सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, नहीं बदलेगा केस आवंटन सिस्टम, चीफ जस्टिस ही 'मास्टर ऑफ रोस्टर'

नई दिल्ली: चीफ जस्टिस के मास्टर ऑफ रोस्टर के अधिकार के मुताबिक केसों के बंटवारे को चुनौती देने वाली शांति भूषण की याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस अर्जन कुमार सीकरी और जस्टिस अशोक भूषण की पीठ इस मामले में फैसला सुनाते हुए कहा कि सीजेआई को ही रोस्‍टर बनाने और जजों में केस का बंटवारा करने का अधिकार है।

Supreme Court Verdict Plea Roster Practice Case Allocation

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इसमें कोई विवाद नहीं है और CJI ही मास्टर ऑफ रोस्टर है। केसों के आवंटन में CJI का मतलब चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया होता है, न कि कोलेजियम। पहले भी फैसलों में सभी द्वारा माना गया है कि CJI बराबर में सबसे पहले हैं। तकनीक के वक्त में कोई भी आउटकम आलोचना में बदल सकता है। दुनिया तेजी से बदल रही है लेकिन फंडामैंटल नहीं बदलेंगे।

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इसके पहले वरिष्ठ वकील शांति भूषण ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर चीफ जस्टिस के रोस्टर सिस्टम के एकाधिकार को चुनौती दी थी। शांति भूषण ने कहा था कि बेंच निर्धारण (रोस्टर सिस्टम) करना सीजेआई का एकाधिकार नहीं है। याचिका में मांग की गई थी कि रोस्टर सिस्टम में पांच सबसे सीनियर जजों को शामिल किया जाना चाहिए।

याचिका दायर कर शांति भूषण ने कहा था कि सीजेआई के पास ऐसी अनियंत्रित शक्तियां नहीं हो सकती हैं, जिन्हें वो जजों को केस आवंटित करते वक्त मनमाने तरीके से इस्तेमाल करें। साथी ही याचिका में कहा गया था कि ऐसे मामलों में उन्हें सीनियर जजों से मशविरा लेना चाहिए।

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