आज राज्यसभा में पेश होगा तीन तलाक बिल, 3 साल की सजा को लेकर है 'खींचतान'

नई दिल्लीः आज यानि बुधवार को राज्यसभा में तीन तलाक बिल को पेश किया जाएगा। इस बिल को मंगलवार को पेश किया जाना था, लेकिन सरकार ऐसा नहीं कर सकी। बता दें, पिछले सप्ताह इस विधेयक को लोकसभा से मंजूरी दी जा चुकी है। इस विधेयक में प्रावधान है कि अगर कोई तीन तलाक का दोषी पाया जाता है तो तीन साल की सजा का प्रावधान है। आज राज्यसभा में इस बिल को लेकर भारी हंमागा होने के आसार है।

संसदीय समिति में भेजने को तैयार नहीं भाजपा

संसदीय समिति में भेजने को तैयार नहीं भाजपा

सूत्रों का कहना है कि मोदी सरकार इस बिल को संसदीय समिति को भेजने को तैयार नहीं है। बताया जा रहा है कि सरकार चाहती है कि विपक्ष राज्यसभा में इस बिल का विरोध करे। सरकार इस बिल को आगे बढ़ाने के लिए पूरी तरह तैयार है। सरकार और विपक्ष के बीच इस मामले में तीन साल की सजा को लेकर असहमति बनी हुई है।

बिल पास करना चाहती है मोदी सरकार

बिल पास करना चाहती है मोदी सरकार

मोदी सरकार में एक मंत्री का इस बिल के बारे में कहना है कि 'यदि इसे कमिटी को जाना है तो इस पर वोटिंग होनी चाहिए।' वहीं इस बिल को लेकर विपक्ष ने सरकार पर निशाना साधा है और कहा है कि भाजपा इस मामले में बिलकुल अलग-थलग हो गई है। एक विपक्षी नेता ने दावा किया कि 'एनडीए इस पर 80 से ज्यादा वोट पाने में सफल नहीं होगी और टीडीपी और एआईएडीएमके जैसे बीजेपी के कुछ सहयोगी इस बिल को लेकर ज्यादा उत्सुक नजर नहीं आ रहे हैं।'

विधेयक में दिए गए हैं कई अधिकार

विधेयक में दिए गए हैं कई अधिकार

विधेयक में साफ कहा गया है कि मुस्लिम पीड़ित महिला को जीवन निर्वाह करने के लिए मदद की मांग के लिए मजिस्ट्रेट के पास जाने का अधिकार होगा। इसके साथ महिला को अपने नाबालिग बच्चे की कस्टडी की भी मांग करने का अधिकार होगा।

विधेयक से खुश है मुस्लिम महिलाएं

विधेयक से खुश है मुस्लिम महिलाएं

इस विधेयक में साफ कहा गया है कि अब कोई भी मुस्लिम मौखिक, लिखित, वॉट्सऐप, मेसेज या और भी किसी भी माध्यम से तीन तलाक कहकर तलाक नहीं दे सकता है। इसे अवैध माना जाएगा। इस विधेयक पर कई मुस्लिम महिलाओं ने खुशी जताई है तो वहीं केरल के राजनीतिक दल इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग ने इसका विरोध किया है।

मुस्लिम महिलाओं ने जताई खुशी

मुस्लिम महिलाओं ने जताई खुशी

इस विधेयक में साफ कहा गया है कि अब कोई भी मुस्लिम मौखिक, लिखित, वॉट्सऐप, मेसेज या और भी किसी भी माध्यम से तीन तलाक कहकर तलाक नहीं दे सकता है। इसे अवैध माना जाएगा। इस विधेयक पर कई मुस्लिम महिलाओं ने खुशी जताई है तो वहीं केरल के राजनीतिक दल इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग ने इसका विरोध किया है।

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