Tomatoes Price: अब टमाटर 140 या 150 रुपये नहीं, 200 रुपये किलो लेने को हो जाइए तैयार

Tomatoes Price: टमाटर की बढ़ती कीमतों ने पिछले 2 महीने से देश वासियों को परेशान कर दिया है। उत्पादक राज्यों में लंबे समय तक कमी के कारण टमाटर की कीमतें आसमान छू रही है। लेकिन टमाटर के सस्ते होने की फिलहाल कोई उम्मीद नहीं दिख रही है।

रिपोर्ट के मुताबिक टमाटर अब 140 या 150 रुपये नहीं बल्कि 200 रुपये प्रति किलो से अधिक होने की संभावना है, जो अब तक का उच्चतम स्तर है।

Tomatoes Price

सब्जी के थोक विक्रेताओं ने कहा कि सोमवार को उत्तराखंड में 25 किलो के क्रेट की टमाटर 4,100 रुपये में दी गई। मंडी अधिकारियों को दिए गए कमीशन, स्टॉक को दिल्ली लाने के लिए परिवहन और इसमें मुनाफा जोड़ने से दिल्ली की मंडियों में थोक कीमत 5,000 रुपये प्रति क्रेट से अधिक होने की संभावना है।

उत्तराखंड के देहरादून जिले के विकास नगर से 4,100 रुपये प्रति क्रेट के हिसाब से टमाटर खरीदने वाले केशोपुर मंडी के सब्जी थोक व्यापारी सरदार टोनी सिंह ने कहा कि उन्होंने अपने जीवन में इतनी ऊंची कीमतें कभी नहीं देखी हैं।

एक अन्य मंडी के सब्जी थोक व्यापारी ने कहा, "इस साल कीमतों ने पिछले सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। इस सीजन में टमाटर आम तौर पर 25 किलो के लिए 1,200-1,400 रुपये में मिलता था। लेकिन इस बार तो हद हो गई है। मैंने अपने पूरे जीवन में इतनी ज्यादा कीमतें नहीं देखी हैं।"

देश में जून में टमाटर की कीमत बढ़ी हैं। थोक विक्रेताओं का कहना है कि टमाटर की कीमत में आई तेजी कम उत्पादन और कुछ राज्यों में भारी बारिश के कारण फसल को हुए नुकसान की वजह से हुई है।

खुदरा बाजार में यह फिलहाल 150-180 रुपये प्रति किलो बिक रहा है। लेकिन जल्द ही अब खुदरा बाजार में टमाटर 200 रुपये किलो मिलने वाला है। कई फास्ट-फूड चेन ने अपने उत्पादों से टमाटर हटा दिया है और रेस्तरां ने इसके सूप को अस्थायी रूप से मेनू से हटा दिया है।

उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए केंद्र सरकार ने इस पर सब्सिडी दी और करीब 500 केंद्रों पर टमाटर 90 रुपये प्रति किलो बेचना शुरू किया और बाद में इसे और घटाकर 80 रुपये कर दिया। लेकिन यहां इतनी लंबी लाइन लग रही है कि हर कोई वहां से टमाटर नहीं ले पा रहा है।

सब्जी व्यापारी संघ के महासचिव अनिल मल्होत्रा ने कहा कि दिल्ली को टमाटर की आपूर्ति उत्तराखंड, हरियाणा, कर्नाटक और महाराष्ट्र से होती है।

उन्होंने कहा कि 2020 और 2021 में टमाटर की बंपर फसल हुई और किसानों को अपनी उपज डंप करनी पड़ी क्योंकि परिवहन लागत उन्हें मिलने वाली कीमतों से बहुत अधिक थी। फरवरी और मार्च में भी कीमतों में गिरावट के कारण किसानों को नुकसान हुआ। इसलिए हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और देश के अन्य हिस्सों में किसानों ने इस साल टमाटर के उत्पादन में कटौती की।"

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