Supreme Court ने ED डायरेक्टर के सेवा विस्तार को गैरकानूनी बताया, इस तारीख को छोड़ना होगा पद

Supreme Court ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) के निदेशक संजय कुमार मिश्रा के कार्यकाल विस्तार को अवैध करार दिया। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने ये भी कहा कि संजय मिश्रा 31 जुलाई 2023 तक निदेशक के पद पर बने रहेंगे।

बता दें कि संजय मिश्रा को तीसरी बार सेवा विस्तार दिए जाने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने गत 8 मई को सुनवाई पूरी करने के बाद फैसला रिजर्व रख लिया था। मिश्रा को ईडी निदेशक के तौर पर तीसरी बार एक्सटेंशन को सुप्रीम कोर्ट में चैलेंज किया गया था।

Supreme Court

सुप्रीम कोर्ट में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) संजय कुमार मिश्रा के कार्यकाल के विस्तार को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर जस्टिस बीआर गवई, जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संजय करोल की पीठ ने सुनवाई की थी।

केंद्र की ओर से पैरवी कर रहे सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया था कि एसके मिश्रा पुलिस महानिदेशक नहीं हैं, लेकिन वह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का प्रतिनिधित्व करते हैं। इसलिए संसद ने सचेत निर्णय लिया है।

मेहता ने अदालत से कहा, ईडी निदेशक एसके मिश्रा नवंबर से सेवानिवृत्त हो जाएंगे। पिछली सुनवाई में भी सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने ईडी निदेशक का कार्यकाल बढ़ाने के सरकार के फैसले का बचाव किया था।

हालांकि, एमिकस क्यूरी केवी विश्वनाथन ने शीर्ष अदालत से लोकतंत्र के व्यापक हित में संशोधन को रद्द करने का आग्रह किया था। उन्होंने आशंका जताई कि भविष्य की सरकारों द्वारा इसका दुरुपयोग किया जाएगा।

केंद्र सरकार की दलील थी कि मनी लॉन्ड्रिंग अपराध विदेश से भी जुड़े हैं। तुषार मेहता ने कहा था कि संजय मिश्रा का सेवा विस्तार प्रशासनिक कारणों से था क्योंकि यह वित्तीय कार्रवाई कार्य बल (एफएटीएफ) द्वारा देश के मूल्यांकन के लिए महत्वपूर्ण था।

बता दें कि 17 नवंबर, 2022 को केंद्र सरकार ने ईडी निदेशक को लगातार तीसरी बार सेवा विस्तार देने का फैसला लिया था। इस फैसले को गैरकानूनी बताते हुए सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई थी।

एमिकस क्यूरी केवी विश्वनाथन ने ईडी निदेशक के कार्यकाल के विस्तार पर आपत्ति जताते हुए कहा था कि समिति सेवा विस्तार पर निर्णय लेने से पहले अन्य अधिकारियों की उपलब्धता और उपयुक्तता पर विचार करने में विफल रही।

ईडी निदेशक के कार्यकाल विस्तार पर एमिकस क्यूरी ने कहा कि 17 नवंबर, 2021 का सरकारी आदेश 'सार्वजनिक हित' की कसौटी पर खरा नहीं उतरता। इसलिए सेवा विस्तार के आदेश को रद्द किया जा सकता है।

केंद्र सरकार की तरफ से दाखिल हलफनामे में प्रवर्तन निदेशालय निदेशक का कार्यकाल बढ़ाने के फैसले का बचाव करते हुए कहा गया, सेवा विस्तार को चुनौती देने वाली याचिका परोक्ष व्यक्तिगत हित से प्रेरित है, इसलिए खारिज करने की अपील की जाती है।

सरकार ने यह भी कहा था कि याचिका संविधान के अनुच्छेद 32 का दुरुपयोग है, जो स्पष्ट रूप से भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC) के अध्यक्ष और पदाधिकारियों के लिए और उनकी ओर से प्रतिनिधि क्षमता में दायर की जा रही है। उनके खिलाफ ईडी जांच कर रही है।

कांग्रेस नेताओं के खिलाफ ईडी की जांच पर केंद्र सरकार ने कहा था कि आरोपी आपराधिक प्रक्रिया संहिता के तहत उचित वैधानिक राहत और उपाय के लिए संबंधित अदालतों से संपर्क करने में पूरी तरह से सक्षम हैं।

केंद्र ने कहा था कि याचिका अपने राजनीतिक आकाओं के हितों का समर्थन करने के लिए दायर की गई है। सरकार के अनुसार, जांच के दायरे में आने वाले संबंधित व्यक्तियों को किसी भी उचित राहत के लिए सक्षम अदालत से संपर्क करने से कोई रोक नहीं है।

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