आंदोलन के कारण नोएडा से दिल्ली बंद रास्तों पर सुप्रीम कोर्ट ने 43 किसान संगठनों को भेजा नोटिस, मांगा जवाब
नई दिल्ली, अक्टूबर 04। कृषि कानूनों के विरोध में पिछले 10 महीने से हो रहे किसान आंदोलन की वजह से दिल्ली और नोएडा के बीच बंद पड़ी सीमाओं को लेकर सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका दाखिल की गई। यह याचिका नोएडा के एक निवासी के द्वारा लगाई गई थी। सोमवार को इस याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कृषि कानूनों का विरोध कर रहे 43 किसान संगठनों को नोटिस जारी किया है। सुप्रीम कोर्ट ने इन किसान संगठनों से रास्ते बंद करने का कारण पूछा है। अब इस मामले में अगली सुनवाई दशहरे के बाद 20 अक्टूबर को होगी।

10 महीने से नोएडा से दिल्ली और हरियाणा से दिल्ली के रास्ते हैं बंद
आपको बता दें कि पिछले साल नवंबर से जारी किसान आंदोलन की वजह से नोएडा से दिल्ली और हरियाणा से दिल्ली की तरफ आने वाली कई सड़कें ब्लॉक हैं। इसकी वजह से आम जनता को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। सिर्फ आम जनता को नहीं बल्कि व्यवसायिक गतिविधियों में भी लोगों को काफी नुकसान हुआ है। इन्हीं दिक्कतों को देखते हुए नोएडा निवासी मोनिका अग्रवाल ने किसान आंदोलन के चलते बाधित दिल्ली की सड़कों को खोलने की मांग वाली जनहित याचिका कोर्ट में दाखिल की, जिसपर कोर्ट ने सोमवार को सुनवाई की।
हरियाणा सरकार ने इसी मांग को लेकर लगाई थी अर्जी
आपको बता दें कि जस्टिस एएम खानविलकर और सीटी रविकुमार की अध्यक्षता वाली बेंच ने दिल्ली और नोएडा के बीच रास्ते बंद होने पर चिंता जताई है। न्यायमूर्ति ए एम खानविलकर ने कहा, "तीन कृषि कानून लागू नहीं हैं और केंद्र ने उन्हें लागू नहीं करने का वचन दिया है ... तो किसान विरोध क्यों कर रहे हैं, किसके खिलाफ?" इसी मसले को लेकर हरियाणा सरकार ने भी एक अंतरिम अर्जी दाखिल कर 43 किसान संगठनों को पक्षकार बनाने की मांग की थी। हरियाणा सरकार ने भी आंदोलन के दौरान रास्तों को ब्लॉक करने पर चिंता जताई है।












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