कई सफलताओं के बाद भी तेजस के लिए हैं कुछ चुनौतियां भी
बेंगलुरु। तेजस, देश का वह पहला लाइट कॉम्बेट जेट जिसने अपने सामने तीन पीढ़ियों का सफर देखा है। कई सरकारें आईं और चली गईं और तेजस कई अहम घटनाक्रम का साक्षी बना। 1 जुलाई 2016 को आखिर वह घड़ी आ ही गई जब तेजस को इंडियन एयरफोर्स में शामिल कर लिया गया। दो तेजस फाइटर जेट्स 'फ्लाइंग ड्रैगर-45' इस नाम की स्क्वाड्रन के साथ ही इंडियन एयरफोर्स में शामिल हो चुके हैं।

और ज्यादा गतिशील हुआ तेजस
तेजस के शामिल होने के साथ ही आइएएफ के नाम एक और नया रिकॉर्ड दर्ज हो चुका है। अब तक 3100 से ज्यादा फ्लाइंग टेस्ट्स करने वाले तेजस के नाम पर एक भी क्रैश या एक्सीडेंट का रिकॉर्ड नहीं है। यह दुनिया के किसी भी फाइटर जेट के लिए किसी उपलब्धि से कम नहीं है।
डीआरडीओ के पूर्व साइंटिस्ट डॉक्टर वी सिद्धार्थ की मानें तो शुरुआत में तेजस को डिजीटल फ्लाई-बाय-वायर सिस्टम के साथ तैयार करने का ख्याल आया था।
इसके बाद तेजस की डिजाइन में कुछ बदलाव हुए और फिर ऑन बोर्ड डिजिटल फ्लाई-बाय-वायर सिस्टम डेवलप किया गया। इस सिस्टम की वजह से तेजस को और ज्यादा गतिशीलता मिल सकी।
इसके अलावा तेजस के 45 प्रतिशत एयरफ्रेम कई तत्वों से मिलाकर बनाए गए हैं। इसकी वजह से तेजस दुनिया का बेस्ट एयरक्राफ्ट बन सका है।
इसमें प्रयोग धातुओं की वजह से ही यह एयरक्राफ्ट हल्का है और इसके सभी पार्ट्स की सर्विस ज्यादा अच्छी है। साथ ही इसका रख-रखाव भी काफी सहूलियत भरा है।
तेजस की चुनौतियां
- किसी भी एयरक्राफ्ट के लिए उसका इंजन काफी अहम होता है।
- एयरक्राफ्ट की एक तिहाई लागत सिर्फ इंजन पर ही आती है।
- भारत अभी तक विदेशी शक्तियों पर निर्भर है।
- ऐसे में देश के लिए वित्तीय और रणनीतिक मजबूरियां भी बढ़ जाती हैं।
- भारत की यह सबसे बड़ी कमजोरी है कि उसे इंजन के लिए विदेशों पर निर्भर रहना पड़ रहा है।
- किसी भी एयरक्राफ्ट को किसी अप्रमाणित इंजन के साथ डिजाइन करना काफी खतरनाक हो सकता है।
- बीएई की ओर से इसके लिए टॉरनेडो नामक इंजन का निर्माण किया गया था।
- इस इंजन को अभी तक कोई खास सफलता नहीं मिल सकी है।
- एलसीए तेजस भी एक प्रमाणित इंजन के साथ फ्लाइंग करने को डिजाइन किया गया था।
- भारत ने तेजस के लिए कावेरी एरो इंजन का डिजाइन तैयार किया।
- अगर यह डिजाइन सफल हो जाता तो फिर तेजस को और ताकत मिल सकती थी।
- किसी भी एयरक्राफ्ट के लिए इंजन को डिजाइन करने की क्षमता सिर्फ कुछ ही देशों के पास है।
- तेजस के लिए अहम चुनौती है तेजी से और बड़ी संख्या में एयरफोर्स का हिस्सा बनना।
- फिलहाल एचएएल ने प्रति वर्ष आठ तेजस के निर्माण का लक्ष्य रखा है।
- रक्षा मंत्रालय को एक प्रस्ताव भी भेजा गया है ताकि उत्पादन को दोगुना यानी 16 किया जा सके।
- वर्ष 2017 के मध्य तक तेजस को फाइनल ऑपरेशनल क्लीयरेंस यानी एफओसी मिलने की उम्मीद है।
- ऐसे में रक्षा मंत्रालय और एचएएल के लिए उत्पादन से जुड़ मुद्दे को हल करना काफी अहम है।












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