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दुनिया के इस मशहूर एयरपोर्ट को मिला देश के सबसे बड़े जेवर एयरपोर्ट बनाने का ठेका

नई दिल्ली- एनसीआर में बनने वाले देश के सबसे बड़े एयरपोर्ट बनाने का ठेका पाने में देश की तमाम कंपनियां नाकाम रही हैं। इस एयरपोर्ट का ठेका पाने में स्विटजरलैंड का ज्यूरिख एयरपोर्ट सफल रहा है। बता दें कि नोएडा जिला प्रशासन इस एयरपोर्ट के लिए जेवर में अब तक 84% जमीन अधिग्रहित करके यमुना अथॉरिटी को सौंप चुका है। बाकी 16% जमीन की अधिग्रहण प्रक्रिया पर काम जारी है। इस एयरपोर्ट का पहला फेज 2023 तक काम करने लगेगा। पूरी तरह तैयार होने के बाद इस इंटरनेशनल ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट पर एक साथ 6 से 8 रनवे काम करेंगे, ऐसी सुविधा देश के किसी भी एयरपोर्ट पर नहीं है।

ज्यूरिख एयरपोर्ट को मिला जेवर एयरपोर्ट का ठेका

ज्यूरिख एयरपोर्ट को मिला जेवर एयरपोर्ट का ठेका

एनसीआर में जेवर एयरपोर्ट बनाने का ठेका स्विटजरलैंड के मशहूर ज्यूरिख एयरपोर्ट को मिला है। इसका ठेका लेने के लिए देशी कंपनियां अडानी ग्रुप, दिल्ली इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड (डायल) और एनकोरेज इंफ्रास्ट्रक्चर भी बिडिंग प्रक्रिया में शामिल थीं। लेकिन, आखिकार देश के इस सबसे बड़े एयरपोर्ट को बनाने का ठेका प्राप्त करने में ज्यूरिख एयरपोर्ट ने सफलता पाई है। यह एयरपोर्ट 5 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में बनना है और जब यह पूरी तरह बनकर तैयार होगा तो देश का सबसे बड़ा एयरपोर्ट होगा। नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड (नियाल) ने इसके लिए पिछले 30 मई को ही टेंडर निकाला था और 30 अक्टूबर तक टेंडर जमा करने की आखिरी तारीख तय की गई थी

29,560 करोड़ रुपये की लागत का अनुमान

29,560 करोड़ रुपये की लागत का अनुमान

जेवर में बनने वाले इंटरनेशनल एयरपोर्ट का नाम नोएडा इंटरनेशनल ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट होगा, जिसे बनाने में 29,560 करोड़ रुपये की लागत आने का अनुमान है। जानकारी के मुताबिक ठेका लेने के लिए ज्यूरिख एयरपोर्ट ने इस एयरपोर्ट के लिए प्रति यात्री सबसे अधिक 400.97 रुपये की बोली लगाई। जबकि, डायल ने 351 रुपये, अडानी ग्रुप ने 360 रुपये और एनकोरेज इंटरप्राइजेज ने सिर्फ 205 रुपये की ही बोली लगाई थी। इस एयरपोर्ट के लिए जेवर में अब तक 84% जमीन अधिग्रहित की जा चुकी है और उसे यमुना अथॉरिटी के हवाले किया चुका है। बाकी 16% जमीन की अधिग्रहण प्रक्रिया पर काम भी चल रहा है।

2023 तक पहला फेज तैयार होगा

2023 तक पहला फेज तैयार होगा

नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड (नियाल) से जुड़े अधिकारियों के मुताबिक इस एयरपोर्ट का पहला फेज 2023 तक पूरा होने की उम्मीद है। बता दें कि एयरपोर्ट का पहला फेज 1,334 हेक्टेयर में फैला होगा, जिसपर 4,588 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। इस एयरपोर्ट के बन जाने के बाद दिल्ली-एनसीआर में कुल तीन एयरपोर्ट काम करने लगेंगे। अभी दिल्ली के इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट और गाजियाबाद के हिंडन एयरपोर्ट से ही हवाई सेवा उपलब्ध है। पूरी तरह से तैयार होने के बाद इस एयरपोर्ट पर 6 से 8 रनवे होंगे, जो भारत के किसी भी एयरपोर्ट पर मौजूदा वक्त में नहीं हैं।

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