अबू धाबी में हिंदी अब न्यायपालिका की आधिकारिक भाषा, सुषमा स्वराज ने कहा शुक्रिया
नई दिल्ली। अबू धाबी ने अपनी अदालतों में हिंदी को तीसरी भाषा के तौर पर स्वीकार कर लिया है। रविवार को अबू धाबी ने अंग्रेजी और अरबी भाषा के बाद हिंदी को अपने देश की अदालतों की आधिकारिक भाषा स्वीकार कर लिया है। अबू धाबी के इस फैसले की विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने तारीफ की है। उन्होंने कहा कि हम अबू धाबी का शुक्रिया अदा करते हैं कि उन्होंने हिंदी को न्यायिक व्यवस्था की आधिकारिक भाषा के तौर पर स्वीकार किया है। अबू धाबी के इस फैसले से न्याय व्यवस्था और भी सरल और हमारे लोगों के लिए बेहतर होगी।

जानकारी के अनुसार यूएई में भारतीय प्रवासी सबसे बड़ी संख्या में रहते हैं, यहां तकरीबन 30 लाख भारतीय रहते हैं जोकि मुख्य रूप से दुबई में रहते हैं। अबू धाबी के इस ऐतिहासिक फैसले के बाद यहां काम करने वाली लाखों भारतीयों को काफी फायदा पहुंचेगा। यहां काम करने वाले अधिकतर भारतीय हिंदी भाषा बोलते हैं, जिसकी वजह से उन्हें न्यायपालिका में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता था। लेकिन अबू धाबी के इस फैसले के बाद भारतीय प्रवासियों को काफी सहूलियत होगी।
अब यहां भारतीय कामगार आसानी से अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं, वहा न्यायपालिका में अपनी मातृभाषा हिंदी बोल सकते हैं और उन्हें किसी भी तरह की समस्या का सामना नहीं करना पड़ेगा। यही नहीं भारतीय प्रवासी यहां बोनस, मुआवजा, नोटिस पीरियड, वार्षिक छुट्टी, आने जाने के टिकट, पासपोर्ट आदि की सेवा के लिए कोर्ट का दरवाजा आसानी से खटखटा सकते हैं। अब भारतीय प्रवासियों को यहां परेशानी से निजात मिल सकती है।












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