वे विपक्षी नेता जिन पर कसा सीबीआई और ईडी का शिकंजा
दिल्ली की शराब नीति में कथित घोटाले की जांच कर रही सीबीआई ने रविवार को दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया को गिरफ़्तार कर लिया.
महीनों से चल रही जांच में रविवार को केंद्रीय जांच एजेंसी ने सिसोदिया को पूछताछ के लिए बुलाया था.
'आप' के एक अन्य नेता और दिल्ली सरकार के कैबिनेट मंत्री सत्येंद्र जैन पहले ही तिहाड़ जेल में बंद हैं.
सत्येंद्र जैन को कथित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ईडी ने पिछले साल मई में गिरफ़्तार किया था और तबसे वो जेल में बंद हैं.
रविवार को सीबीआई पूछताछ में शामिल होने से पहले सिसोदिया को अपनी गिरफ़्तारी की आशंका थी और उन्होंने अपने भावनात्मक संबोधन में 'जेल भेजे जाने' की बात कही थी.
दिल्ली के मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने सिसोदिया को बेकसूर बताया तो वहीं बीजेपी ने गिरफ़्तारी को सही ठहराया है.
https://twitter.com/ArvindKejriwal/status/1629698806366494722
आम आदमी पार्टी ने गिरफ़्तारी को 'तानाशाही' क़रार देते हुए 'लोकतंत्र के लिए काला दिन' कहा. पार्टी ने कहा कि बीजेपी ने ये गिरफ़्तारी राजनीतिक द्वेष के चलते की.
बीते कुछ सालों में कई विपक्षी नेताओं पर सीबीआई और ईडी का शिकंजा कसा है और विपक्षी नेताओं ने राजनीतिक बदले की कार्रवाई का आरोप लगाया है.
पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र, झारखंड, छत्तीसगढ़ में विपक्षी सरकारों के शीर्ष नेताओं पर छापे पड़े, पूछताछ की गई, उनमें से कई को जेल भेजा गया.
पिछले साल इंडियन एक्सप्रेस ने अपनी एक पड़ताल में बताया था कि 2014 के बाद आठ सालों में नेताओं के ख़िलाफ़ ईडी के इस्तेमाल में चार गुना बढ़ोतरी हुई है. इस दौरान 121 राजनेता जांच के दायरे में आए जिनमें 115 विपक्षी नेता हैं. यानी इस दौरान 95 प्रतिशत विपक्षी नेताओं पर कार्रवाई हुई.
आइए जानते हैं उन प्रमुख विपक्षी नेताओं के बारे में जिन पर पिछले सालों में ईडी और सीबीआई ने शिकंजा कसाः-
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शिवसेना नेता संजय राउत
महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के क़रीबी और शिवसेना के नेता संजय राउत को मुंबई में एक अगस्त 2022 को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने गिरफ़्तार किया था.
ईडी ने उन पर मुंबई के गोरेगांव में सिद्धार्थ नगर के एक चॉल में 672 फ़्लैटों के पुनर्निमाण के मामले में ज़मीन के हेरफेर का आरोप लगाया था.
क़रीब तीन महीने बाद उन्हें 10 नवंबर 2022 को सशर्त ज़मानत दी गई. तब संजय राउत ने कहा था कि महाराष्ट्र की 'महाविकास अघाड़ी सरकार न गिराने पर जांच एंजेंसियों ने उन्हें परेशान' किया.
इससे पहले ईडी ने महाराष्ट्र के पूर्व गृह मंत्री और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के वरिष्ठ नेता अनिल देशमुख को नवंबर 2021 में गिरफ़्तार किया था. उन्हें प्रीवेंशन ऑफ़ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट की धारा 19 के तहत गिरफ़्तार किया गया. उस समय वो महाराष्ट्र सरकार में गृहमंत्री थे.
महाराष्ट्र सरकार के एक अन्य मंत्री और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के नेता नवाब मलिक को भी ईडी ने 24 फ़रवरी को गिरफ़्तार कर जेल भेज दिया था.
पिछले साल ही एकनाथ शिंदे 40 से अधिक विधायकों को लेकर शिवसेना से अलग हो गए और बीजेपी के साथ मिलकर सरकार बना ली.
इंडियन एक्सप्रेस ने बीते सितम्बर में की गई अपनी पड़ताल में बताया कि एनसीपी के 11 और शिवसेना के 8 नेताओं पर जांच एजेंसियों ने कार्रवाई की थी.
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हिमंत बिस्वा सरमा
इस समय हिमंत बिस्वा सरमा असम के मुख्यमंत्री हैं. वो पहले असम में कांग्रेस का प्रमुख चेहरा थे. शारदा चिटफंड घोटाला मामले में सीबीआई और ईडी ने जांच शुरू की और इस सिलसिले में उनके घर पर छापा भी मारा गया और पूछताछ भी हुई.
