'आधार' की अनिवार्यता पर 5 जजों की संवैधानिक बेंच करेगी सुनवाई
संवैधानिक बेंच नवंबर के अंतिम सप्ताह से आधार को लेकर दायर की गई याचिकाओं पर सुनवाई करेगा, जिसमें कल्याणकारी योजनाओं में लाभ के लिए सरकार के आधार अनिवार्यता के खिलाफ चुनौती दी गई थी।

नई दिल्ली। 'आधार' की अनिवार्यता के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने पांच जजों की संवैधानिक बेंच गठित करने का फैसला किया है। ये बेंच आधार से जुड़े सभी मामलों पर सुनवाई करेगी। चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा ने फैसला उसके बाद लिया है अटॉर्नी जनरल के के वेणुगोपाल ने कोर्ट को बताया कि आधार को लेकर झूठा फैलाया जा रहा है। ऐसी भी बाते सामने आ रही हैं कि सरकार ने सीबीएसई के दसवीं और 12वीं के छात्रों के एग्जाम से पहले आधार लिंक कराना जरूरी हो गया है।
संवैधानिक बेंच नवंबर के अंतिम सप्ताह से आधार को लेकर दायर की गई याचिकाओं पर सुनवाई करेगा, जिसमें कल्याणकारी योजनाओं में लाभ के लिए सरकार के आधार अनिवार्यता के खिलाफ चुनौती दी गई थी। वहीं मोबाइल को आधार से लिंक कराए जाने के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने सरकार और देश की सभी मोबाइल कंपनियों को नोटिस जारी किया है।
सुप्रीम कोर्ट ने इस दौरान पश्चिम बंगाल सरकार की याचिका पर सुनवाई करते हुए ममता सरकार के रुख से नाराजगी जताई।कोर्ट ने कहा, 'कोई राज्य संसद से पारित कानून का उल्लंघन कैसे कर सकता है?' ममता सरकार ने आधार लिंक अनिवार्यता के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट याचिका दायर की थी।
विभिन्न योजनाओं और सुविधाओं को आधार से जोड़ने की अनिवार्यता और आधार लिंकिंग की तारीख सभी के लिए 31 मार्च 2018 तक बढ़ाने को लेकर सु्प्रीम कोर्ट में सुनवाई की गयी। पिछले सप्ताह केंद्र सरकार ने कोर्ट को बताया था कि आधार को विभिन्न योजनाओं से जोड़ने की आखिरी तारीख 31 दिसंबर से बढ़ाकर 31 मार्च कर दी जाएगी। हालांकि केंद्र सरकार ने कहा था कि समय सीमा सिर्फ ऐसे लोगों के लिये बढ़ाई जा रही है जिनके पास आधार नहीं है। ऐसे लोगों को आधार के लिये अप्लाई करना होगा। हालांकि अन्य सभी के लिए आखिरी तारीख 31 दिसंबर ही रहेगी।












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