बाल कृष्ण की पेंटिंग बनाने वाली मुस्लिम लड़की का सपना हुआ पूरा

जासना सलीम जब अपने पसंदीदा विषय पर बात करती हैं तो बिल्कुल बच्चों की तरह ख़ुश हो जाती हैं. उनके पसंदीदा विषय हैं बाल कृष्ण जिनके हाथ मक्खन के मटके में हैं और चेहरे पर भी मक्खन लगा हुआ है.

The dream of Muslim girl who painted Bal Krishna came true

28 साल की जासना सलीम पिछले छह सालों से लगातार यही पेंटिंग बना रही हैं और अब उन्होंने इस पेटिंग को ख़ुद श्रीकृष्ण के मंदिर को भेंट किया है.

बाल कृष्ण को पेंटिंग ख़ुद भेंट करने का सपना पूरा होने से जासना बेहद ख़ुश हैं.

दो दिन पहले जासना ने केरल के 80 साल पुराने उलानाडु श्री कृष्ण स्वामी मंदिर में बाल कृष्ण की पेंटिंग भेंट की थी. ये मंदिर पत्तनमतिट्टा ज़िले के पन्दलम शहर में स्थित है जहां बाल कृष्ण की पूजा होती है.

मंदिर समिति को पता चला था कि उनकी पेंटिंग गुरुवायूर के प्रसिद्ध कृष्ण मंदिर में दी गई थी. तब समिति ने पेंटिंग अपने मंदिर के लिए भी मंगा ली.

जासना ने पेंटिंग बनाने का कोई पेशेवर प्रशिक्षण नहीं लिया है. उनके पति ने उन्हें भगवान कृष्ण के बारे में बताया और उनकी कहानियां सुनानी शुरू कीं.

कैसे शुरू की पेंटिंग

जासना ने कोझीकोड स्थित अपने घर से बीबीसी को फ़ोन पर बताया, "तगब मुझे कृष्ण की सुंदरता और मोहकता का एहसास हुआ तब मैं उनके जीवन की प्रशंसा करने लगी. एक दिन मैंने उनकी तस्वीर देखी और उसकी ड्रॉइंग बनानी शुरू कर दी. तब मैंने अपने जीवन में पहली बार कोई तस्वीर बनाई थी. मैं उस वक़्त गर्भवती थी और सिर्फ़ कृष्ण के बारे में सोचती और उन्हें ही देखती थी."

लेकिन, जासना ये तस्वीर घर पर नहीं रख सकती थीं. उनके पति का कहना था कि ससुराल के लोग इसे देखकर ग़ुस्सा करेंगे. वह कहती हैं, "मैं एक रूढ़िवादी परिवार से आती हूं. पर मेरे ससुराल वालों को मेरे पेंटिंग और ड्रॉइंग बनाने से कोई दिक्क़त नहीं है."

जासना अपनी बनाई पेंटिंग को नष्ट नहीं करना चाहती थीं. वह कहती हैं, "मैं इसे नष्ट नहीं कर सकती थी क्योंकि ये वही कृष्ण थे जिन्हें मैंने पहली बार बनाया था. इसलिए मैंने उसे अपने एक दोस्त, एक नंबूदरी परिवार को दे दिया था. "

जासना बताती हैं, "वो परिवार ये देखकर हैरान हो गया कि एक मुस्लिम ने भगवान कृष्ण की तस्वीर बनाई है. उन्होंने यह भी कहा कि उनकी इच्छाएं पूरी होंगी."

तब से वो लगातार श्रीकृष्ण की अपनी पसंद की पेटिंग बना रही हैं.

क्यों बनाती हैं बाल कृष्ण की पेंटिंग

जासना के लिए प्रेरणा था श्रीकृष्ण का चेहरा जो उन्हें बेहद मनोरम लगा. उनकी कृष्ण की पहली तस्वीर में उन्होंने हाथ बांध रखे हैं. लेकिन, बाद में उन्होंने श्रीकृष्ण की मक्खन की मटकी में हाथ डाले हुए तस्वीर देखी. तब से उन्होंने पेटिंग बनानी शुरू कर दी.

एक बार उनसे पूछा गया था कि वो श्रीकृष्ण की सिर्फ़ मक्खन और मटकी वाली पेंटिंग ही क्यों बनाती हैं. उन्होंने कहा था, "कृष्ण के मटकी में हाथ देखकर ऐसा लगता है जैसे उन्हें डर है कि कोई इसे लेकर भाग जाएगा. लेकिन, हाथों में मक्खन के साथ कृष्ण की तस्वीर बहुत सुंदर है क्योंकि इसमें एक व्यक्ति है जो अपने पसंदीदा खाने के साथ संतुष्ट है."

जब उन्होंने ड्रॉइंग बनानी शुरू की थी तो उनके मामा ने पहली बार सलाह दी थी कि इसे गुरुवायूर मंदिर में देना चाहिए. गुरुवायूर से आने वाले कई लोगों ने कहा कि उन्होंने उनकी पेंटिंग देखी और वो बहुत सुंदर थी.

पुणे की तत्वामासी संस्था के जेपीके नायर कहते हैं, "इस पेंटिंग का सबसे दिलचस्प हिस्सा ये है कि उन्होंने बाल कृष्ण के नटखट व्यवहार को दिखाया है. अगर आप इस तस्वीर को देखते हैं तो इससे ख़ुशी मिलती है."

तत्वामासी संस्थान इस पेटिंग की प्रायोजक है.

जासना कहती हैं, "मेरा फ़ायदा तो बस इससे मिलने वाली मानसिक संतुष्टि में है."

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