ट्रिपल तलाक के बीच भाजपा ने संजय सिंह के बहाने कांग्रेस को दिए तीन झटके

नई दिल्ली- दिग्गज कांग्रेसी नेता और गांधी-नेहरू परिवार के बेहद खास संजय सिंह के जरिए मंगलवार को बीजेपी ने कांग्रेस को एक साथ तीन-तीन झटके दिए। उन्होंने ट्रिपल तलाक वाले दिन राज्यसभा से इस्तीफा दिया, जिससे बेहद अहम वक्त पर सदन में कांग्रेस का आंकड़ा और घट गया। वे और उनकी पत्नी दोनों ने एक साथ कांग्रेस छोड़ने का फैसला किया और दोनों ही बीजेपी ज्वाइन करने जा रहे हैं। यही नहीं संजय सिंह के साथ छोड़ने से भविष्य में अमेठी में गांधी परिवार की स्थिति और कमजोर हो सकती है।

ट्रिपल तलाक पर वोटिंग के दिन दिया इस्तीफा

ट्रिपल तलाक पर वोटिंग के दिन दिया इस्तीफा

असम से कांग्रेस के सांसद संजय सिंह ने उस दिन राज्यसभा की सदस्यता छोड़ी, जिस दिन सदन में ट्रिपल तलाक बिल को पास कराने और पास नहीं होने देने को लेकर सत्ताधारी बीजेपी और कांग्रेस समेत बाकी विपक्षी दलों के बीच एक-एक वोट को लेकर रस्साकशी चल रही थी। संजय सिंह समेत राज्य सभा में कांग्रेस के पास 48 सांसद थे। लेकिन, उनके इस्तीफे के चलते यह आंकड़ा घटकर 47 और यूपीए के सदस्यों का आंकड़ा घटकर 68 से 67 रह गया। ये भाजपा की ओर से संजय सिंह के माध्यम से कांग्रेस को दिया गया पहला झटका था और आखिरकार राज्यसभा से यह बिल पास कराने में बीजेपी को कामयाबी मिल भी गई। जहां, ट्रिपल तलाक बिल के पक्ष में 99 और विपक्ष में केवल 84 वोट ही पड़ सके।

पति-पत्नी ने दिया कांग्रेस से भी इस्तीफा

पति-पत्नी ने दिया कांग्रेस से भी इस्तीफा

कांग्रेस के लिए दूसरा झटका ये रहा कि राज्यसभा की इस्तीफा देते ही संजय सिंह ने ऐलान किया कि वो बुधवार को बीजेपी की सदस्यता लेंगे। इसकी वजह बताते हुए उन्होंने कहा कि "कांग्रेस अभी भी भूतकाल में जी रही है, जो भविष्य से अनजान है। आज देश प्रधानमंत्री मोदी के साथ है और अगर देश उनके साथ है, तो मैं भी उनके साथ हूं। मैं कल बीजेपी ज्वाइन करूंगा। मैंने पार्टी के साथ-साथ राज्यसभा की सदस्यता से भी इस्तीफा दे दिया है।" उन्होंने कहा कहा कि "मैं 1984 से कांग्रेस में था। मेरे छोड़ने के फैसले से कांग्रेस पर किसी तरह का असर नहीं पड़ेगा। कांग्रेस में पिछले 15 साल में जो हुआ है वैसा पहले कभी नहीं हुआ था। मैंने बहुत सोचने के बाद ये फैसला लिया है। बड़ी बात ये है कि संजय सिंह के साथ ही उनकी पत्नी अमीता सिंह ने भी कांग्रेस छोड़ दी है, जो उत्तर प्रदेश में पार्टी की ऑल इंडिया प्रोफेशनल कांग्रेस की चेयरपर्सन थीं।

अमेठी में राहुल की हार के बाद कांग्रेस को एक और झटका

अमेठी में राहुल की हार के बाद कांग्रेस को एक और झटका

संजय सिंह को हमेशा से गांधी परिवार का बेहद खास माना जाता रहा है। इसके चलते उनका कांग्रेस से जाना पार्टी के लिए किसी तीसरे झटके से कम नहीं है। इसकी वजह ये है कि वे अमेठी राज घराने से आते हैं और कांग्रेस के लोग अमेठी को गांधी-नेहरू परिवार का गढ़ मानते हैं। संजय सिंह की पहचान ही 'अमेठी नरेश' की रही है। अमेठी राज परिवार से जुड़े होने के चलते उनका क्षेत्र में खासा प्रभाव है और इस वजह से वे अमेठी, रायबरेली और सुल्तानपुर जैसी सीटों पर गांधी परिवार के सदस्यों की चुनावों में मदद करते आए हैं। हालांकि, इस बार लोकसभा चुनाव में वे खुद सुल्तानपुर से बीजेपी की मेनका गांधी से हार गए थे। यहां एक और बात का जिक्र करना जरूरी है कि संजय सिंह के लिए बीजेपी बिल्कुल नई नहीं है और वे 90 की दशक में बीजेपी की टिकट पर ही यहां से चुनाव जीत भी चुके हैं। उनकी पत्नी अमीता सिंह भी 2002 में भाजपा की टिकट पर अमेठी विधानसभा के लिए चुनी जा चुकी हैं। लेकिन, 2017 में उन्हें अमेठी में ही बीजेपी की गरिमा सिंह के हाथों हार का सामना करना पड़ा था, जो संजय सिंह की ही पहली पत्नी हैं।

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