकास के लिए शुरू किया था। पीएम मोदी ने यह योजना ग्रामीण क्षेत्रों को शहरों के बराबर विकसित करने के लिए शुरू की थी।

भारत की जनगणना के आंकड़ों के मुताबिक देश में ग्रामीण आबादी 833 मिलियन है। जो कुल आबादी का लगभग 68 फीसदी हिस्सा है। 2001 से 2011 की अवधि के दौरान ग्रामीण आबादी में 12 फीसदी वृद्धि और गांवों की संख्या में 2279 की बढ़ोतरी देखी गई।
क्या है रुर्बन मिशन
इस योजना के तहत रुर्बन गांवों का एक समूह बनाया जाएगा। यह शहरों से सटे गांवों का एक समूह है। जिनकी आबादी मैदानी और तटीय क्षेत्रों में लगभग 25 से 50 हजारऔर रेगिस्तान, पहाड़ी और आदिवासी क्षेत्रों में 5000 से 15000 की आबादी वाले गांव शामिल है।
इस मिशन का मकसद आर्थिक सामाजिक और भौतिक संसाधनों के तहत ग्रामीण क्षेत्र का विकास करना है। मिशन के तहत 300 रुर्बन क्लस्टरों का विकास किया जाएगा। जो अनिवार्य रूप से ग्रामीण क्षेत्र के बड़े हिस्से हैं। यह अलग-अलग बस्तियां नहीं। बल्कि एक दूसरे से निकट बस्तियों का एक समूह है। यह क्लस्टर आमतौर पर विकास की क्षमता को दर्शाते हैं। आर्थिक चालक होते हैं और प्रतिस्पर्धा का लाभ प्राप्त करते हैं। एक बार विकसित होने के बाद इन क्लस्टरों को रुर्बन के रूप में वर्गीकृत किया जा सकता है।
जानिए मिशन के लक्ष्य
श्यामा प्रसाद मुखर्जी रुर्बन मिशन का लक्ष्य ग्रामीण और शहरी क्षेत्र के विभाजन को पाटना है। इसके तहत आर्थिक तकनीकी और सुविधाओं एवं सेवाओं से संबंधित विभाजन शामिल है। ग्रामीण क्षेत्रों में गरीबी और बेरोजगारी को कम करने पर जोर देते हुए स्थानीय आर्थिक विकास को प्रोत्साहित करना और क्षेत्र में विकास फैलाना। इसके साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में निवेश को आकर्षित करना है।
यह मिशन 300 क्लस्टरों को कवर करता है। जिसमें से 109 आदिवासी क्लस्टर और 191 गैर आदिवासी क्लस्टर है। जो वर्तमान में 28 राज्यों और आठ केंद्र शासित प्रदेशों के विकास के विभिन्न चरणों में है। अब तक 298 क्लस्टरों को मंजूरी दे दी गई है। जिसमें से 291 एकीकृत क्लस्टर कार्य योजनाएं (आईसीएपी) और 282 विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) शामिल हैं। इनको राज्यों और संघ राज्य क्षेत्रों द्वारा 27,709.33 करोड़ रुपए के कुल निवेश के साथ विकसित किया गया है।












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