'टॉपर-बॉटम बैच' का खेल खत्म! छात्रों की मेंटल हेल्थ को लेकर सुप्रीम कोर्ट सख्त, 15 गाइडलाइंस जारी

Supreme Court student suicide order: देश में लगातार बढ़ती छात्र आत्महत्याओं को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा कदम उठाया है। कोर्ट (Supreme Court) ने इसे "व्यवस्था की बड़ी नाकामी" बताया है और शुक्रवार को एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए सभी स्कूलों, कॉलेजों, विश्विद्यालयों, कोचिंग संस्थानों, ट्रेनिंग सेंटरों और हॉस्टलों के लिए खास दिशा-निर्देश जारी किए हैं।

न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और संदीप मेहता की पीठ ने कहा कि अब हर शिक्षण संस्था को मानसिक स्वास्थ्य की सुरक्षा और छात्रों की भावनात्मक देखभाल के नियमों का सख्ती से पालन करना होगा। यह फैसला संविधान के अनुच्छेद 32 और 141 के तहत दिया गया है, यानी जब तक सरकार इस पर कानून नहीं बनाती, ये नियम सीधे कानून की तरह माने जाएंगे।

supreme-court-guidelines-coaching

Student Suicides Case पर सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?

शीर्ष अदालत ने यह निर्णय उस मामले में लिया जिसमें एक 17 वर्षीय नीट (NEET) की तैयारी कर रही छात्रा - जिसे कोर्ट ने 'मिस एक्स' नाम दिया - ने जुलाई 2023 में विशाखापट्टनम स्थित आकाश बायजूस कोचिंग संस्थान में आत्महत्या कर ली थी। छात्रा के पिता द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट के पहले के फैसले को पलटते हुए मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंप दी।

न्यायालय ने टिप्पणी की कि भारत के युवाओं में बढ़ती मानसिक परेशानी देश की शिक्षा प्रणाली में गहरे बैठे 'संरचनात्मक विकार' की ओर संकेत करती है। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2022 में भारत में कुल 1,70,924 आत्महत्याएं हुईं, जिनमें से 7.6% - यानी करीब 13,044 - छात्र थे। इन मामलों में 2,200 से अधिक आत्महत्याएं सीधे परीक्षा में असफलता से जुड़ी थीं।

Supreme Court द्वारा जारी प्रमुख दिशानिर्देश

छात्रों के मेंटल हेल्थ की देख रेख और आत्महत्या की घटनाओं को रोकने के लिए कोर्ट ने UMMEED, MANODARPAN और राष्ट्रीय आत्महत्या रोकथाम रणनीति जैसे सरकारी कार्यक्रमों को आधार बनाकर ये निर्देश दिए:

1. मेंटल हेल्थ प्रोफेशनल:

हर वह संस्थान जहां 100 से अधिक छात्र हैं, वहां कम से कम एक प्रशिक्षित मनोवैज्ञानिक, काउंसलर या सामाजिक कार्यकर्ता की नियुक्ति अनिवार्य होगी। इससे छोटे संस्थानों को बाहरी विशेषज्ञों से रेफरल व्यवस्था बनानी होगी।

2. सुसाइड हेल्पलाइन:

हर कैंपस, हॉस्टल, कॉमन एरिया और वेबसाइट पर टेली-मानस (Tele-MANAS) समेत हेल्पलाइन नंबर प्रमुखता से प्रदर्शित करने होंगे।

3. End to Performance-Based Segregation:

कोचिंग संस्थानों और स्कूलों में प्रदर्शन के आधार पर बैचों में भेदभाव, सार्वजनिक रूप से शर्मिंदा करना और आक्रामक अकादमिक दबाव की नीतियां तत्काल प्रभाव से समाप्त की जाएंगी।

4. स्टाफ ट्रेनिंग:

सभी शिक्षण संस्थानों को साल में दो बार अपने स्टाफ को 'मनोवैज्ञानिक प्राथमिक चिकित्सा', चेतावनी संकेतों की पहचान और उचित रेफरल प्रक्रियाओं पर प्रशिक्षित करना होगा। एससी, एसटी, ओबीसी, ईडब्ल्यूएस, LGBTQ+ और दिव्यांग छात्रों से जुड़ी संवेदनशीलता के लिए विशेष प्रशिक्षण अनिवार्य होगा।

5. सेल्फ इंफ्रास्ट्रकचर:

हर रेजिडेंशियल संस्थान को आत्महत्या रोकथाम के लिए पंखों को छेड़छाड़-रहित (tamper-proof) बनाना होगा और छतों व बालकनी की पहुंच सीमित करनी होगी।

6. रिपोर्टिंग एंड सपोर्ट मैकेनिज्म:

हर संस्थान में यौन उत्पीड़न, रैगिंग, जाति, लिंग, धर्म या यौन झुकाव आधारित भेदभाव की शिकायत दर्ज करने के लिए गोपनीय प्रणाली होनी चाहिए, जिसमें तुरंत मनोवैज्ञानिक समर्थन भी मिले।

7. अभिभावकों और छात्रों दोनों के लिए करियर मार्गदर्शन, सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों का प्रोत्साहन और सफलता की पारंपरिक परिभाषाओं से आगे सोचने को संस्थानों को प्रेरित किया गया है।

रेगुलेटरी प्रावधानों पर भी सुप्रीम कोर्ट का सख्त रुख

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि ये दिशानिर्देश तत्काल प्रभाव से लागू होंगे और जब तक केंद्र या राज्य सरकारें इस पर विधायी कानून नहीं बनातीं, तब तक यही कानून का रूप होंगे। इसके साथ ही कोर्ट ने निर्देश दिया कि सभी राज्य और केंद्रशासित प्रदेश दो महीने के भीतर कोचिंग संस्थानों को नियंत्रित करने और छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए नियम बनाएं।

वहीं कोर्ट ने भारत सरकार को 90 दिनों के भीतर यह हलफनामा दायर करने का आदेश दिया जिससे छात्र मानसिक स्वास्थ्य को लेकर उसने क्या कदम उठाए, राज्य सरकारों के साथ समन्वय किस तरह किया, और राष्ट्रीय टास्क फोर्स की प्रगति क्या है।

सुप्रीम कोर्ट का यह निर्णय देश की शिक्षा प्रणाली में एक नए युग की शुरुआत का संकेत है - जहां अकादमिक उत्कृष्टता के साथ मानसिक स्वास्थ्य को बराबरी का दर्जा मिलेगा। कोचिंग संस्थानों की अनियंत्रित व्यवस्था, अंधाधुंध प्रतिस्पर्धा और सामाजिक दबाव ने छात्रों को जिस हद तक झकझोरा है, उसे अब नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। यह फैसला सिर्फ एक छात्रा की आत्महत्या का जवाब नहीं है, बल्कि लाखों छात्रों की मानसिक स्थिति को लेकर उठाया गया राष्ट्रीय स्तर पर पहला संवेदनशील और संरचनात्मक कदम है।

मदद बस एक कॉल दूर

पहचान पूर्णतः गोपनीय , पेशेवर परामर्श सेवा

iCALL मेंटल हेल्पलाइन नंबर: 9152987821

सोम - शनि: सुबह 10 बजे - शाम 8 बजे

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+