उमा भारती ने परिजनों का किया परित्याग, खुद रिश्ते-बंधनों से हुईं मुक्त, अब कहलाएंगी ‘दीदी मां’
Former CM and Sadhvi Uma Bharti ने बड़ी घोषणा की है। उन्होंने कहा कि वे अब 'दीदी मां' कहलाएंगी। जैन संत आचार्य विद्यासागर महाराज की आज्ञा का पालन करने वे परिवार के सारे बंधनों से मुक्त हो रही हैं। परिजन को भी बंधनो से मुक्त कर रही हैं। उनका अब कोई निजी परिवार नहीं है। 17 नवंबर को उनकी संन्यास दीक्षा के 30 साल पूरे होने वाले हैं। इस दिन वे सारे बंधनों से मुक्त हो जाएंगी। उमा के अनुसार वे अपने समस्त निजी संबंधों एवं संबोधनों का परित्याग कर रही हैं। यह जानकारी उन्होंने एक के बाद एक 17 ट्वीट कर दी है।

उमा भारती ने लिखा, परिजन को सभी बंधनों से मुक्त कर रही हूं
Madhya Pradesh की पूर्व सीएम Uma Bharti प्रदेश में शराबबंदी आंदोलन चला रही हैं। उन्होंने देव प्रबोधनी एकादशी की देर शाम एक के बाद एक 17 ट्वीट किए हैं। इसमें उन्होंने कहा है कि उनकी संन्यास दीक्षा के 30 साल पूरे हो रहे हैं। आगामी 17 नवंबर को वे सारे संबंधों और बंधनों व संबोधनों का त्याग कर रही हैं। 15 वें ट्वीट में उन्होंने लिख है कि वे अपने परिवार जनों को सभी बंधनों से मुक्त कर रही हैं और 17 नवंबर 2022 को वे स्वयं भी सारे रिश्ते और बंधनों से मुक्त हो जाएंगी। इसके बाद वे सारे विश्व समुदाय के लिए केवल दीदी मां कहलाएंगी और उनका कोई निजी परिवार नहीं है।

जैन संत आचार्य विद्यासागर महाराज की आज्ञा का पालन करेंगी
उमा भारती ने ट्वीट के माध्यम से जानकारी देते हुए बताया कि संयोग से जैन मुनि आचार्यश्री विद्यासागर महाराज कर्नाटक के हैं। अब वहीं मेरे लिए गुरु पद हैं। उन्होंने उमा भारती को बीते 17 मार्च 2022 को सागर जिले के रहली में सार्वजनिक तौर पर माइक से सभी मुनिजन के सामने आज्ञा दी थी कि समस्त निजी संबंधों एवं संबोधनों का परित्याग करके वे मात्र दीदी मां कहलाएं एवं अपने भारती नाम को सार्थक करने के लिए सभी नागरिकों को अंगीकार करें। उमा के अनुसार अब संपूर्ण विश्व समुदाय ही उनका परिवार होगा।

17 नवंबर 2022 को संन्यास दीक्षा के 30 साल पूरे हो रहे
उमा भारती के ट्वीट के अनुसार उनकी संन्यास दीक्षा के 17 नवंबर 2022 को 30 साल पूरे हो रहे हैं। वे आचार्यश्री विद्यासागर महाराज की आज्ञा का पालन इसी दिन से करने लगेंगी। उन्होंने भावुक होकर लिखा है कि अब मैं सारे विश्व समुदाय की दीदी मां हूं, मेरा कोई निजी परिवार नहीं है। उन्होंने ट्वीट में लिखा है कि मैं अपने परिवार जनों को सभी बंधनों से मुक्त करती हूं, एवं मैं स्वयं भी 17 नवंबर को मुक्त हो जाऊंगी। उमा भारती की जब संन्यास दीक्षा हुई थी, उस समय वे 32 साल उम्र की थीं।

अमरकंटक में मार्गशीर्ष अष्टमी 17 नवंबर 1992 को संन्यास दीक्षा हुई थी
उमा भारती ने जानकारी देते लिखा है कि इस साल की मार्गशीर्ष माह की अष्टमी जो कि फिर 17 नवंबर को पड़ रही है, 30 साल पहले अमरकंटक में नर्मदा किनारे उनकी इसी दिन 17 नवंबर 1992 को उनकी संन्यास दीक्षा हुई थी। उस समय उनकी आयु से 32 वां वर्ष चल रहा था। उन्होंने दीक्षा संस्कार के समय को याद करते हुए लिखा है कि जब भंडारा हुआ तो हजारों संत नर्मदाजी के किनारों के जंगलों से निकलकर आए और भोजन ग्रहण कर मुझे आशीर्वाद दिया था।

8 नवंबर पूर्णिमा को अमरकंटक पहुंचेंगी
उमा भारती ने जानकारी साझा करते हुए कहा है कि देव प्रबोधनी एकादशी शुक्रवार को उन्हें अमरकंटक पहुंचना था, लेकिन वे अपरिहार्य कारणों से भोपाल में हैं। पूर्णिमा के चंद्र ग्रहण 8 नवंबर को वे अमरकंटक पहुंच जाएंगी। चूंकी 17 नवंबर 1992 को अमरकंटक में ही उनकी संन्यास दीक्षा हुई थी। उनके गुरु ने दीक्षा के समय उनसे व उन्होंने अपने गुरु से तीन प्रश्न किए थे, उसके बाद ही संन्यास दीक्षा हुई थी।

दीक्षा के तुरंत बाद अयोध्या में भीड़ जुटाने की जिम्मेदारी दी गई थी
उमा ने दीक्षा के समय और उसके बाद अयोध्या कार सेवा के दौरान की बातों को शेयर करते हुए लिखा है कि अमरकंटक में संस्कार दीक्षा के तुरंत बाद उन्हें अयोध्या में भीड़ जुटाने की जिम्मेदारी दी गई थी। फिर 6 दिसंबर की घटना हुई। अमरकंटक से अयोध्या, बाबरी ढांचा गिरा, वहीं से उन्हें लालकृष्ण आडवानी के साथ जेल भेज दिया गया था। उमा भारती के शब्दों के अनुसार जेल से बाहर निकले तो दुनिया बदल चुकी थी, हमारी सरकारें गिर चुकी थीं, फिर तो 1992 से 2019 तक कड़ी मेहनत एवं संघर्ष के दिन थे। मैं कभी इन बातों पर विस्तार से लिखूंगी।

परिवार के बारे में जानकारी दी, कहा मुझे जाति, कुल, परिवार पर गर्व है
उमा भारती ने कहा है कि मैं जिस जाति, कुल व परिवार मैं पैदा हुई उस पर मुझे गर्व है। मेरे निजी जीवन एवं राजनीति में वह मेरा आधार एवं सहयोगी बने। उमा के अनुसार वे 4 भाई दो बहनें थीं, जिनमें से 3 का स्वर्गारोहरण हो चुका है। उनके पिता गुलाब सिंह लोधी किसान थे, मां बेटी बाई कृष्णभक्त थीं। उमा के अनुसार वे घर में भाई-बहनों में सबसे छोटी हैं। उनके बड़े भाई अमृत सिंह लोधी, हर्बल सिंह लोधी एवं स्वामी लोधी व कन्हैयालाल लोधी सभी जनसंघ एवं भाजपा से उनके राजनीति में आने के पहले से जुडे़ थे।
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