लिखित गलती के चलते लोवर कोर्ट ने रेप के आरोपी को किया बरी, हाईकोर्ट ने बदला फैसला
चेन्नई, जुलाई 17: तमिलनाडु में एक टाइपो का एक चौंका देने वाला मामला सामने आया है। तमिलनाडु की एक स्थानीय अदालत ने एक प्राथमिकी में टाइपोग्राफ़िकल त्रुटि के आधार पर एक बाल यौन उत्पीड़न मामले के आरोपी को आरोपों से मुक्त कर दिया। दरअसल एफआईआर में 'सीमन' शब्द को 'सेमेन' (तमिल में लाल रेत) के रूप में गलत तरीके से लिखा गया था। बाद में मद्रास उच्च न्यायालय ने हस्तक्षेप किया और निचली अदालत के फैसले को उलट दिया।

न्यायमूर्ति पी वेलमुरुगन की उच्च न्यायालय की पीठ ने निचली अदालत के फैसले को तब पलट दिया जब वह दो साल की बेटी के यौन उत्पीड़न के आरोपी एक व्यक्ति को बरी करने के खिलाफ एक महिला द्वारा दायर अपील पर सुनवाई कर रही थीं। आदेश में कहा गया है कि सुनवाई के दौरान जब महिला का बयान दर्ज किया गया तो आरोप पत्र में गलत तरीके से उल्लेख किया गया कि पीड़िता के जननांगों में अंग्रेजी में 'सीमन' के बजाय तमिल में 'सेमेन' के निशान थे।
निचली कोर्ट ने अपने फैसले में लिखा था कि, 'गंदगी' निजी अंग में फंस गई होगी क्योंकि बच्ची खेल रही थी। तिरुवरूर जिला महिला अदालत ने आरोपी एस प्रकाश को मामले से मुक्त कर दिया। उच्च न्यायालय द्वारा सुनाए गए फैसले से पता चला कि बचाव पक्ष के वकील ने मुकदमे के दौरान की गई टाइपो का फायदा उठाया। हालांकि, न्यायमूर्ति वेलमुरुगन ने तिरुवरुर जिले के आरोपी प्रकाश को पांच साल की जेल की सजा सुनाई और तमिलनाडु सरकार को लड़की को एक लाख रुपये का मुआवजा देने का निर्देश दिया।
घटना 2017 की है, जब महिला खाना खरीदने के लिए घर से बाहर निकली थी और दो साल की बच्ची को अकेला देखकर प्रकाश ने उसके साथ दुष्कर्म किया। वापस लौटने पर, माँ ने बच्चे को रोते हुए पाया और उसके गुप्तांग में एक सफेद तरल देखा। मां बच्चे को अस्पताल लेकर गई और शिकायत दर्ज कराई।












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