जिस बालवीर ने टाला बड़ा रेल हादसा
नयी दिल्ली(विवेक शुक्ला) अगर एन.वेंकेटश्वर राव ने समझदारी ना दिखाई होती तो हो जाता 16 मार्च, 2005 को बड़ा हादसा। उस दिन के 12.30 बजे के आसपास आंध्र प्रदेश के कृष्णा जिला में वेंकटेश्वर दिन क्रिकेट खेलने के मूड में था। स्कूल में छुट्टी थी।

क्रिकेट खेलने का मूड
वह सुबह ही अपने पड़ोस के दोस्तों के साथ क्रिकेट के मैदान के लिए निकल गया। बच्चों के हाथों में क्रिकेट किया थी। उस क्या मालूम था कि वह मैदान में पहुंचने से पहले एक बड़े रेल हादसे को दाल देगा। बस तब ही उसकी निगाह रेल पटरी के बीच पड़ी खाली जगह पर पड़ी जहां पर करीब 10 इंच का पटरी का टुकड़ा गायब था।
घबराया वेंकट
वेंकट घबरा गया। वह वहीं रूक गया। दोस्तों को दिखाने लगा उस जगह को। उसके साथी उसे वहां से चलने के लिए कह रहे थे। लक्ष्मण नहीं माना। भागने लगा पेड़ना रेलवे स्टेशन की तरफ। पेड़ना स्टेशन करीब एक किलोमीटर दूर था। नन्हा लक्ष्मण भागता हुआ रेलवे स्टेशन पहुंचा। वहां उसने रेल मास्टर को सारी बात बताई। लक्ष्मण की बात पर यकीन करते हुए स्टेशन मास्टर कुछ साथियों के साथ घटनास्थल पर पहुंचे लक्ष्मण को लेकर। बात सच निकली। अगली ट्रेन आने में 20 मिनट शेष थे। उसे रोका गया। पटरी को सही किया गया। बड़ा हादसा टल गया।
2006 का बालवीर पुरस्कार
उसे 2006 के लिए राष्ट्रपति ने बालवीर पुरस्कार दिया।
और उसके बाद- उसने कालेज की शिक्षा पूरी कर ली है। अब प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहा है। घर की माली हालत कोई बहुत ठोस नहीं है। वह नौकरी के साथ पढ़ाई जारी रखना चाहता है। फिलहाल कोई नौकरी नहीं मिल रही। कायदे की नौकरी का इंतजार है। उसे कहीं नहीं महसूस हो रहा है कि बालवीर पुरस्कार से उसे नौकरी मिलने वाली नहीं है।












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