कोविन पर टीकाकरण के स्लॉट को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को लिया आड़े हाथ, पूछे तीखे सवाल
नई दिल्ली, 03 जून। कोरोना वैक्सीन लगवाने के लिए केंद्र सरकार की ओर से कोविन पोर्टल की शुरुआत की गई है, जहां लोग टीकाकरण के लिए अपना रजिस्ट्रेशन करा सकते हैं। रजिस्ट्रेशन कराने के बाद अपनी सुविधा के अनुसार स्लॉट का चयन कर सकते हैं। लेकिन जिस तरह से इस पोर्टल पर लोगों को स्लॉट बुक कराने में दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है उसपर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को आड़े हाथ लिया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जो लोग डिजिटल समझ रखते हैं उन्हें भी कोविन पर वैक्सीन का स्लॉट लेने में दिक्कत हो रही है।

दरअसल सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार की ओर से कहा गया था कि जो गरीब और पिछड़े तबके के लोग हैं वो अपने दोस्तों की मदद से टीकाकरण के लिए ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन करा सकते हैं। सरकार के इस जवाब पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जिन लोगों को डिजिटिल जानकारी है वो तक स्लॉट नहीं हासिल कर पा रहे हैं और उन्हें काफी मुश्किल हो रही है। कोर्ट ने कहा कि वैक्सीनेशन की नीति पूरी तरह से डिजिटल पोर्टल पर निर्भर है, वो भी ऐसे देश में जहां 18-44 साल के लोगों की संख्या काफी ज्यादा है और डिजिटल डिवाइड सबसे ज्यादा है। डिजिटल टीकाकरण अभियान की वजह से पिछड़े तबके के लोगों को सबसे ज्यादा दिक्कत होगी। इसका समानता के मौलिक अधिकार पर सीधा असर पड़ेगा।
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सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा कि हमारी जानकारी में यह लाया गया है कि कोविन प्लेटफॉर्म उन लोगों की पहुंच से भी बाहर है जो देख नहीं सकते हैं, इस वेबसाइट में लोगों तक नहीं पहुंच पाने की खामी है। पोर्टल पर ऑडियो कैप्चा नहीं होना, सात फिल्टर,वैक्सीन का नाम, वैक्सीन फ्री है या नहीं, कीबोर्ड सपोर्ट आदि उपलब्ध नहीं है। दिव्यांगों को पर्पाप्त समय दिए जाना चाहिए जिससे कि वह अपना शेड्यूल पा सके, ऐसा नहीं हो कि पोर्टल अपने आप लॉग आउट हो जाए। साथ ही कोर्ट ने पूछा क्या केंद्र सरकार दिव्यांग ऑडिट करने पर विचार कर रहा है। क्या कोविन और आरोग्य सेतु जैसे ऐप दिव्यांग लोगों तक पहुंच पा रहे हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने नेशनल स्टैटिस्टिक्स ऑफिस सर्वे 2018 की रिपोर्ट का हवाला दिया, जिसमे कहा गया है कि ग्रामीण इलाकों में सिर्फ 4 फीसदी और शहरी क्षेत्र में सिर्फ 23 फीसदी लोगों के पास कंप्यूटर है। ट्राई की रिपोर्ट दर्शाती है कि ग्रामीण क्षेत्रों में वायरलेस टेली सेवा 57.13 फीसदी है जोकि शहरी क्षेत्रों में 155.49 फीसदी है। यह दर्शाता है को शहरी और ग्रामीण क्षेत्र में टेलीकॉम सेवा के बीच कितना बड़ा अंतर है। ऐसे में टीकाकरण अभियान पूरी तरह से डिजिटल माध्य पर कैसे निर्भर हो सकता है।












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