'Aadhaar नहीं है नागरिकता का सबूत, ECI के रुख सही', बिहार SIR विवाद में SC के फैसले से नया मोड़

Supreme Court on Aadhaar, Bihar Voter List Case: सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार (12 अगस्त) को चुनाव आयोग (ECI) के रुख को सही ठहराते हुए साफ कर दिया कि आधार कार्ड को नागरिकता का पक्का सबूत नहीं माना जा सकता। इस फैसले ने बिहार में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया पर उठे सवालों को नया मोड़ दे दिया है।

न्यायमूर्ति सूर्यकांत की अगुवाई वाली पीठ ने कहा कि आधार की सत्यता की जांच जरूरी है, और अब यह तय होगा कि क्या ECI को ऐसी जांच का अधिकार है। यह फैसला राहुल गांधी और कांग्रेस के उन आरोपों पर भी करारा जवाब है, जो ECI पर BJP के साथ मिलकर 'वोट चोरी' का इल्जाम लगा रहे हैं। आइए, सियासी और कानूनी ड्रामे को समझें...

Aadhaar citizenship proof

सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?

12 अगस्त 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने बिहार में SIR को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई की। न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल से कहा, 'ECI का यह कहना बिल्कुल सही है कि आधार को नागरिकता का पक्का सबूत नहीं माना जा सकता। इसे अलग से सत्यापित करना होगा।' कोर्ट ने यह भी पूछा कि क्या ECI को मतदाता सूची की जांच का अधिकार है? पीठ ने साफ किया, 'अगर ECI को यह अधिकार नहीं है, तो सारा मामला खत्म। लेकिन अगर अधिकार है, तो कोई दिक्कत नहीं होनी चाहिए।'

कपिल सिब्बल का दावा: 65 लाख मतदाता हटाए गए

कपिल सिब्बल ने कोर्ट में दावा किया कि ECI की SIR प्रक्रिया से बिहार में लाखों मतदाता बाहर हो जाएंगे। सिब्बल ने कहा कि 7.24 करोड़ लोगों ने फॉर्म भरे, लेकिन 65 लाख मतदाताओं के नाम बिना ठोस जांच के हटा दिए गए। उन्होंने ECI पर सवाल उठाया कि कोई सर्वे या मृत्यु/पलायन का सत्यापन नहीं हुआ। सिब्बल ने दावा किया कि 2003 की मतदाता सूची में शामिल लोग भी नए फॉर्म न भरने पर हटा दिए गए, भले ही उनका निवास न बदला हो।

प्रशांत भूषण का आरोप: ECI की पारदर्शिता पर सवाल

याचिकाकर्ताओं की ओर से प्रशांत भूषण ने ECI पर पारदर्शिता की कमी का आरोप लगाया। भूषण ने कहा कि ECI ने हटाए गए 65 लाख मतदाताओं की सूची न तो कोर्ट में दी, न ही अपनी वेबसाइट पर डाली। उन्होंने दावा किया, 'ECI का कहना है कि बूथ-स्तरीय एजेंटों को जानकारी दी गई, लेकिन वे इसे सार्वजनिक करने के लिए बाध्य नहीं हैं।' भूषण ने सवाल उठाया कि अगर मृत्यु या पलायन के आधार पर नाम हटाए गए, तो इसका कोई ठोस रिकॉर्ड क्यों नहीं?

कोर्ट की फटकार: आंकड़े अनुमान या हकीकत?

सुप्रीम कोर्ट ने सिब्बल और भूषण के दावों पर सवाल उठाए। न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने पूछा, '65 लाख का आंकड़ा कहां से आया? यह अनुमान है या सत्यापित तथ्य?' कोर्ट ने कहा, 'हमें यह समझना है कि आपकी आशंका काल्पनिक है या वास्तविक।' पीठ ने यह भी साफ किया कि जिन लोगों ने आधार और राशन कार्ड के साथ फॉर्म भरे, उनकी जानकारी की जांच जरूरी है। कोर्ट ने ECI से पूछा कि क्या हटाए गए मतदाताओं को सूचना दी गई थी। कोर्ट ने ECI से इस प्रक्रिया की पारदर्शिता पर जवाब मांगा।

ECI का जवाब: हम निष्पक्ष और पारदर्शी

ECI ने कोर्ट में कहा कि SIR प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी है। मृत, स्थानांतरित, या डुप्लिकेट मतदाताओं को हटाने के लिए बूथ-स्तरीय जांच की गई। ECI ने दावा किया कि 7.9 करोड़ मतदाताओं में से 4.9 करोड़ 2003 की सूची से हैं, और 22 लाख मृत मतदाताओं की पहचान की गई। ECI ने कहा, 'हमने किसी को गलत तरीके से नहीं हटाया। हर कदम नियमों के तहत है।'

कांग्रेस का सियासी हमला और कोर्ट का जवाब

कांग्रेस नेता राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे ने ECI पर BJP के साथ मिलकर 'वोट चोरी' का आरोप लगाया था। राहुल ने 1 लाख फर्जी वोट और 11,965 डुप्लिकेट प्रविष्टियों का दावा किया था। लेकिन सुप्रीम कोर्ट का फैसला ECI के पक्ष में है। ECI ने कहा कि हमारा काम निष्पक्ष और पारदर्शी है। आधार को नागरिकता का सबूत मानना गलत है।'

ये भी पढ़ें- 'वोट चोरी' के खिलाफ राहुल गांधी ने शुरू किया डिजिटल कैंपेन, ECI से जवाबदेही की मांग में जनता का साथ मांगा

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