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Telangana Election: तेलंगाना में मतदान का प्रतिशत बढ़ना एंटी इनकंबेंसी नहीं, जानिए वजह

तेलंगाना में इस बार पिछले चुनाव की तुलना में मतदान का प्रतिशत कम ही रहा। लेकिन लगातार एक दशक से राज्य की सत्ता में रहे दल बीआरएस को तीसरी बार मौका नहीं मिला। इसकी वजह एंटी इनकंबेंसी बताई जा रही है। लेकिन वोटिंग परसेंटज से तय होने वाली सत्ता विरोधी लहर को लेकर किए जा रहे दावे विश्लेषण के मानकों पर सटीक नहीं बैठते।

दक्षिण भारत के राज्य तेलंगान चुनाव में इस बार बीआरएस हैट्रिक लगाने से चूक गई। लेकिन राज्य में सत्ता विरोधी लहर के दावा साबित नहीं हो पाए। यानी बीआरएस की हार के बावजूद केसीआर सरकार के कार्यों और उनकी पार्टी के प्रति लोगों का जुड़ाव बना रहा। यानी तेलंगाना के नतीजे हैदराबाद और शहरी इलाकों को छोड़कर पूरे राज्य में मतदान प्रतिशत ने नतीजों को प्रभावित नहीं किया। दरअसल, इस बार तेलंगाना में 71.34 प्रतिशत वोट पड़े। जबकि 2018 के 73.74 मतदान हुआ था। यानी इस बार विधानसभा चुनाव में तेलगाना में औसत मतदान पिछली बार की तुलना में 2.4 प्रतिशत रहा।

Telangana Election anti-incumbency

तेलंगाना में सत्ता विरोधी लहर के दावा साबित नहीं हो पाए। यानी बीआरएस की हार के बावजूद केसीआर सरकार के कार्यों और उनकी पार्टी के प्रति लोगों का जुड़ाव बना रहा। यानी तेलंगाना के नतीजे हैदराबाद और शहरी इलाकों को छोड़कर पूरे राज्य में मतदान प्रतिशत ने नतीजों को प्रभावित नहीं किया। दरअसल, इस बार तेलंगाना में 71.34 प्रतिशत वोट पड़े। जबकि 2018 के 73.74 मतदान हुआ था। यानी इस बार विधानसभा चुनाव में तेलगाना में औसत मतदान पिछली बार की तुलना में 2.4 प्रतिशत रहा। ॉ

दरअसल, तेलंगाना ने सभी 119 निर्वाचन क्षेत्रों में से केवल 13 में, 2018 की तुलना में इस बार मतदान में वृद्धि देखी गई। हालांकि ये वोटिंग में मामूली बढ़ोत्तरी थी। जिसमें बढ़त 0.04 प्रतिशत से 1.51 प्रतिशत के बीच रही। जिन क्षेत्रों के मतदान प्रतिशत इस बार बढ़े हैं, उनमें दुब्बाका, महेश्वरम, सेरिलिंगमपल्ली, पारिगी, विकाराबाद (एससी), मेडचल, मल्काजगिरी, कुथबुल्लापुर, नामपल्ली, सिकंदराबाद कैंट (एससी), मुनुगोडे, थुंगाथुरथी (एससी), और जनगांव निर्वाचन क्षेत्र शामिल हैं।

कम मतदान वाले क्षेत्रों में बीआरएस का प्रदर्शन
कम मतदान सत्तारूढ़ दल को अच्छा माना जाता है। हालांकि तेलंगाना में ऐसा नहीं हुआ। 106 निर्वाचन क्षेत्रों में 2018 की तुलना में मतदान कम था उनमें गिरावट 0.2 से 7.45 प्रतिशत के बीच रही। बीआरएस ने कोरातला में अपनी सीट बरकरार रखी। यहां पिछली बार की तुलना में 0.28 प्रतिशत कम मतदान हुआ। जुबली हिल्स में 0.4 प्रतिशत कम मतदान रहा,यहां बीआरएस ने कांग्रेस के एक मजबूत उम्मीदवार मोहम्मद अजहरुद्दीन को हराकर जीत हासिल की।

वहीं पारिगी और विकाराबाद (एससी) के साथ, तंदूर और इब्राहिमपटनम में केवल चार सीटें शामिल हैं जो कांग्रेस ने ग्रेटर हैदराबाद नगर निगम (जीएचएमसी) क्षेत्र में जीतीं। इन्हें ग्रामीण निर्वाचन क्षेत्र माना जाता है जहां कांग्रेस को बीआरएस के खिलाफ गंभीर नाराजगी से फायदा हुआ।

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