तीसरी लहर का पूरे भारत में असर होने की संभावना कम, कुछ राज्यों में दिख रहा असर- ICMR
इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) के डॉ. समीरन पांडा ने कहा कि कोरोना की संभावित तीसरी लहर के शुरुआती संकेतों को कुछ राज्यों में मामलों की संख्या में वृद्धि के रूप में देखा जा सकता है।
नई दिल्ली, 30 अगस्त। इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) के डॉ. समीरन पांडा ने कहा कि कोरोना की संभावित तीसरी लहर के शुरुआती संकेतों को कुछ राज्यों में मामलों की संख्या में वृद्धि के रूप में देखा जा सकता है। महामारी विज्ञान और संचारी रोगों के प्रमुख डॉ. पांडा ने मीडिया से हुई बातचीत में कहा कि हमें यह नहीं सोचना चाहिए कि हमारे पास दो या तीन महीने का समय है, कुछ राज्यों में हम तीसरी लहर के शुरुआती संकेत देख रहे हैं।
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उन्होंने कहा कि आगे त्योहार आने वाले हैं और यदि उस दौरान कोरोना के दिशा-निर्देशों का कड़ाई से पालन नहीं किया गया तो कोरोना के मामलों में तेजी से वृद्धि हो सकती है। उन्होंने कहा कि यह जरूरी नहीं कि कोरोना की तीसरी लहर दूसरी लहर से कम खतरनाक होगी। उन्होंने कहा कि जिन राज्यों में कोरोना की दूसरी लहर का असर कम देखने को मिला है ऐसे राज्यों को ज्यादा से ज्यादा लोगों का टीकाकरण करने की जरूरत है। ऐसे राज्यों को कोरोना के प्रतिबंधों में समय से पहले ढील नहीं देनी चाहिए।
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केरल में मामलों की संख्या में वृद्धि के कारणों के बारे में पूछे जाने पर, ICMR के महामारी विज्ञान के प्रमुख ने कहा कि मिजोरम और केरल दोनों में अधिक संख्या में मामले देखे जा रहे हैं। उन्होंने कहा, "केरल में संक्रमित लोग अतिसंवेदनशील लोगों के संपर्क में आ रहे हैं, लेकिन केरल राज्य में हो रहे संक्रमणों को रिकॉर्ड करने के लिए बहुत अच्छा कर रहा है। स्कूल खुलने और बच्चों के टीकाकरण पर टिप्पणी करते हुए, डॉ पांडा ने कहा कि ICMR द्वारा किए गए सीरोसर्वे के अनुसार 6-17 वर्ष के बीच के 50 प्रतिशत से अधिक बच्चे संक्रमण के संपर्क में आ चुके हैं और बच्चों के टीकाकरण के लिए कोई जल्दबाजी नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि हमें बच्चों का टीकाकरण करने को लेकर बहुत सावधान रहना चाहिए। पहले वयस्कों का टीकाकरण होना चाहिए...सभी शिक्षकों का वैक्सिनेशन होना चाहिए और स्कूल में सहायक कर्मचारियों का टीकाकरण होना चाहिए।
डॉ समीरन पांडा आगे कहा कि चौथा राष्ट्रीय सीरो सर्वे स्पष्ट रूप से दिखाता है कि 50% से अधिक बच्चे संक्रमित हैं, वयस्कों की तुलना में थोड़ा कम। इसलिए हमें बेवजह घबराने की जरूरत नहीं है। जिन राज्यों ने अपनी महामारी विज्ञान की जांच की है और अपने वयस्कों को टीका लगाया है, वे धीरे-धीरे स्कूल खोल सकते हैं।












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