एक्टिविस्ट की मुआवजे की यााचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने मणिपुर सरकार से मांगा जवाब
नई दिल्ली, 20 जुलाई: मणिपुर के एक्टिविस्ट लीजोबम एरेन्ड्रो के पिता की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार से जवाब मांगा है। सुप्रीम कोर्ट ने दो हफ्ते के भीतर मणिपुर सरकार से अपना जवाब देने को कहा है। एक्टिविस्ट लीजोबम एरेन्ड्रो को गाय के मूत्र और गोबर को लेकर सोशल मीडिया पर लिखने के बाद नेशनल सिक्योरिटी एक्ट (एनएसए) के तहत गिरफ्तार कर लिया गया था। दो महीने जेल में रहने के बाद एक दिन पहले सोमवार को ही सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर लीजोबम की रिहाई हुई है।

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सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने लीचोबम की जमानत की याचिका पर सुनवाई करते हुए तत्काल प्रभाव से रिहा करने का आदेश दिया था है। कोर्ट ने कहा कि उन्हें एक भी दिन के लिए जेल के भीतर रखना अनुच्छेद 21 का उल्लंघन है। लीजोबम के पिता ने अपनी याचिका में कहा है कि एक पोस्ट के लिए जिस तरह से उनके बेटे को एनएसए के तहत गिरफ्तार किया गया, उससे उनको हुए मानसिक और आर्थिक नुकसान की भरपाई की जाए। याचिका पर अब सुप्रीम कोर्ट ने मणिपुर सरकार से जवाब मांगा है।
क्या है पूरा मामला?
मणिपुर के पॉलिटिकल एक्टिविस्ट लीजोबम ने गोमूत्र और गोबर से कोविड के इलाज की बात कहने वाले कुछ भाजपा नेताओं के बयान की आलोचना करने के बाद एक्टिविस्ट लीजोबम को एनएसए के तहत गिरफ्तार किया गया था। उन्होने फेसबुक पर पोस्ट में लिखा था कि गाय के गोबर और गोमूत्र कोरोना का इलाज नहीं है। उन्होंने बाद में पोस्ट हटा भी लिया गया था। इस मामले को लेकर एक्टिविस्ट के पिता की ओर से अदालत में कहा गया कि उनके बेटे ने सिर्फ बीजेपी नेताओं की आलोचना की थी। उसने उन नेताओं की आलोचना की थी जिन्होंने ये कहा था कि गाय के गोबर और गोमूत्र से कोविड ठीक हो सकता है। ऐसे में उसके खिलाफ एनएसए के तहत कार्रवाई कैसे की जा सकती है। जिसके बाद सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने एक्टिविस्ट को जमानत दे दी थी।












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