टॉप वैक्सीनोलॉजिस्ट का दावा- अगर नहीं मिला कोरोना का नया वेरिएंट, तो तीसरी लहर का खतरा बहुत ही कम
नई दिल्ली, 17 सितंबर: कोरोना वायरस की तीसरी लहर का खतरा अभी भी बरकरार है, लेकिन ये लहर दूसरी लहर जितनी घातक नहीं होगी। ऐसा दावा देश की शीर्ष वैक्सीनोलॉजिस्ट डॉ. गगनदीप कांग ने किया है। कांग के मुताबिक अगर कोई नया वेरिएंट सामने नहीं आया, तो तीसरी लहर आने की आशंका कम है। अगर वो आती भी है, तो दूसरी लहर जितनी घातक नहीं होगी। इसके अलावा उन्होंने ऐसे बेहतरीन टीके विकसित करने पर जोर दिया, जो कोरोना के हर वेरिएंट से अच्छी तरह निपटें।

क्रिश्चियन मेडिकल कॉलेज वेल्लोर की प्रोफेसर डॉ. गगनदीप कांग के मुताबिक अगर कोरोना वायरस का कोई नया वेरिएंट नहीं आया, तो वैसे हालात नहीं बनेंगे जो मार्च से मई तक थे। उन्होंने आगे कहा कि भारतीय वैक्सीन उद्योग ने महामारी से निपटने में अभूतपूर्व काम किया, लेकिन इसे अभी लंबा रास्ता तय करना है। वहीं देश की नियामक प्रणाली को लेकर भी उन्होंने महत्वपूर्ण सलाह दी। प्रोफेसर के मुताबिक हमारे लोग नियामक प्रणालियों के बारे में जानते हैं, लेकिन हमें पिछली दो लहरों से सबक लेना चाहिए। साथ ही ये जानना चाहिए कि हमें मजबूत नियामकों की जरूरत है, जो उद्योगों के साथ काम कर सकें।
उन्होंने कहा कि हमें अभी उद्योगों का बहुत ज्यादा विकास करना है। इसके लिए विनियमन को मजबूत करना जरूरी है। अभी देश की बहुत सी कंपनियां नियमित रूप से आरटी-पीसीआर किट बना रही हैं, लेकिन देश के टॉप लैब ही उनका उपयोग नहीं कर रहे हैं। ऐसे में हमें ये समझना होगा कि हम जो उपयोग करते हैं उसकी गुणवत्ता के बारे में सोचने की जरूरत है। ऐसा ही नियम वैक्सीन के मामले में भी लागू होता है।
BHU के प्रोफेसर ने कही थी ये बात
BHU के जंतु विज्ञान के जीन वैज्ञानिक प्रो. ज्ञानेश्वर चौबे के मुताबिक कोरोना की तीसरी लहर कम से कम तीन महीने बाद आएगी। तब तक देश में बहुत से लोगों को टीका लग चुका होगा। ऐसे में ये लहर पहले जितनी घातक नहीं होगी। उनका मानना है कि बहुत से लोगों में अपने आप एंटीबॉडी डेवल्प हुई हैं, जो तीन महीने बाद कम हो जाएंगी, तभी नई लहर का खतरा रहेगा।












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