बाद में वे बीजेपी में शामिल हो गए और पार्टी ने उन्हें असम का मुख्यमंत्री बना दिया.
इसी तरह नारदा स्टिंग ऑपरेशन मामले में तृणमूल कांग्रेस और ममता बनर्जी के दो क़रीबी नेता शुभेंदु अधिकारी और मुकुल रॉय पर भी सीबीआई और ईडी ने शिकंजा कसा.
पश्चिम बंगाल में 2021 में विधानसभा चुनाव होने वाले थे, उससे पहले दोनों ही नेताओं ने बीजेपी ज्वाइन कर लिया. बाद में मुकुल रॉय टीएमसी में लौट आए.
इंडियन एक्सप्रेस की पड़ताल के अनुसार, टीएमसी के 19 नेताओं पर सीबीआई और ईडी की कार्रवाई चल रही है.
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बिहार में राजद नेताओं पर छापेमारी
पिछले साल अगस्त में बिहार में नीतीश सरकार के फ़्लोर टेस्ट के बीच कथित नौकरी के बदले ज़मीन घोटाले में आरजेडी नेताओं के घर सीबीआई की छापेमारी हुई.
सीबीआई ने जिन आरजेडी नेताओं के घर पर छापेमारी की उनमें लालू यादव के क़रीबी माने जाने वाले और एमएलसी सुनील सिंह, सांसद अशफ़ाक़ क़रीम, फ़ैयाज़ अहमद और पूर्व एमएलसी सुबोध राय शामिल थे.
बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और राजद के अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव को पहले ही चारा घोटाला समेत कई मामलों में सज़ा हो चुकी है.
आरजेडी के पांच नेता ईडी और सीबीआई की जांच के घेरे में हैं.
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झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरने पर ईडी का शिकंजा
झारखंड के मुख्यंत्री हेमंत सोरन पर बीजेपी नेता और पूर्व मुख्यमंत्री रघुबर दास ने फ़रवरी 2022 में आरोप लगाया कि हेमंत सोरेन ने मुख्यमंत्री और खनन मंत्री रहते हुए अपने पद का कथित तौर पर दुरुपयोग किया है.
राज्यपाल रमेश बैस ने इस शिकायत की प्रति चुनाव आयोग को भेजी और आयोग ने हेमंत सोरेन पर अपना फ़ैसला एक लिफ़ाफ़े में बंद कर राज्यपाल को भेजा था जो अब तक सार्वजनिक नहीं हो सका है.
ईडी ने हेमंत सोरेन को 3 नवंबर 2022 को पूछताछ के लिए समन भेजा था.
इन सबके बीच एक समय तो झारखंड में अस्थिरता की नौबत आ गई थी.
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कांग्रेस नेताओं पर छापेमारी
रायपुर में कांग्रेस का 85वां अधिवेशन 24-26 फ़रवरी को था. इससे पहले छत्तीसगढ़ के कई कांग्रेसी नेताओं के यहां ईडी के छापे पड़े.
20 फ़रवरी को छत्तीसगढ़ में कांग्रेस पार्टी के कोषाध्यक्ष रामगोपाल अग्रवाल, कांग्रेस विधायक देवेंद्र यादव और चंद्रदेव राय समेत आधा दर्जन कांग्रेस नेताओं के घर-दफ़्तर पर ईडी ने छापा मारा था.
कांग्रेस ने आरोप लगाया कि अधिवेशन को रोकने के लिए सरकार ईडी का इस्तेमाल कर रही है.
छत्तीसगढ़ की भूपेश बघेल सरकार पर लगातार जांच एजेंसियों का दबाव बना हुआ है. बीते दिसम्बर में भूपेश बघेल की ओएसडी सौम्या चौरसिया को ईडी ने गिरफ़्तार कर लिया था.
जून 2022 में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और राहुल गांधी को ईडी ने नेशनल हेराल्ड मामले में समन भेज कर पूछताछ के लिए बुलाया था.
बीते सितम्बर तक जांच एजेंसियों के घेरे में कांग्रेस के 24 नेता थे.
इंडियन एक्सप्रेस की पड़ताल में कहा गया है कि सितम्बर तक डीएमके के 6, बीजू जनता दल के 6, समाजवादी पार्टी के पांच, बसपा के पांच, आम आदमी पार्टी के तीन, वाईएसआरसीपी के तीन, आईएनएलडी के तीन, सीपीएम के दो, पीडीपी के दो और टीआरस, एआईएडीएमके, एमएनएस के एक-एक नेता के ख़िलाफ़ जांच एजेंसियां जांच कर रही हैं.
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