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Unified Pension Scheme: विधानसभा चुनावों में UPS का होगा क्या असर, बीजेपी के लिए सियासी मायने?

Unified Pension Scheme news: केंद्र में नरेंद्र मोदी की सरकार ने यूनिफाइड पेंशन स्कीम (UPS) लागू करने का फैसला ऐसे समय में लिया है, जब दो राज्यों में विधानसभा चुनावों का अभियान शुरू हो चुका है और दो राज्यों में चुनाव तारीखों की घोषणा होने वाली है।

जाहिर है कि विपक्ष ने अभी से ऐसे समय में मोदी सरकार की ओर से केंद्र सरकार के करीब 32 लाख कर्मचारियों के लिए यूपीएस को मंजूरी दिए जाने पर सवाल उठाना शुरू कर दिया है। लेकिन, जानकारों को लग रहा है कि बहुत जल्द इस पेंशन स्कीम का असर भाजपा या एनडीए शासित अन्य राज्यों में भी दिखने लगेगा।

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विपक्ष की चाल पर मोदी सरकार का सियासी वार!
केंद्र सरकार को यूपीएस लाने की आवश्यकता इसलिए पड़ी है कि कांग्रेस समेत तमाम विपक्षी दलों ने पिछले साल विधानसभा चुनावों से पहले पुरानी पेंशन योजना (OPS) लागू करने की जोरदार वकालत की थी। इसको लेकर कर्मचारी संगठन आंदोलन कर रहे थे और विपक्षी दल उसे हवा देने में भी जुटे हुए थे।

कांग्रेस को हिमाचल-कर्नाटक में ओपीएस के वादे का मिला फायदा!
कांग्रेस पार्टी को खासकर हिमाचल प्रदेश विधानसभा चुनावों में ओपीसी को मुद्दा बनाने का जबर्दस्त फायदा भी मिला था और उसने वहां सरकार भी बना ली। माना जाता है कि वहां सरकारी कर्मचारी परंपरागत रूप से चुनावों को प्रभावित करने में सक्षम रहे हैं। पार्टी को कर्नाटक में भी इसका काफी फायदा मिला था।

राजस्थान, एमपी और छत्तीसगढ़ में नहीं गली ओपीएस वाली सियासी दाल!
लेकिन, फिर भी पार्टी राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के विधानसभा चुनावों में बुरी तरह से हार गई। ओपीएस के तमाम वादे और दावे हवा हो गए और कांग्रेस न तो एमपी में सत्ता में वापस लौट पायी और ना ही राजस्थान और छत्तीसगढ़ में अपनी सरकारें ही बचा पायी।

केंद्रीय सूचना और प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने यूपीएस के संबंध में मोदी कैबिनेट के फैसले की जानकारी देते हुए दावा किया कि कांग्रेस हिमाचल प्रदेश और राजस्थान में ओपीएस का वादा करके ही रह गई और उसे लागू करने को लेकर राज्य सरकार के कर्मचारियों को भ्रम में रखा।

तीन राज्यों में हारने के बाद कांग्रेस ओपीएस वाले मुद्दे पर शांत बैठ गई!
वैसे यह तथ्य है कि पिछले साल विधानसभा चुनावों तक ओपीएस को मुख्य मुद्दा बनाने वाली कांग्रेस लोकसभा चुनाव आते-आते इसपर चुप हो गई और अपने चुनावी घोषणापत्र में इसे जगह तक नहीं दी।

राज्यों ने भी दी यूपीएस को झंडी तो 90 लाख सरकारी कर्मचारियों को होगा फायदा
केंद्र सरकार का कहना है कि राज्य सरकारों ने भी अगर उसकी नई पेंशन स्कीम यूपीएस को अपना लिया तो इसके लाभार्थियों की संख्या बढ़कर 90 लाख तक पहुंच जाएगी। नई योजना 1, अप्रैल, 2025 से लागू होनी है।

यूपीएस के तहत किसी भी श्रेणी के कर्मचारियों को उसकी सेवा के अंतिम 12 महीने की औसत सैलरी का कम से कम 50% बतौर पेंशन का लाभ तो मिलेगा ही, फैमिली पेंशन भी उसके पेंशन की 60% होगी, जो की सरकारी कर्मचारियों के लिए बहुत बड़ा तोहफा है।

केंद्रीय कैबिनेट सचिव पद पर नियुक्ति के लिए चुने गए सबसे वरिष्ठ आईएएस अधिकारी टीवी सोमनाथन का कहना है कि 99% मामलों में कर्मचारियों के लिए मौजूदा न्यू पेंशन स्कीम (NPS) से यूपीएस (UPS) में शिफ्ट करना फायदेमंद साबित होगा। जो एनपीएस के तहत रिटायर हो चुके हैं, उन्हें भी यूपीएस में शिफ्ट होने का विकल्प मिलेगा और अगर कोई बकाया राशि होगी तो वह भी दी जाएगी।

आने वाले विधानसभा चुनावों में यूपीएस साबित हो सकता है बड़ा फैक्टर
राजनीति के जानकारों का मानना है कि आने वाले विधानसभा चुनावों में यह एक बड़ा फैक्टर साबित हो सकता है। जम्मू-कश्मीर और हरियाणा में चुनाव तारीखों की घोषणा हो चुकी है।

महाराष्ट्र और झारखंड में उसके बाद इसी साल चुनाव होने हैं। अगले साल की शुरुआत में दिल्ली में और आखिर में बिहार विधानसभा के चुनाव भी होने हैं। ऐसे समय में सरकारी कर्मचारियों को केंद्र सरकार से तोहफा मिलना भाजपा और एनडीए के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है।

अगर, बीजेपी-शासित राज्यों ने भी केंद्र सरकार की तर्ज पर ही अपने कर्मचारियों के लिए यूपीएस लागू करने का फैसला कर लिया तो यह भी राजनीतिक तौर पर सत्ताधारी गठबंधन के लिए फलदायी हो सकता है।

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