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TMC No Confidence Motion: अविश्वास प्रस्ताव पर 118 विपक्षी सांसदों के हस्ताक्षर, TMC ने इससे क्यों बनाई दूरी?

Lok Sabha Speaker No confidence motion: लोकसभा अध्यक्ष के खिलाफ कांग्रेस ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस लोकसभा के महासचिव को सौंप दिया है। विपक्ष द्वारा लाए गए अविश्वास प्रस्ताव के नोटिस पर तृणमूल कांग्रेस (TMC) के हस्ताक्षर नहीं किया है जिसके बाद से सियासी हलचल तेज हो गई है।

इस पूरे मामले पर अब TMC सांसद और पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने खुलकर अपनी बात रखी है। उन्होंने साफ किया कि टीएमसी अविश्वास प्रस्ताव के खिलाफ नहीं है, लेकिन पार्टी का मानना है कि यह कदम आखिरी विकल्प होना चाहिए था।

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अभिषेक बनर्जी ने कहा कि अविश्वास प्रस्ताव किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में ब्रह्मास्त्र की तरह होता है, जिसका इस्तेमाल शुरुआत में नहीं बल्कि सभी विकल्प खत्म होने के बाद किया जाना चाहिए।

अविश्वास प्रस्ताव 118 सांसदों के हस्ताक्षर

कांग्रेस सूत्रों के अनुसार, इस अविश्वास प्रस्ताव पर कुल 118 सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। पार्टी का आरोप है कि सदन की कार्यवाही के दौरान अध्यक्ष की भूमिका निष्पक्ष नहीं रही और विपक्ष को बोलने का पूरा मौका नहीं दिया गया। कांग्रेस का कहना है कि लोकतांत्रिक परंपराओं और संसदीय मर्यादाओं की रक्षा के लिए यह कदम उठाया गया है।

TMC ने No confidence motion पर क्यों नहीं किए हस्ताक्षर?

लोकसभा अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव के नोटिस पर टीएमसी सांसदों के हस्ताक्षर न होने को लेकर विपक्षी खेमे में सवाल उठे। इस पर सफाई देते हुए अभिषेक बनर्जी ने एनडीटीवी से बातचीत में कहा कि टीएमसी की मंशा कभी भी विपक्ष से अलग होने की नहीं थी।

उन्होंने कहा, हमारी राय में पहले विपक्ष को अपनी सभी मांगों को लेकर लोकसभा अध्यक्ष को एक साझा चिट्ठी लिखनी चाहिए थी और उन्हें कार्रवाई के लिए दो से तीन दिन का समय देना चाहिए था। अगर इसके बाद भी कोई कदम नहीं उठाया जाता, तो अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस देना बिल्कुल सही होता। उस स्थिति में टीएमसी भी पूरी तरह साथ देती।"

TMC का सुझाव- पहले पत्र, फिर अविश्वास प्रस्ताव

संसद भवन के बाहर मीडिया से बातचीत में अभिषेक बनर्जी ने बताया कि टीएमसी ने कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों को यह सुझाव दिया था कि पहले एकजुट होकर स्पीकर को पत्र लिखा जाए। उन्होंने कहा कि इस पत्र में कई मुद्दों को शामिल किया जाना चाहिए था, जैसे-

विपक्षी सांसदों का निलंबन

नेता प्रतिपक्ष को बोलने की अनुमति न मिलना

महिला सांसदों पर लगाए गए कथित झूठे आरोप

लोकसभा अध्यक्ष पर पक्षपातपूर्ण रवैये के आरोप

अभिषेक बनर्जी के मुताबिक, हमने कहा था कि यह पत्र सभी विपक्षी सांसदों के हस्ताक्षर के साथ दिया जाए और स्पीकर को 2-3 दिन का समय दिया जाए। अगर तब भी कोई कार्रवाई नहीं होती, तो अविश्वास प्रस्ताव लाने का रास्ता हमेशा खुला रहता।

Abhishek Banerjee Statement:'अविश्वास प्रस्ताव आखिरी कदम होना चाहिए'

अभिषेक बनर्जी ने दो टूक कहा कि अविश्वास प्रस्ताव को हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए। अविश्वास प्रस्ताव आखिरी कदम होता है। पहले ही ब्रह्मास्त्र का इस्तेमाल क्यों करना? लोकतंत्र में हर कदम सोच-समझकर उठाया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी साफ किया कि टीएमसी अविश्वास प्रस्ताव के सिद्धांत के खिलाफ नहीं है, बल्कि उसके टाइमिंग और प्रक्रिया को लेकर अलग राय रखती है।

क्या विपक्षी खेमे में बढ़ेगी खटास?

टीएमसी के इस रुख के बाद यह सवाल उठने लगे हैं कि क्या विपक्षी एकजुटता पर असर पड़ेगा। हालांकि अभिषेक बनर्जी ने इस बात से इनकार किया और कहा कि टीएमसी विपक्षी एकता के साथ है, लेकिन रणनीति को लेकर अलग नजरिया रखना गलत नहीं है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह बयान विपक्ष के भीतर रणनीति और नेतृत्व को लेकर चल रही खींचतान को भी उजागर करता है।

अब यह देखना दिलचस्प होगा कि विपक्ष इस मुद्दे पर आगे क्या कदम उठाता है और क्या लोकसभा अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव को लेकर कोई नई रणनीति बनाई जाती है। वहीं टीएमसी के रुख से साफ है कि पार्टी टकराव के बजाय पहले संवाद और औपचारिक प्रक्रिया पर जोर दे रही है।

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