Ukraine Russia War: G20 बैठक पर ड्रैगन की तिरछी नजर! सूत्र बोले- 'एकजुट देशों' के बीच सेंधमारी की ताक में चीन
यूक्रेन युद्ध पर जी20 देशों के बीच एकजुटता के संकेत हैं। हालांकि, चीन बयान को कमजोर करने की ताक में है। सूत्रों ने कहा, चीन जी20 सम्मेलन में यूक्रेन युद्ध के किसी भी संदर्भ को कम करने की कोशिश कर रहा है।

Ukraine Russia War के एक साल पूरे होने के समय ही जी 20 देशों की बैठक आयोजित हुई। अधिकांश देशों ने एकजुटता दिखाई। युद्ध का समाधान करने के तरीकों पर संवाद की बातें हुईं, लेकिन ड्रैगन यानी चीन इस मुद्दे पर टेढ़ा रवैया अपना रहा है। सूत्रों के मुताबिक चीन यूक्रेन युद्ध के मुद्दे को इस सम्मेलन के दौरान ठंडे बस्ते में डालने की हरसंभव कोशिश कर रहा है। जी20 देशों के सम्मेलन पर न्यू इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में अधिकारियों के हवाले से बताया गया कि जी20 देशों के वित्त मंत्रियों ने शनिवार को भारत में बातचीत के दौरान वैश्विक अर्थव्यवस्था पर एक संयुक्त बयान पर आम सहमति बनाने का प्रयास कर रहे थे, लेकिन उन्हें संघर्ष करना पड़ा। सूत्रों ने कहा, चीन यूक्रेन युद्ध के किसी भी संदर्भ को कम करने की कोशिश कर रहा है।
स्पेन की प्रतिनिधि नादिया कैल्विनो के अनुसार, बेंगलुरू में दुनिया की शीर्ष 20 अर्थव्यवस्थाओं के बीच वार्ता में कुछ अनिर्दिष्ट देशों द्वारा "कम रचनात्मक" दृष्टिकोण के कारण, एक बयान पर सहमत होना "मुश्किल" साबित हो रहा था। अधिकारियों ने समाचार एजेंसी एएफपी को बताया कि चीन नवंबर से ही जी20 नेताओं के बयान की भाषा को हल्का करना चाहता था, जिसमें कहा गया था कि "अधिकांश सदस्यों ने यूक्रेन में युद्ध की कड़ी निंदा की।"
जी20 सम्मेलन में चीन की भूमिका पर न्यू इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार एक प्रतिनिधि ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि चीन "युद्ध" शब्द को हटाना चाहता है। अन्य लोगों ने कहा कि एक संयुक्त बयान की अब संभावना नहीं थी, जैसा कि एक साल पहले यूक्रेन पर रूस के आक्रमण के बाद से ऐसी कई अन्य सभाओं में हुआ है।

एक अन्य प्रतिनिधि ने कहा कि प्रतिनिधि शनिवार दोपहर 2.00 बजे तक बातचीत कर रहे थे। चीन और वर्तमान G20 अध्यक्ष भारत ने रूस की निंदा करने से इनकार कर दिया है। खबरों के मुताबिक यूक्रेन में विशेष सैन्य कार्रवाई करने वाला रूस भारत का सबसे बड़ा हथियार आपूर्तिकर्ता है। रूस भारत के लिए तेल का एक प्रमुख स्रोत भी है। हालांकि, जर्मनी और फ्रांस सहित पश्चिमी देशों ने जोर देकर कहा कि भाषा नवंबर में इंडोनेशिया में जी20 नेताओं द्वारा जारी विज्ञप्ति से कमजोर नहीं हो सकती।
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जी-20 सम्मेलन दो दिवसीय कार्यक्रम रहा। एक लग्जरी होटल में G20 के सदस्यों के अलावा केंद्रीय बैंक के प्रमुख भी शामिल रहे। युद्ध के कारण मुद्रास्फीति से प्रभावित गरीब देशों के लिए ऋण राहत पर भी ध्यान केंद्रित किया गया। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने बैठक से पहले कहा कि कम आय वाले लगभग 15 प्रतिशत देश ऋण संकट में थे और अतिरिक्त 45 प्रतिशत उच्च जोखिम में थे।
अमेरिकी ट्रेजरी सचिव जेनेट येलेन सहित पश्चिमी अधिकारियों ने चीन से जाम्बिया और श्रीलंका जैसे ऋणग्रस्त देशों को अपने ऋणों पर "हेयरकट" लेने का आह्वान किया। चीन चाहता है कि विश्व बैंक सहित बहुपक्षीय ऋणदाता- IMF भी अपने ऋणों का पुनर्गठन करे, लेकिन अमेरिका और अन्य देशों ने इसका विरोध किया।












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