ये हैं वो चार लोग जिन्होंने GST बिल के लिए दिन-रात एक कर दिए
बीजेपी देश में सबसे बड़े टैक्स रिफॉर्म का श्रेय लेने को तैयार है लेकिन सबसे ज्यादा क्रेडिट वित्त मंत्री अरुण जेटली को जाता है जिन्होंने साल 2014 से लगातार इस पर मेहनत की।
नई दिल्ली। मोदी सरकार बुधवार को जीएसटी से जुड़े चार बिल लोकसभा में पास कराने में कामयाब रही। जीएसटी बिल को लेकर करीब 17 साल से माथापच्ची चल रही है। इन सालों में चार लोगों का योगदान जीएसटी को इस मुकाम तक लाने में बेहद अहम रहा है।

असीम दास गुप्ता

विजय केलकर
केलकर टास्क फोर्स ने FRBM एक्ट 2003 को लागू करने में अप्रत्यक्ष कर को लेकर आपत्ति जताई। उन्होंने वैट के नियमों के आधार पर जीएसटी के नियम बनाए जाने का सुझाव दिया। 13वें वित्त आयोग के अध्यक्ष के तौर पर विजय केलकर ने जीएसटी की वकालत की। उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर जीएसटी काउंसिल के गठन का प्रस्ताव भी रखा। READ ALSO: जानिए GST लागू होने के बाद क्या होगा सस्ता-महंगा

पी. चिदंबरम
पी. चिदंबरम पहले वित्त मंत्री थे जिन्होंने आम बजट में अप्रत्यक्ष कर रिफॉर्म का प्रस्ताव रखा। यह प्रस्ताव 2006 में आया। 2012 में चिदंबरम ने बिना रुके इस पर काम किया और कई छोटी-बड़ी कमेटी बनाईं, जिससे सभी राज्यों की शिकायतें सुनी जा सकें और समाधान तलाशे जा सकें। उन्होंने इसके लिए दिसंबर 2012 की डेडलाइन भी तय कर दी। हालांकि 2014 के लोकसभा चुनाव की वजह से बिल को ला पाना कठिन हो गया।

अरुण जेटली
बीजेपी देश में सबसे बड़े टैक्स रिफॉर्म का श्रेय लेने को तैयार है लेकिन सबसे ज्यादा क्रेडिट वित्त मंत्री अरुण जेटली को जाता है जिन्होंने साल 2014 से लगातार इस पर मेहनत की। जेटली ने सभी राज्यों को राजनीतिक एजेंडा और हितों को एक तरफ करके जीएसटी के पक्ष में किया। मुश्किल की घड़ी में भी जेटली ने हार नहीं मानी और कांग्रेस उनके दोस्ताना रवैये ने राज्यसभा में अगस्त 2016 में संविधान संसोधन कर जीएसटी का रास्ता साफ किया।












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