'ED ने अपनी सारी हदें पार कर दीं', सुप्रीम कोर्ट ने क्यों कहा ऐसा? तमिलनाडु शराब दुकान लाइसेंस का है मामला
Supreme Court On TASMAC in liquor shop licences row: सुप्रीम कोर्ट ने 22 मई गुरुवार को कहा कि प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने अपनी सारी हदें पार कर दी हैं। ईडी देश के संघीय ढांचे का उल्लंघन कर रही है। सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु स्टेट मार्केटिंग कार्पोरेशन (TASMAC) और तमिलनाडु सरकार की याचिका पर सुनवाई के दौरान ईडी पर ये सख्त टिप्पणी की है। मामले पर सुनवाई जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस एजी मसीह कर रहे थे।
सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु सरकार द्वारा संचालित शराब विपणन निगम (TASMAC) के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ED) की मनी लॉन्ड्रिंग जांच पर रोक लगा दी है। TASMAC पर मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप लगे थे। जिसमें कहा गया था कि TASMAC ने शराब दुकान के लाइसेंस बांटने में भ्रष्टाचार किया है। अब इस मामले की जांच पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी है। कोर्ट ने एजेंसी को जांच और छापेमारी रोकने का भी निर्देश दिया है।

मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई और जस्टिस एजी मसीह की पीठ ने कहा कि एक राज्य सरकार की एजेंसी पर ऐसे छापे संघीय ढांचे के सिद्धांत के खिलाफ है।
तमिलनाडु सरकार-TASMAC ने मद्रास हाई कोर्ट को दी थी चुनौती?
तमिलनाडु सरकार और TASMAC ने मद्रास हाई कोर्ट के 23 अप्रैल के उस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी, जिसमें ED की छापेमारी को सही ठहराया गया था। याचिका में कहा गया कि मार्च 2025 में ED द्वारा 60 घंटे लंबी तलाशी और जब्ती की कार्रवाई असंवैधानिक है क्योंकि TASMAC न तो किसी प्राथमिकी में आरोपी है और न ही PMLA के तहत कोई आधार मौजूद है।
कोर्ट में पक्ष-विपक्ष ने क्या तर्क दिए?
वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल और अमित आनंद तिवारी ने दलील दी कि राज्य सरकार खुद इस मामले में जांच कर रही है और 2014 से अब तक 41 एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं। इन मामलों में TASMAC शिकायतकर्ता है, न कि आरोपी। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि जब अंतिम प्राथमिकी 2021 में दर्ज हुई थी, तो ED ने अब जाकर कार्रवाई क्यों की?
सॉलिसिटर जनरल एस.वी. राजू ने ED का पक्ष रखते हुए कहा कि मामला 1,000 करोड़ रुपये के भ्रष्टाचार से जुड़ा है, इसलिए एजेंसी की कार्रवाई उचित है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ED का रवैया "रोविंग और फिशिंग एन्क्वायरी" जैसा है, जिसमें जांच का कोई ठोस आधार नहीं है।












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