अमेरिका में हजारों भारतीय की नौकरी पर लटकी है तलवार, कांग्रेस ने मोदी सरकार से हस्तक्षेप की मांग की
नई दिल्ली। कांग्रेस ने Covid19 महामारी के बीच अमेरिका में एच-1 बी वीजा धारी अनुमानित 75000 भारतीयों की नौकरी पर आई सकंट पर ध्यान दिलाते हुए प्रधानमंत्री मोदी से आग्रह किया है कि वो संभावित नुकसान को रोकने के लिए अमेरिका राष्ट्रपित डोनाल्ड ट्रंप से बात करें।

दरअसल, एच-1बी एक गैर प्रवासी वीजा है, जो अमेरिकी कंपनियों को विदेशी पेशेवरों को कुछ खास व्यवसायों में नियोजित करने की अनुमति देता है। वर्तमान संघीय नियमों के मुताबिक नौकरी छोड़ने के 60 दिनों के भीतर इन वीजाधारकों को अपने परिवार के साथ अमेरिका छोड़ना जरूरी है।

कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने शुक्रवार का जारी एक बयान में कहा कि एचसीक्यू दवा नीति में "इंडिया फर्स्ट" नीति से समझौता करने के बाद भी मोदी सरकार अमेरिका में भारतीयों की सुरक्षा और आजीविका को सुरक्षित करने में फिर से विफल रही है।

सुरजेवाला ने आगे कहा कि "प्रधानमंत्री के लिए यह सुनिश्चित करने का समय कि 'नमस्ते ट्रम्प' की हमारी नरम शक्ति अमेरिका में एच -1 बी वीजा धारकों के उचित उपचार में परिवर्तित किया जाए," यह देखते हुए कि अमेरिका ने अमेरिकियों को अस्थायी भुगतान पर रखा है या महामारी के मद्देनजर उन्हें कम घंटे काम करने की अनुमति दी है।

उन्होंने बताया कि अनुमानित 75000 एच -1 बी वीजा धारी भारतीयों की नौकरी पर लटक रहा तलवार एक बड़ा आघात है, जिन्हें संयुक्त राज्य अमेरिक ने ले-ऑफ के मामले में नई नौकरी खोजने के लिए केवल 60 दिन का समय दिया है।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के लिए यह मुद्दा उठाने के लिए अभी सही मौका है और कांग्रेस मांग करती हैं कि मोदी सरकार एच -1 बी वीज़ा धारक भारतीयों की नौकरी के बाद की सीमा को 180 दिनों तक सुनिश्चित कराएं, जिससे उन्हें स्थिति में सुधार होने पर दूसरी नौकरी खोजने के लिए पर्याप्त समय मिलेगा।
जारी बयान में सुरजेवाला ने यह भी कहा कि मोदी सरकार को यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि जिन H-1B वीजा धारकों ने अपनी नौकरी खो दी है, उनकी COVID-19 और अन्य स्वास्थ्य बीमा फ्री ऑफ कॉस्ट हो, जिसमें उनके परिवारों को सहायता प्रदान करना शामिल हो।

कांग्रेस नेता ने कहा कि उनकी पार्टी यह भी मांग करती है कि मोदी सरकार N -COM, CII और FICCI जैसे भारतीय उद्योग परिसंघों के साथ विचार-विमर्श करे ताकि H-1B वीजा धारी भारतीयों की नौकरी के नुकसान को रोका जा सके। उन्होंने कहा कि अमेरिका में H-1B वीजा पर 309,986 भारतीय काम कर रहे हैं और दोनों देशों में COVID-19 लॉकडाउन को देखते हुए उनके लिए भारत लौटना असंभव है।

उन्होंने बताया कि लगभग 60,000 H-1B वीजा आम तौर पर प्रत्येक वर्ष भारतीयों को दिए जाते हैं, जिसमें कुछ वर्षों से पहले ही लगातार गिरावट दर्ज हुई हैं जबकि कुछ शीर्ष आईटी कंपनियों में जीडीपी में 8 फीसदी योगदान करने वालों की अस्वीकृति दर 53 फीसदी तक बढ़ गई है। उन्होंने कहा कि आर्थिक मंदी लॉकडाउन के दौरान चरम पर पहुंच रही है।

