पुणे: नयना पुजारी गैंगरेप हत्याकांड में तीनों दोषियों को फांसी मुकर्रर
7 अक्टूबर 2009 को रात 8 बजे वो घर जाने के लिए लक्ष्मी हॉस्पिटल के पास बस स्टॉप पर बस का इंतजार कर रही थीं तभी तीनों बदमाशों ने इंडिका कार में लिफ्ट देने के बहाने नयना को बैठाया लिया था...
पुणे। पूरे महाराष्ट्र में खलबली मचानेवाला, दर्दनाक नयना पुजारी हत्याकांड और गैंगरेप मामले में आखिरकार पुणे कोर्ट ने दोषियों को फांसी देने का फैसला सुना दिया। इस फैसले का पुणे और पूरे महाराष्ट्र में सम्मान किया गया। सात साल पहले सॉफ्टवेयर इंजीनियर नयना पुजारी के साथ गैंगरेप और हत्या करने के मामले में कोर्ट को मंगलवार को फैसला देना था। फैसला आते ही नयना के पति रो पड़े और न्याय प्रक्रिया पर अपना विश्वास जाहिर किया।

नयना पुजारी हत्याकांड मामले में कोर्ट ने तीन दोषियों को फांसी की सजा सुनाई है। पुणे सत्र न्यायालय की न्यायधीश एलएल येनकर ने आरोपी योगेश राऊत, महेश ठाकुर और विश्वास कदम इन तीनों को दोषी पाया और फांसी मुकर्रर की। वहीं गिरफ्तार किया गया चौथा आरोपी राजेश चौधरी सरकारी गवाह बन गया जिसे कोर्ट ने निर्दोष बरी कर दिया।

क्या है पूरा मामला
नयना पुजारी पुणे के खराडी एरिया में सेनीक्रॉन प्राइवेट लिमिटेड सॉफ्टवेयर कंपनी में काम करती थी। 7 अक्टूबर 2009 को रात 8 बजे वो घर जाने के लिए लक्ष्मी हॉस्पिटल के पास बस स्टॉप पर बस का इंतजार कर रही थीं तभी तीनों बदमाशों ने इंडिका कार में लिफ्ट देने के बहाने नयना को बैठाया लिया था।

उसके बाद बदमाशों ने नयना को बारी-बारी वाघोली, तुलापुर, जरेवाडी ले जाकर सामूहिक बलात्कार किया और बाद में गला घोंटकर हत्या कर दी। यही नहीं इस सामूहिक दुष्कर्म में नयना के साथ जघन्य से जघन्य कृत किए गए। यहां तक की रेप के बाद हत्या कर उसका चेहरा भी पत्थर से कुचल दिया गया था।

सरकारी वकील हर्षल निम्बालकर ने बताया कि अदालत में अभियोजन पक्ष ने सरकारी गवाह के साथ 37 गवाहों को पेश किया था। जो मौका-ए-वारदात पर वहां मौजूद थे। इस केस में मौके से मिले सबूतों के साथ-साथ आरोपियों के कपड़ों पर लगे नयना के खून की फॉरेंसिक रिपोर्ट भी कारगर साबित हुई। बता दें कि नयना पुजारी के आरोपियों पर मुकदमा साल 2011 में ही शुरू हो गया था लेकिन मामले का मुख्य आरोपी योगेश राउत मेडिकल के लिए अस्पताल ले जाते समय फरार हो गया था।
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