चुनाव से पहले जाटों को मनमोहन सरकार का तोहफा

दरअसल मुजफ्फरनगर दंगे के बाद से जाट समुदाय केन्द्र सरकार से नाराज थीष ऐसे में उनके पास ये मौका था जब वो लंबे वक्त ये चल रही उनकी मांगों को मान कतर उनकी नाराजगी दूर कर सके और उनका वोट अपने खाते में कर सके। इसी नाराजगी को थामने के लिए केंद्र सरकार ने रविवार को जाटों को पिछड़ी जातियों की केंद्रीय सूची में शामिल करने के प्रस्ताव पर अंतिम मुहर लगा दी है। यह फैसला प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की विशेष बैठक में लिया गया। इससे जाटों को केंद्र सरकार की नौकरियों में पिछड़े वर्ग के तहत आरक्षण का लाभ मिलेग।
Did You Know: सबसे पहले 1885 में दक्षिण भारत में हुई आरक्षण की मांग
गौरतलब है कि देश के 9 उत्तर भारतीय राज्यों में बसे जाट समुदाय के लोग काफी लंबे समय से ओबीसी के तहत आरक्षण की मांग कर रहे है। कई बार उग्र आंदोलन हुए। सबसे ज्यादा प्रभावी इलाका हरियाणा, दिल्ली, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, पंजाब, राजस्थान, मध्य प्रदेश रहा। अब जाकर सरकार ने उनके आंदलोन का सम्मान करते हुए उन्हें आरक्षण दिया है।
वहीं केंद्र सरकार के इस कदम को विरोधी दल राजनीति से प्रेरित बता रहे हैं। विरोधियों के इन आरोपो का जवाब देते हुए सूचना प्रसारण मंत्री मनीष तिवारी ने कहा कि हर चीज को चुनाव के ‘लेंस' से नहीं देखना चाहिए। दरअसल जाट आरक्षण की मांग को देखते हुए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने वित्त मंत्री पी चिदंबरम की अगुआई में गृह मंत्री, सामाजिक न्याय व अधिकारिता मंत्री और कार्मिक, प्रशिक्षण व प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्यमंत्री को शामिल कर मंत्रियों का एक जीओएम गठित किया था। इसी जीओएम के सुझाव पर कैबिनेट ने जाट आरक्षण के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है।
Did You Know: देश में सबसे पहली बार 1885 में दक्षिण भारत से आरक्षण की शुरूआत हुई। 1885 में मद्रास सरकार द्वारा ‘ग्रांट इन एड कोड' बनाया गया जिसके अंतर्गत शैक्षिक संस्थाओं को वित्तीय सहायता और दलित वर्ग के विद्यार्थियो के लिए विशेष सुविधाएं दी गईं।












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