'तानाशाह होता तो पहली कक्षा से कंपल्सरी कर देता गीता'

दवे ने 'वैश्वीकरण के दौर में समसामायिक मुद्दे तथा मानवाधिकारों की चुनौतियों' विषय पर एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा, 'अगर गुरु शिष्य जैसी हमारी प्राचीन परंपराएं रही होती तो हमारे देश में हिंसा एवं आतंकवाद नहीं होता।'
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वे यहीं नहीं रुके, बाले 'हम अपने देश में आतंकवाद देख रहे हैं। अगर लोकतांत्रिक देश में सभी अच्छे लोग होंगे तो वे स्वाभाविक रूप से ऐसे व्यक्ति को चुनेंगे जो अच्छे होंगे। विवाद यहां से शुरु हुआ जब वे बोले कि 'मैं भारत का तानाशाह रहा होता, तो मैंने पहली ही कक्षा से गीता और महाभारत को शुरू करवा दिया होता'।
न्यायाधीश ने यह सुझाव भी दिया कि भगवद्गीता और महाभारत को पहली कक्षा से ही छात्रों को पढ़ाना शुरू करना चाहिए। उन्होंने सीख दी कि इसी तरह से आप जीवन जीने का तरीका सीख सकते हैं। उन्होंने स्वयं के लिए कहा कि मुझे खेद है कि अगर मुझे कोई कहे कि मैं धर्मनिरपेक्ष हूं या धर्मनिरपेक्ष नहीं हूं। फिलहाल उनके बयान वर विवाद जारी है।












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