सुरजेवाला ने आरोप लगाया कि अधिकांश संगठन अनुबंध को समाप्त करने पर भी विचार कर रही हैं इससे पहले मोदी सरकार और ट्रम्प प्रशासन कोई हल नहीं निकालना चाहिए। उन्होंने कहा कि मौजूदा स्थिति को युद्ध के बाद की तरह लिया जाना चाहिए, क्योंकि पोस्ट-टर्मिनेशन के बाद उन्हें नौकरी खोजने के लिए 60 दिन का समय मिलेगा, जो इन चुनौतीपूर्ण समय में यथोचित नहीं लगता है।
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क्या है एच-1 बी वीजा?
एच-1बी एक गैर प्रवासी वीजा है, जो अमेरिकी कंपनियों को विदेशी पेशेवरों को कुछ खास व्यवसायों में नियोजित करने की अनुमति देता है। वर्तमान संघीय नियमों के मुताबिक नौकरी छोड़ने के 60 दिनों के भीतर इन वीजाधारकों को अपने परिवार के साथ अमेरिका छोड़ना जरूरी है।

Covid19 महामारी के चलते अमेरिकी में बड़े पैमाने पर छंटनी की आशंका
कोरोना वायरस महामारी के चलते अमेरिकी अर्थव्यवस्था के विभिन्न क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर छंटनी की आशंका है और आने वाले महीनों में हालात बिगड़ सकते हैं। अमेरिका में 21 मार्च को समाप्त सप्ताह के दौरान रिकॉर्ड 33 लाख अमेरिकियों ने प्रारंभिक बेरोजगारी के दावे किए हैं। देश में लाखों लोग अपनी नौकरी खो चुके हैं।

एक अनुमान के अनुसार लगभग 4.7 करोड़ लोग बेरोजगार हो सकते हैं
एक अनुमान के अनुसार लगभग 4.7 करोड़ लोग बेरोजगार हो सकते हैं। दूसरी ओर एच-1बी वीजाधारक न तो बेरोजगारी लाभ पाने के पात्र हैं और न ही सामाजिक सुरक्षा लाभ के हकदार हैं, भले ही इसके लिए उनके वेतन से कटौती की गई हो।

अमेरिका में बड़ी संख्या में एच-1बी कर्मचारी को निकाला जा रहा है
प्रारंभिक रिपोर्ट्स से पता चलता है कि बड़ी संख्या में एच-1बी कर्मचारियों को नौकरी से निकाला जा रहा है। कुछ मामलों में कंपनियों ने अपने एच-1बी कर्मचारियों को पहले ही आगाह कर दिया है कि उन्हें नौकरी से निकाला जा सकता है।

विदेशी IT पेशेवरों ने 180 दिनों तक रुकने की इजाजत की आग्रह की है
विदेशी आईटी पेशेवरों ने ट्रंप प्रशासन से आग्रह किया है कि कोरोनावायरस महामारी के कारण अमेरिका में बड़े पैमाने पर छंटनी की स्थिति में नौकरी जाने पर उन्हें 60 दिन के बजाए 180 दिनों तक अमेरिका में रुकने की इजाजत दी जाए। इन पेशेवरों में ज्यादातर भारतीय एच-1बी वीजाधारक हैं।

प्रवास बढ़ाने के लिए व्हाइट हाउस की वेबसाइट पर अभियान शुरू किया गया
एच-1बी वीजाधारकों ने नौकरी छोड़ने के बाद अमेरिका में अपने प्रवास के समय को बढ़ाने के लिए व्हाइट हाउस की वेबसाइट पर एक याचिका अभियान शुरू किया है। याचिका में सरकार से अस्थायी प्रवास की अवधि को 60 दिनों से बढ़ाकर 180 दिन करने और इस कठिन समय में एच-1बी कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का अनुरोध किया गया है। व्हाइट हाउस से प्रतिक्रिया प्राप्त करने के लिए कम से कम एक लाख याचिकाओं की जरूरत होती है।
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