मजदूर रेल की पटरी पर सोएं तो कोई क्या कर सकता है? औरंगाबाद हादसे पर सुप्रीम कोर्ट
नई दिल्ली। महाराष्ट्र के औरंगाबाद में रेल पटरी पर 16 प्रवासी मजदूरों की मौत के मामले से जुड़ी एक याचिका पर टिप्पणी करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि कोई पटरी पर सोएगा तो कोई क्या किया जा सकता है, या किसी को पैदल चलने से कोई कैसे रोक सकता है। जस्टिस एल नागेश्वर राव और जस्टिस संजय कौल की अदालत ने इस मामले में दायर जनहित याचिका को खारिज करते हुए केंद्र को मजदूरों के लिए फ्री ट्रांसपोर्ट और शेल्टर का इंतजाम करने का आदेश देने से भी इनकार कर दिया।
Recommended Video

सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में बीते हफ्ते औरंगाबाद में रेल पटरी पर कटकर मर गए 16 मजदूरों की मौत का मामला उठाया गया था और मजदूरों के परिवहन और शेल्टर की मांग की गई थी। इसे अदालत ने खारिज कर दिया। याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जब वो रेल की पटरियों पर सो जाएं, तो कोई इसे कैसे रोक सकता है?
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि राज्य सरकारें ट्रांसपोर्ट की व्यवस्था कर रही हैं लेकिन लोग पैदल ही निकल रहे हैं तो ऐसे में क्या किया जा सकता है। सरकारें केवल उनसे पैदल नहीं चलने के लिए रिक्वेस्ट ही कर सकती हैं। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अदालत के लिए ये असंभव है कि वह इस बात की निगरानी करे कि कौन चल रहा है और कौन नहीं। क्या हम सरकार के निर्देशों का पालन कराने के लिए जाएं।
केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत में कहा कि सरकार प्रवासी मजदूरों का पहले से मदद कर रही है। मजदूर अपनी बारी का इंतजार भी नहीं कर रहे हैं और पैदल अपने घर को चलने लगते हैं। सभी जाना चाहते हैं। उन्हें पैदल जाने के बजाय अपनी बारी का इंतजार करना चाहिए। सभी राज्य ट्रांसपोर्ट का इंतजाम कर रहे हैं। ऐसे में लोगों को इंतजार करना चाहिए लेकिन वो अपनी बारी का इंतजार नहीं करना चाहते।












Click it and Unblock the Notifications