अयोध्या में मंडरा रहा आतंकी खतरा, 30 बम निरोधक दस्ते तैनात

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    Ayodhya Case में फैसला आने से पहले आतंकी हमले को लेकर सुरक्षा बेहद कड़ी | वनइंडिया हिंदी

    अयोध्या। राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद पर सुप्रीम कोर्ट किसी भी समय फैसला सुना सकता है। ऐसे में अयोध्या की सुरक्षा के लिए सरकार ने पुख्ता इंतजाम कर दिए हैं। शहर में आतंकी खतरे का खुफिया इनपुट मिलने के बाद यहां 30 बम निरोधक दस्ते भी तैनात कर दिए गए हैं। मौजूदा सीजेआई रंजन गोगोई 17 नवंबर को सेवानिवृत हो रहे हैं और फैसला उससे पहले आने की संभावना है।

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    सूत्रों के अनुसार, अधिकारियों ने सभी धर्मशालाओं से कहा है कि 12 नवंबर से पहले वहां रहने वाले सभी लोगों को जाने के लिए कह दिया जाए। मंगलवार की रात तक सभी धर्मशालाओं को खाली करने का आदेश दिया गया है। साथ ही जो स्थानीय निवासी नहीं है, उसे भी शहर छोड़ने के लिए कहा गया है।

    सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम

    सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम

    शहर की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए कम से कम 300 सुरक्षा कंपनियां अयोध्या में तैनात रहेंगी। पुलिस ने विवादित स्थल के पास राम कोट क्षेत्र की सड़कों को भी सील कर दिया है। साथ ही मंत्रालय ने पैरामिलिट्री फोर्स की कंपनियों के अलावा बीएसएफ, आरएएफ, सीआईएसएफ, आईटीबीपी और एसएसबी की तीन-तीन कंपनियां भी भेजी हैं।

    राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को सलाह

    राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को सलाह

    इससे एक दिन पहले ही गृह मंत्रालय ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से अयोध्या फैसले को ध्यान में रखते हुए सतर्क रहने और उचित कानून व्यवस्था सुनिश्चित करने की सलाह दी है। इस मामले की सुनवाई सीजेआई रंजन गोगोई की अध्यक्षता में पांच जजों की बेंच ने की है।

    दशकों पुराना है विवाद

    दशकों पुराना है विवाद

    बता दें अयोध्या में जमीन का विवाद कई दशक पुराना है। इस मामले में सितंबर 2010 में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपना फैसला सुनाते हुए 2.77 एकड़ विवादित जमीन को राम लला, निर्मोही अखाड़ा और सुन्नी वक्फ बोर्ड के बीच बांट दिया था। जिससे तीनों ही पक्षों ने नाइत्तेफाकी दिखाते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। अब मामले पर आखिरी फैसला सुप्रीम कोर्ट सुनाएगा।

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