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UCC Law Commission: समान नागरिक संहिता पर जनता 28 जुलाई तक भेज सकेगी अपनी राय

UCC Law Commission की प्राथमिकता सूची में सबसे ऊपर है। संसद के मॉनसून सेशन में इस पर विधेयक पेश किए जाने की अटकलों के बीच जनता को अपनी राय भेजने का और समय दिया गया है।

रिपोर्ट के अनुसार, लॉ कमीशन ने कहा है कि समान नागरिक संहिता (UCC) पर जनता अपनी राय आगामी 28 जुलाई तक भेज सकेगी। बता दें कि विधि आयोग की कवायद के बीच तमिलनाडु के मुख्यमंत्री ने पत्र लिखकर UCC का विरोध किया है।

UCC Law Commission

शुक्रवार को विधि आयोग ने समान नागरिक संहिता पर जनता के विचार भेजने की समय सीमा 28 जुलाई तक बढ़ाने की घोषणा के बाद यूसीसी से जुड़े मुद्दों की समझ रखने वाली जनता अगले 14 दिनों तक अपने सुझाव लॉ कमीशन के पास भेज सकेगी।

ANI की रिपोर्ट के अनुसार, समान नागरिक संहिता (यूसीसी) के विषय पर जनता की जबरदस्त प्रतिक्रिया और अपनी टिप्पणियां भेजने के लिए समय के विस्तार के संबंध में विभिन्न क्षेत्रों से कई अनुरोध प्राप्त हुए।

तारीख बढ़ाने के फैसले पर विधि आयोग ने कहा, सुझावों को देखते हुए, विधि आयोग ने इसके लिए दो सप्ताह का विस्तार देने का निर्णय लिया है। संबंधित हितधारकों द्वारा विचार और सुझाव प्रस्तुत किया जा सकेगा।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, 21वें विधि आयोग को 2018 में नागरिकों के 50 लाख से अधिक ऑनलाइन सुझाव मिले थे। खबरों के अनुसार, हार्ड कॉपी सुझाव भी डाक और कुरियर से भेजे गए। कुछ संगठनों ने UCC के मुद्दे पर विधि आयोग से निजी तौर पर सुनवाई की अपील भी की।

बता दें कि 21वें लॉ कमीशन ने समान नागरिक संहिता पर कई साल तक काम किया। UCC पर 2018 में भी सुझाव मांगे गए थे। अगस्त, 2018 में पारिवारिक कानून में सुधार को लेकर परामर्श भी दिए गए थे।

इसमें कहा गया था कि UCC का मतलब नागरिकों के लिए समान कानून है। इसका धर्म से लेना-देना नहीं। परामर्श के तीन साल से अधिक बीत चुके हैं। 21वें विधि आयोग का कार्यकाल खत्म होने के बाद अब 22वां विधि आयोग नए सिरे से मंथन कर रहा है।

14 जून को एक महीने के भीतर जनता से सुझाव भेजने की अपील करे हुए 22वें लॉ कमीशन ने परामर्श का नया प्रोसेस शुरू किया है। अब आयोग ने दो हफ्तों का समय बढ़ा दिया है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, समान नागरिक संहिता का विधेयक पारित होने और कानून बनने के बाद देशभर में विवाह और वसीयत के अलावा पुनर्विवाह के साथ महिला और पुरुषों से जुड़े कई जरूरी कानून एक समान हो जाएंगे।

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