दलित पंचायत अध्यक्ष को स्कूल में तिरंगा फहराने से रोका गया, पुलिस तक पहुंचा मामला
चेन्नई, अगस्त 10। तमिलनाडु के कल्लाकुरिची के एडुथवैनाथम गांव से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां की एक महिला पंचायत अध्यक्ष सुधा वी ने आरोप लगाया है कि उन्हें स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस के मौके पर एक स्थानीय सरकारी स्कूल में तिरंगा फहराने से रोका जा रहा है। सुधा वी ने 3 अगस्त को डिप्टी एसपी को लिखे एक पत्र में कहा है कि उन्हें स्थानीय सरकारी स्कूल में राष्ट्रीय ध्वज फहराने से रोका जा रहा है क्योंकि वह दलित हैं।

क्या है महिला पंचायत अध्यक्ष ने?
सुधा वी ने खत में कहा है कि उनसे पहले दस पंचायत अध्यक्षों ने स्कूल में स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस पर झंडा फहराया था, लेकिन उन्हें अभिभावक शिक्षक संघ (पीटीए) द्वारा झंडा फहराने से रोका गया। पीटीए की ओर से कहा गया कि तुम दलित जाति की महिला हो, इसलिए ध्वाजारोहण नहीं करोगी। सुधा वी ने कहा है कि उन्हें स्कूल के पीटीए अध्यक्ष अरुलकुमार और उपाध्यक्ष कन्नन ने पिछले गणतंत्र दिवस पर झंडा फहराने की अनुमति नहीं दी थी। सुधा वी ने कहा है कि उन्हें 75वें स्वतंत्रता दिवस पर स्कूल में सुरक्षा के बीच झंडा फहराने का अवसर दिया जाए।
इस मामले में सुधा वी के पति वरथाजी का कहना है कि उनकी पत्नी गांव की ग्यारहवीं पंचायत अध्यक्ष हैं, उनसे पहले के सभी दस पंचायत अध्यक्ष गांव के ही एक सरकारी स्कूल में झंडा फहरा चुके हैं, लेकिन उनकी पत्नी को ही ऐसा करने से रोका जा रहा है। बीते गणतंत्र दिवस से एक रात पहले पीटीए अध्यक्ष अरुलकुमार और उपाध्यक्ष कन्नन ने हमें सूचित किया था कि उनकी पत्नी स्कूल में झंडा नहीं फहराएंगी। हालांकि जब हमने इसका कारण पूछा तो हमें कारण नहीं बताया गया, लेकिन हम जानते हैं कि हमारी जाति की वजह से हमारे साथ ऐसा हुआ है।
वरथराजी ने आरोप लगाया कि एडुथवैनाथम में दलित समुदाय के ऐसे सदस्य हैं जिन्हें अभी भी मंदिरों के अंदर जाने की अनुमति नहीं है। ऐसे में लोगों को इस बात का डर है कि अगर एक दलित महिला पंचायत अध्यक्ष स्कूल में राष्ट्रीय ध्वज फहरा देगी तो दलितों के मंदिर में प्रवेश की मांग तेजी हो जाएगी। सुधा के पति ने कहा है कि सरकारी स्कूल के प्रधानाध्यापक मणि ने उनसे और पीटीए नेताओं से इस मामले को स्कूल के बाहर सुलझाने को कहा है।












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