तमिलनाडु: कोयम्बटूर दक्षिण में फंस गए हैं कमल हासन ? BJP की सेल्फ मेड स्टार वनाति से कांटे की जंग

चेन्नई। तमिलनाडु राज्य में विधानसभा चुनाव के लिए 6 अप्रैल को एक ही चरण में सभी सीटों पर मतदान होना है। राज्य की जिन कुछ हाईप्रोफाइल सीटों पर मुकाबला चर्चा में है उनमें से ही एक सीट कोयम्बटूर दक्षिण है। दक्षिण भारत का मैनचेस्टर कहे जाने वाले इस क्षेत्र से सुपरस्टार से राजनेता बने मक्कल निधि मय्यम (एमएनएम) के प्रमुख कमल हासन मैदान में है। लेकिन राजनीति के मैदान में पहली बार किस्मत आजमाने उतरे कमल हासन की राह यहां आसान नहीं है क्योंकि उनके मुकाबले बीजेपी ने तमिलनाडु की अपनी स्टार नेता वनाति श्रीनिवासन को मैदान में उतारा है।

तमिलनाडु में बीजेपी का चर्चित चेहरा

तमिलनाडु में बीजेपी का चर्चित चेहरा

एक तरफ कमल हासन को जहां अपने स्टारडम के सहारे राजनीति की पिच पर अच्छे स्कोर का भरोसा है तो वहीं वनाति श्रीनिवासन अपने काम के जरिए यहां जीत की उम्मीद कर रही हैं।

वनाति श्रीनिवासन को भले ही उत्तर भारत में कम लोग जानते हैं लेकिन दक्षिण भारत खासतौर पर तमिलनाडु में पार्टी का चर्चित चेहरा हैं। अगर उनके बारे में ये कहा जाये कि वह तमिलनाडु में एक कम मशहूर पार्टी का मशहूर चेहरा हैं तो गलत नहीं होगा।

बीजेपी की राष्ट्रीय महिला मोर्चा की अध्यक्ष श्रीनिवासन कोयम्बटूर दक्षिण में लंबे समय से काम कर रही हैं। सुपर स्टार कमल हासन के इस सीट से उतरने के बाद अब यहां मुकाबला कड़ा हो गया है लेकिन उसके पहले कोयम्बटूर दक्षिण सीट ऐसी सीट थी जहां से बीजेपी उम्मीदवार की जीत तय मानी जा रही थी।

क्या है इस सीट का सियासी गणित ?

क्या है इस सीट का सियासी गणित ?

कोयम्बटूर दक्षिण सीट पर चुनावी समीकरण में ले चलने से पहले एक नजर इस सीट पर डाल लेते हैं। बड़ी संख्या में मिडल क्लास और अपर मिडल क्लास आबादी वाली इस विधानसभा सीट में 12 प्रतिशत सवर्ण वोटर हैं जो उत्तर भारतीय मूल के हैं। इन्हें बीजेपी का सपोर्टर समझा जाता है। इस सीट पर 10 प्रतिशत से अधिक अल्पसंख्यक मतदाता हैं।

तमिलनाडु बीजेपी के अध्यक्ष नाम्बी नारायण को वनाति श्रीनिवासन की जीत का भरोसा है। वजह है इस शहर में आरएसएस की गहरी पैठ। आरएसएस का कहना है कि इस शहर में उसके 20,000 से अधिक कार्यकर्ता हैं। ये सभी बीजेपी प्रत्याशी के लिए घर-घर सम्पर्क अभियान चला रहे हैं।

इस सीट से जहां वनाति श्रीनिवासन बीजेपी के टिकट पर हैं तो कमल हासन एमएनएम के टिकट पर हैं। तीसरे प्रमुख कैंडीडेट हैं कांग्रेस के टिकट पर मयूर जयकुमार जो पिछली बार इसी सीट पर दूसरे नंबर पर रहे थे।

क्या है बीजेपी की ताकत ?

क्या है बीजेपी की ताकत ?

