19 जवानों के सामने थे 900 पत्थरबाज, जान बचाने के लिए लिया यह फैसला
नौ अप्रैल को कश्मीर के बडगाम में एक पुलिस बूथ पर पत्थरबाजों की भीड़ ने किया था हमला। आईटीबीपी और जम्मू कश्मीर पुलिस के 19 जवानों को 900 युवाओं की भीड़ ने दी थी जान से मारने की धमकी।
श्रीनगर। नौ अप्रैल को कश्मीर में उपचुनाव हुए और इन उपचुनावों में दो वीडियो की वजह से कश्मीर आज सुर्खियों में बना हुआ है। सीआरपीएफ जवानों की पिटाई वाला वीडियो आपने देखा तो इसके बाद ही पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने एक और वीडियो ट्वीट किया। उमर के इस वीडियो में इंडियन आर्मी की जीप पर एक लड़के को बांधा हुआ था और पत्थरबाजों को चेतावनी दी गई थी। वीडियो के बाद हर तरफ सेना की आलोचना हो रही है। लेकिन इसकी वजह कोई नहीं बता रहा है।

जवानों की जान पर आफत
इंग्लिश वेबसाइट फर्स्टपोस्ट पर रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल प्रकाश कटोच ने अपने एक आर्टिकल में इसकी जानकारी दी है। नौ अप्रैल को जब कश्मीर में उपचुनाव के लिए वोट डाले जा रह थे जो बडगाम के पुलिस बूथ पर पत्थरबाजों की एक भीड़ ने हमला कर दिया था। यहां पर उन आईटीबीपी और जम्मू कश्मीर पुलिस के जवानों पर पत्थर फेंके जा रहे थे जो वोटर्स की सुरक्षा में तैनात थे। ड्यूटी पर तैनात आईटीबीपी जवानों को यह इस बात का अहसास हो गया था कि उनके लिए अपनी जान बचा पाना बहुत ही मुश्किल है। भीड़ में जो युवा थे उनकी संख्या करीब 900 थी और वहां पर मौजूद प्रत्यक्षदर्शी की मानें तो भीड़ से जान बचा पाना बहुत ही मुश्किल था। ड्यूटी पर तैनात जवानों ने आर्मी की मदद लेने का फैसला किया। आईटीबीपी की अपील पर 17 लोगों की एक आर्मी क्यूआरटी वैन यानी क्विक रिएक्शन टीम को भेजा गया। थोड़ी देर बाद इस टीम को भी यह बात मालूम पड़ गई थी उस जगह से सुरक्षित निकल पाना बहुत ही कठिन है। क्यूआरटी कमांडर के मुताबिक इन हालातों में फायरिंग करना और तनाव को बढ़ाना और खतरनाक साबित हो सकता था। आर्मी ने 26 वर्ष के फारूक अहमद डार को पकड़ा जो कहा जा रहा है कि पत्थरबाजों की भीड़ में था और जवानों पर पत्थर फेंक रहा था। आर्मी ने उसे जीप पर बांध और फिर 900 लोगों की भीड़ से आईटीबीपी और जम्मू कश्मीर पुलिस के करीब 19 जवानों को सुरक्षित निकाल कर ले गई।
आर्मी पर लगाए कई तरह के आरोप
डार ने आर्मी पर आरोप लगाया है कि उसे आर्मी कैंप में बिना वजह पीटा गया। डार ने यहां तक कहा है कि कुछ महिलाओं को भी पीटा गया है। राज्य की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती की ओर से इस घटना को लेकर शिकायत दर्ज कराई गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस तरह का रवैया घाटी में सामान्य होते हालातों के लिए खतरनाक है। फिलहाल सेना की ओर से भी इस घटना की इनक्वायरी के आदेश दे दिए गए हैं। वहीं प्रकाश कटोच की मानें तो जो फैसला क्यूआरटी टीम कमांडर की ओर से लिया गया उस फैसले ने जिंदगियों का नुकसान होने से बचाया और यह बात सबसे अहम है। केंद्र सरकार ने यह फैसला लेने वाले कमांडिंग ऑफिसर को समर्थन देने का फैसला किया है। सेना की जांच में भी यह बात सामने आ चुकी है कि यह फैसला आखिरी घंटे में लिया गया जब पत्थरबाज लगातार आक्रामक हो रहे थे।












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