ये आइडिया बचा सकता था CRPF के जवानों की जान, टल सकता था सुकमा का नक्सली हमला
पूर्व गृह सचिव के प्रस्ताव के मुताबिक, हालांकि नक्सल प्रभावित इलाकों में सेना की कोई सक्रिय भूमिका नहीं है लेकिन फिर भी सेना की मौजूदगी नक्सलियों की गतिविधियों पर लगाम लग सकती थी।
नई दिल्ली। छत्तीसगढ़ के सुकमा में नक्सली हमले में सीआरपीएफ के 25 जवानों के शहीद होने के बाद पूर्व केंद्रीय गृह सचिव एलसी गोयल ने एक ऐसे सुझाव का जिक्र किया है जिसके चलते ये हमला टाला जा सकता था। गोयल ने कहा कि साल 2015 में उन्होंने सुरक्षा अधिकारियों से बस्तर में आर्मी कैंट स्थापित करने का सुझाव दिया था। लेकिन इस पर कोई ध्यान नहीं दिया गया।

नक्सल प्रभावित इलाकों में सेना की भूमिका नहीं
पूर्व गृह सचिव के प्रस्ताव के मुताबिक, हालांकि नक्सल प्रभावित इलाकों में सेना की कोई सक्रिय भूमिका नहीं है लेकिन फिर भी सेना की मौजूदगी नक्सलियों की गतिविधियों पर लगाम लग सकती थी। सेना की मौजूदगी से कनेक्टिविटी और विकास के रास्ते भी खुलते। READ ALSO: गृहमंत्री राजनाथ सिंह बोले- विकास से बौखलाए हैं नक्सली, सुकमा हमला हमारे लिए है चुनौती
आर्मी कैंट स्थापित होने से पड़ता असर
एलसी गोयल ने कहा, 'बतौर गृह सचिव मेरे कार्यकाल के दौरान मैंने बस्तर में एक आर्मी कैंट स्थापित करने का प्रस्ताव रखा था। जिस तरह वामपंथी उग्रवादी अपने अस्तित्व को बढ़ाने के लिए लगातार हमले कर रहे हैं, ऐसे में आर्मी कैंट के होने से काफी असर पड़ता और उन पर काबू किया जा सकता था।' READ ALSO: सुकमा नक्सली हमले की 6 बड़ी बातें, एक क्लिक पर जानें सब कुछ
बढ़ सकती थी विकास की रफ्तार
उन्होंने कहा कि अगर एक कैंटोन्मेंट होता तो इससे वहां सड़क और टेलीकम्युनिकेशन की कनेक्टिविटी काफी ज्यादा होती। इलाके निर्धारित समय पर सर्वे किए जाते और विकास को रफ्तार मिलती। एक बार इलाके में विकास होता तो उसे स्पेशल इकनॉमिक जोन बनाया जा सकता था। उन्होंने बताया कि गृहमंत्री और शीर्ष सुरक्षा अधिकारियों के सामने भी उन्होंने बाकायदा पेपर प्रेजेंट किया था जिसमें इसका पूरा खाका दिया गया था।












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