लेकिन क्या सिर्फ आरएसएस के कार्यकर्ताओं और उत्तर भारतीय मतदाताओं के जरिए ही बीजेपी जीत की उम्मीद कर रही है तो इसका जवाब है- नहीं। इस बार पार्टी के यहां से उम्मीद करने की वजह दूसरी भी है। इसके लिए इस सीट के चुनावी इतिहास पर नजर डालनी होगी।

कोयम्बटूर में बीजेपी का मजबूत आधार रहा है। कोयम्बटूर लोकसभा सीट से सीपी राधाकृष्णन 1998 और 99 में दो बार बीजेपी के टिकट पर सांसद रह चुके हैं। यही नहीं 2014 और 2019 के लोकसभा चुनाव में वह लगातार दूसरे नंबर पर रहे हैं।

विधानसभा का चुनावी इतिहास

विधानसभा का चुनावी इतिहास

अब बात करते हैं विधानसभा सीट के समीकरण की। 2008 में गठित इस सीट पर अब तक दो बार चुनाव हो चुके हैं और यह सीट अब तक एआईएडीएमके के कब्जे में रही है। लेकिन इस बार एआईएडीएमके से सीट शेयरिंग के तहत ये सीट बीजेपी के हिस्से में आई है।

बीजेपी के पास इस बार एआईएडीएमके का मजबूत सहारा तो है ही वनाति श्रीनिवासन की पिछले चुनाव के बाद से लगातार चली आ रही मेहनत का भी परिणाम मिलने की उम्मीद है। 2011 में इस सीट पर हुए चुनाव में बीजेपी उम्मीदवार को सिर्फ 5 हजार वोट मिले थे लेकिन 2016 में बीजेपी ने यहां से वनाति श्रीनिवासन को मैदान में उतारा था। श्रीनिवासन ने जोरदार चुनाव लड़ा और तीसरे नंबर पर रहीं। उन्हें 21 प्रतिशत से अधिक वोट मिले।

2016 के चुनाव में इस सीट पर एआईएडीएमके के उम्मीदवार अर्जुनन ने 59,788 वोट पाकर जीत हासिल की थी। कांग्रेस के उम्मीवादर मयूर जयकुमार को 42369 वोट मिले थे और वह दूसरे नंबर पर थे। वहीं 33,113 वोट पाकर श्रीनिवासन तीसरे स्थान पर रहीं थीं। इस बार बीजेपी को जहां पीएम मोदी के करिश्मे से तो उम्मीद है ही, दूसरी तरफ एआईडीएमके के साथ गठबंधन से जीत को लेकर पूरा भरोसा है।

हासन से मुकाबला कितना कठिन ?

हासन से मुकाबला कितना कठिन ?

वनाति इस विधानसभा में लंबे समय से काम कर रही हैं लेकिन कमल हासन के आ जाने से उनके लिए मुकाबला कठिन हो गया है। कमल हासन के बारे में पहले संभावना जताई गई थी कि वह चेन्नई की अलंदुर सीट से लड़ेंगे लेकिन उन्होंने कोयम्बटूर दक्षिण को चुना। इसके पीछे भी वजह है।

2019 के लोकसभा चुनाव में कोयम्बटूर लोकसभा से कमल हासन की पार्टी एमएनएम के उम्मीदवार आर महेंद्रन ने काफी अच्छा प्रदर्शन किया था और 1 लाख 45 हजार वोट पाकर वह तीसरे स्थान पर रहे थे।

एमएनएम फैक्टर पर बीजेपी का कहना है कि वह स्थानीय थे और क्षेत्र के चेट्टियार समुदाय से संबंध रखते थे। इस वजह से उन्हें वोट मिले थे। हालांकि अगर लोकसभा के वोटों की बात करें तो बीजेपी उम्मीदवार सीपी रामाकृष्णन को 3.92 लाख वोट मिले थे।

बीजेपी उम्मीदवार श्रीनिवासन के साथ एक मुश्किल यह भी है कि उन्हें बीजेपी के स्थानीय नेताओं का सहयोग नहीं मिल रहा है। इस पर खुद श्रीनिवासन कहती हैं कि महिला नेताओं को हर जगह समस्या का सामना करना पड़ता है। लेकिन मेरा ध्यान जनता की सेवा पर है।

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