केरल विधानसभा चुनाव में ये हैं 6 प्रमुख चेहरे
नई दिल्ली। केरल में 6 अप्रैल को विधानसभा चुनाव है। सीपीएम के नेतृत्व वाला सत्तारुढ़ एलडीएफ सत्ता बरकरार रखने के लिए चुनाव लड़ रहा है। यह देश में वामपंथियों का आखिरी किला है। कांग्रेस के नेतृत्व वाला यूडीएफ सत्ता में आने के लिए ताकत लगाये हुए है। चुनाव प्रचार थमने से दो दिन पहले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भाजपा में जोश फूंकने के लिए केरल में धुआंधार रैलियां कीं। नरेन्द्र मोदी ने भाजपा को केरल में तीसरे विकल्प के रूप में पेश किया। उन्होंने कहा, “मेट्रोमैन श्रीधरन के भाजपा में आने से केरल की चुनावी राजनीति में बहुत बड़ा बदलाव आने वाला है। केरल के युवा अब एलडीएफ और यूडीएफ से उब चुके हैं। राजनीतिक परिवर्तन की जमीन तैयार हो चुकी है।” केरल विधानसभा का चुनाव राहुल गांधी के लिए भी एक बड़ी परीक्षा है। वे केरल के वायनाड से सांसद हैं। अब उनके कंधों पर कांग्रेस को जीत दिलाने एक बड़ी जिम्मेदारी आन पड़ी है। विधानसभा चुनाव के प्रमुख उम्मीदवारों पर डालते हैं एक नजर।

पी विजयन, मुख्यमंत्री
सीपीएम के नेता और केरल के मुख्यमंत्री पी विजयन धर्मदम सीट से चुनाव लड़ रहे हैं। वे सीटिंग विधायक हैं और अपनी सीट बरकरार रखने के लिए मैदान में हैं। विजयन का मुकाबला कांग्रेस के सी रघुनाथ और भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सी के पद्मनाभन से है। लेकिन विजयन के लिए सबसे बड़ी चुनौती वह महिला बन गयीं हैं जिनकी दो नाबालिग लड़कियों की 2017 में रेप के बाद मृत पायी गयीं थीं। माना जा रहा है कि विजयन इस बार कठिन मुकाबले में फंसे हुए हैं।

मेट्रोमैन ई श्रीघरन (केरल में भाजपा की उम्मीद)
भारत के प्रतिष्ठित टेक्नोक्रेट ई श्रीधरन भाजपा के टिकट पर पालक्कड़ विधानसभा सीट से चुनाव लड़ रहे हैं। श्रीधरन को केरल में भाजपा की नयी उम्मीद के रूप में देखा जा रहा है। उन्हें भविष्य का मुख्यमंत्री भी माना जा रहा है। पालक्कड़ सीट कांग्रेस की है। यहां से कांग्रेस के शफी पराम्बिल दो बार से विधायक चुने जा चुके हैं। सीपीएम के सीपी प्रमोद भी मैदान में हैं। 2016 के चुनाव में भाजपा इस सीट पर दूसरे स्थान पर रही थी। सीपीएम को तीसरा स्थान मिला था। कुछ वर्षों के दौरान पालक्कड़ में गैरमलयाली लोगों की संख्या तेजी से बढ़ी है। देश में मेट्रो रेल का जाल बिछाने वाले श्रीधरन की केरल में विशेष प्रतिष्ठा है। भाजपा इस सीट को जिताऊ मान कर चल रही है।

ओमान चांडी (पूर्व मुख्यमंत्री, कांग्रेस)
कांग्रेस नेता और पूर्व मुख्यमंत्री ओमान चांडी केरल की पुथुपल्ली सीट से चुनाव लड़ रहे हैं। उनका मुकाबला सीपीएम के युवा नेता जैक सी थॉमस और भाजपा के एन हरि से है। 78 साल के चांडी ने विधानसभा में 51 साल पूरे कर लिये हैं। उन्होंने 1970 में केवल 27 साल की उम्र में विधानसभा चुनाव जीत कर तहलका मचा दिया था। चांडी पुथुपल्ली से 11 बार विधायक चुने जा चुके हैं। वे कांग्रेस के सबसे वरिष्ठ और शक्तिशाली नेता हैं। मुख्यमंत्री पद के दावेदारों में उनका भी नाम है।

के राजशेखरन, भाजपा (मेघालय के पूर्व राज्यपाल)
केरल की नेमोम सीट भाजपा की प्रतिष्ठा से जुड़ी है। इस सीट पर भाजपा ने केरल में पहली जीत का स्वाद चखा है। 2016 में इस सीट भाजपा नेता और पूर्व केन्द्रीय मंत्री ओ राजगोपाल ने जीत हासिल की थी। लेकिन इस बार भाजपा ने नेमोम से के राजशेखरन को उम्मीदवार बनाया है। भाजपा ने इस सीट को निकालने के लिए अपने पहले ही बिधायक को बेटिकट कर दिया। राजशेखरन मेघालाय के पूर्व राज्यपाल रहे हैं। उनका मुकाबला सीपीएम के शिवनकुट्टी से है।

मनि सी कप्पन (चर्चित सीट पाला के विधायक)
मनि सी कप्पन केरल की हॉट सीट पाला के विधायक हैं। उनके पहले इस सीट पर के एम मणि का कब्जा था। के एम मणि भारत के वह चर्चित नेता थे जिनके नाम पर सबसे अधिक समय तक लगातार विधायक रहने का रिकॉर्ड दर्ज है। वे केरल कांग्रेस मणि के संस्थापक थे। उन्होंने 1965 में पहली बार विधानसभा का चुनाव जीता था। इसके बाद से वे पाला से अपने जीवन की आखिरी सांस तक (2019) लगातार विधायक रहे। 2019 में उनका निधन हुआ तो उपचुनाव कराना पड़ा। इस चुनाव में कप्पन ने राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ कर जीत हासिल की थी। उस समय राकंपा एलडीएफ का हिस्सा थी। लेकिन इस साल फरवरी में कप्पन ने एलडीएफ से नाता तोड़ कर कांग्रेस के नेतृतव वाले यूडीएफ में शामिल हो गये। उनका मुकाबला केरल कांग्रेस मणि के उम्मीदवार जोस के मणि से है। जोस, के एम मणि के पुत्र हैं।

रमेश चेन्निथला (नेता प्रतिपक्ष, कांग्रेस)
कांग्रेस के नेता रमेश चेन्निथला केरल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष हैं। वे हरिपद विधानसभा सीट से विधायक हैं। फिर मैदान में हैं। वे यहां से 1982, 1987, 2011 और 2016 में चुनाव जीत चुके हैं। उनके नाम पर केरल के सबसे युवा मंत्री होने का रिकॉर्ड दर्ज है। 29 साल की उम्र में वे पहली बार केरल सरकार में मंत्री बने थे। 2021 के विधानसभा चुनाव में उनका मुकाबला सीपीआइ के आर साजीलाल और भाजपा के के. सोमन से है। कांग्रेस की तरफ से रमेश चेन्निथला को भी मुख्यमंत्री पद का दावेदार माना जा रहा है।
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