लड़के-लड़की का साथ पढ़ना धर्म के खिलाफ है

नई दिल्ली। शिक्षा एक ऐसा धन है जिसे जैसे भी मिले, कहीं भी मिले उसे गृहण करना चाहिए। लेकिन हमारे देश की विडंबना कहे या दुर्भाग्य जहां आज भी लड़का और लड़की के साथ पढ़ने को धर्म के खिलाफ माना जाता है। ऐसी सोच न सिर्फ देश को आगे जाने से रोकती है बल्कि दुनिया से कहीं पीछे ले जाती है। बिहार के मदरसे में लड़कियों के मदरसे पर प्रवेश की रोक भारत के गांवों की हकीकत को बयान करती है।

MADARSA

हार के बिहारशरीफ स्थित अजीजिया मदरसे में लड़कियों के प्रवेश पर सिर्फ इसलिये रोक लगा दी गयी है कि यहां पर महिला शिक्षक नहीं है। मदरसे के सचिव एसएम शरफ ने एक फरमान जारी करके कहा है कि जबतक महिला शिक्षक की नियुक्ति नहीं हो जाती मदरसे में लड़कियों के प्रवेश करना मना है। शरफ साहब ने यह फरमान भी जारी किया कि मदरसे में लड़के और लड़कियों का साथ पढ़ना धर्म के खिलाफ है।

आपको बता दें कि इस मदरसे को सरकार की तरफ से मदद भी मुहैया करायी जाती है। मदरसे के सचिव का कहना है कि मजहब की शिक्षा मदरसे में दी जाती है, और मदरसे में लड़के लड़कियों के साथ पढ़ने का हराम बताया है। उन्होंने कहा कि मदरसे में पहले के मुतवल्ली अवैध तरीके से लड़के और लड़कियों को साथ पढ़ाते थे लेकिन अब यह व्यवस्था स्वीकार नहीं की जायेगी।

इस मदरसे का संचालन सोगरा वक्फ स्टेट कमेटी करती है जिसके अध्यक्ष डीएम होते हैं। मौजूदा डीएम का कहना है कि उन्हें इस तरह के किसी फरमान की जानकारी नहीं है मामले की जानकारी लेकर इसकी जांच करायी जायेगी। उधर इस तालिबानी फरमान के बाद मदरसे के बाहर लड़कियों ने इसका विरोध करना शुरु कर दिया।

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