ईसाई बन चुके लोगों का ST दर्जा खत्म करने की मांग, RSS समर्थित संगठन 25 दिसंबर को करेगा रैली
आरएसएस से जुड़ा संगठन ईसाई धर्म अपना लेने वाले अनुसूचित जनजाति के लोगों से उनको इसकी वजह से मिलने वाले लाभ खत्म करवाने के लिए त्रिपुरा की राजधानी अगरतला में रैली आयोजित करने जा रहा है।
सबसे बड़ी बात ये है कि त्रिपुरा में जनजाति सुरक्षा मंच (JSM) नाम के इस संगठन ने इस रैली के लिए 25 दिसंबर की तारीख पक्की की है। यह संगठन धर्म बदलकर ईसाई बन जाने वाले आदिवासियों को अनुसूचित जनजाति (ST) की वजह से मिलने वाले लाभ को खत्म करने की मांग कर रहा है।

जनजाति सुरक्षा मंच ने की संविधान में संशोधन की मांग
जनजाति सुरक्षा मंच के त्रिपुरा यूनिट के संयजोक शांति बिकास चकमा ने कहा कि धर्म परिवर्तन कर लेने वाले अनुसूचित जनजाति (ST) से संबंधित लोगों को सूची से हटाने के लिए संविधान में संशोधन किया जाना चाहिए।
बनबासी कल्याण आश्रम से जुड़ा है यह संगठन
जनजाति सुरक्षा मंच बनबासी कल्याण आश्रम से समर्थन प्राप्त संगठन है। बता दें कि बनबासी कल्याण आश्राम आदिवासी कल्याण के लिए काम करने वाला आरएसएस की एक संस्था है। त्रिपुरा में बीजेपी की सरकार है और आरएसएस उसका वैचारिक अगुवा संगठन है।
25 दिसंबर को अगरतला में रैली
चकमा ने अगरतला में एक एक प्रेस कांफ्रेंस में कहा, 'हम 25 दिसंबर को धर्म बदल चुके लोगों को संविधानिक प्रक्रिया के तहत संशोधन के माध्यम से एसटी स्टैटस की लिस्ट से हटाने की मांग को लेकर स्वामी विवेकानंद ग्राउंड में एक विशाल रैली आयोजित करेंगे।'
धर्मांतरण की वजह से ईसाइयों की बढ़ी आबादी- जनजाति सुरक्षा मंच
उन्होंने कहा कि जनजाति सुरक्षा मंच किसी भी धर्म के खिलाफ नहीं है। लेकिन, यह भी कहा कि ब्रिटिश शासन काल में त्रिपुरा में ईसाई धर्म नहीं फैला था, लेकिन अब यह धर्मांतरण की वजह से बढ़ा है।
चकमा ने कहा कि राज्य में ईसाई धर्म मानने वालों की संख्या 1911 में 138 से 1991 की जनगणना में 46,472 और 2011 में बढ़कर 1, 59,582 तक पहुंच चुकी है।
आदिवासी परंपरा छोड़ देने का आरोप
चकमा ने कहा कि 'आदिवासी लोगों का एक वर्ग जो पहले से हिंदू था, उसने ईसाई धर्म अपना लिया है, फिर भी उन्हें अनुसूचित जातियों को मिलने वाले सभी लाभ मिल रहे हैं। देशी जनजातियों को अपनी परंपरा, संस्कृति और रीति-रिवाजों की वजह से एसटी के तौर पर सूचीबद्ध किया गया था।'
उन्होंने दावा कि धर्मांतरित लोगों से निश्चित तौर पर एसटी का दर्जा वापस लिया जाना चाहिए, क्योंकि ये पुरानी संस्कृति, परंपरा और रिवाजों का पालन अब नहीं करते हैं। 'देशी संस्कृति, परंपरा और रिवाजों की रक्षा और उसे संरक्षित करने के लिए हम धर्मांतरण कर चुके लोगों को एसटी की श्रेणी से हटाना चाहते हैं।' (इनपुट-पीटीआई)
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