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अंबाला के टेपला ने दी गुरेज के शहीद विक्रमजीत सिंह को श्रद्धांजलि, गांव के 200 युवक इस समय सेना का हिस्‍सा

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    अंबाला। जम्‍मू कश्‍मीर के गुरेज में मंगलवार को आतंकियों से मोर्चा लेते हुए शहीद हुए जवान विक्रमजीत सिंह का गुरुवार को अंतिम संस्‍कार किया गया। विक्रमजीत सिंह सेना में बतौर गनर तैनात थे और उनकी पोस्टिंग गुरेज में थी। गनर विक्रमजीत सिंह के साथ ही इस एनकाउंटर में मेजर रैंक के ऑफिसर और दो और जवान भी शहीद हो गए थे। ये सैनिक उस समय शहीद हुए जब मंगलवार की सुबह घुसपैठ की कोशिशों में लगे आठ आतंकियों के साथ एलओसी पर स्थित गुरेज सेक्‍टर में एनकाउंटर हो रहा था। 36 राष्‍ट्रीय राइफल्‍स की पोस्‍ट के करीब आतंकी घुसपैठ की कोशिशों में थे और उन्‍होंने पोस्‍ट पर फायरिंग भी की थी। गुरेज, नॉर्थ कश्‍मीर के जिले बांदीपोर में आता है। ये भी पढ़ें-बारामूला एनकाउंटर: जम्‍मू कश्‍मीर में सेना और सुरक्षाबलों ने ढेर किए पांच आतंकी

    सिर्फ 26 वर्ष की उम्र में हुए शहीद

    सिर्फ 26 वर्ष की उम्र में हुए शहीद

    गनर विक्रमजीत सिंह अंबाला के टेपला गांव के रहने वाले थे और 36 राष्‍ट्रीय राइफल्‍स के साथ अटैच्‍ड थे। 26 वर्ष के विक्रमजीत 24 मार्च को अपनी छुट्टी पूरी करके ड्यूटी पर वापस लौटे थे। विक्रमजीत सिंह ने करीब पांच वर्ष पहले सेना ज्‍वॉइन की थी। इसी वर्ष 15 जनवरी को उनकी शादी हुई थी और उनकी पत्‍नी हरप्रीत तीन माह की गर्भवती भी हैं। विक्रमजीत के घर में उनकी पत्‍नी के अलावा उनके पिता बलविंदर सिंह, मां कमलेश कौर और भाई मोनू सिंह हैं। उनके भाई मोनू भी सेना में है और इस समय गुवाहाटी में पोस्‍टेड हैं।

    टेलीफोन पर आई शहादत की खबर

    टेलीफोन पर आई शहादत की खबर

    गांव के सरपंच सनमीत कौर कहते हैं कि शहीद विक्रमजीत सिंह के बारे में उन्‍हें जानकारी रेजीमेंट के ऑफिसर्स ने टेलीफोन पर दी थी। उन्‍हें बताया गया था कि उनके बेटे को गोली लगी है और वह देश की सेवा करते हुए शहीद हो गए हैं। उनके पिता बलविंदर सिंह को अपने बेटे की शहादत पर गर्व है और वह कहते हैं कि उनका बेटा देश की सेवा करते हुए शहीद हुआ और यह उनके लिए गर्व की बात है। उन्‍होंने बताया कि विक्रमजीत सिंह बचपन से ही सेना में जाना चाहता थे। उनके दादा सेना में थे और दादा से ही उन्‍होंने हर पल प्रेरणा ली थी।

    सैनिकों की फैक्‍ट्री विक्रमजीत सिंह का गांव

    सैनिकों की फैक्‍ट्री विक्रमजीत सिंह का गांव

    टाइम्‍स ऑफ इंडिया के मुताबिक गांव के सरपंच सनमीत कौर की मानें तो उनका गांव टेपला सैनिकों की फैक्‍ट्री कहा जाता है। इस गांव के करीब 200 युवा इस समय सेना में हैं। इससे पहले कारगिल की जंग में शहीद हुए गुरप्रीत कौर और फिर दो और शहीद हरजिंदर सिंह और विनोद कुमार भी इसी गांव के थे जो एलओसी पर शहीद हुए थे। कारगिल की जंग के बाद विक्रमजीत सिंह इस गांव के चौथे ऐसे युवक हैं जो देश के नाम पर शहीद हुए हैं।

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    English summary
    Tepla village of Ambala pays tribute to its martyr gunner Vikramjeet Singh lost life while fighting against terrorist in Gurez, Jammu Kashmir.

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