सुप्रीम कोर्ट ने पूछा, क्या लिव-इन में रहने के बाद शादी से मुकरने पर महिला को गुजाराभत्ता देगा पुरुष?
सुप्रीम कोर्ट ने पूछा है कि क्या बिना शादी के लिव-इन रिलेशनशिप में रहने के बाद शादी से मुकरने पर महिला के प्रति पुरुष की कोई जिम्मेदारी बनती है या नहीं। उच्चतम न्यायालय ने सवाल किया है कि क्या ऐसे में पुरुष को महिला को गुजाराभत्ता देना होगा?
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने पूछा है कि क्या बिना शादी के लिव-इन रिलेशनशिप में रहने के बाद शादी से मुकरने पर महिला के प्रति पुरुष की कोई जिम्मेदारी बनती है या नहीं। उच्चतम न्यायालय ने सवाल किया है कि क्या ऐसे में पुरुष को महिला को गुजाराभत्ता देना होगा? सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने ये सवाल करते हुए अटॉर्नी जनरल को नोटिस जारी कर उनसे सहायता मांगी है।

सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस आदर्श कुमार गोयल और जस्टिस एस अब्दुल नजीर की पीठ ने लिव-इन रिलेशनशिप में रह रहे कपल्स को लेकर कई सवाल खड़े किए हैं। कोर्ट ने पूछा है कि आपसी सहमति से संबंध बनाने पर पुरुष को बलात्कार का दोषी नहीं ठहराया जा सकता, लेकिन क्या लंबे समय तक साथ रहने के कारण इस रिश्ते को शादी के रूप में देखा जाना चाहिए कि नहीं? क्या इस कारण पुरुष नागरिक दायित्व का सामना कर सकता है?
पीठ ने अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल को नोटिस जारी कर उनसे इस मामले में सहायता की मांग की है। वहीं इस मामले में वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी को एमिकस क्यूरी नियुक्त किया है।
सुप्रीम कोर्ट ने ये सवाल उस केस के बाद किया है जिसमें एक युवक ने अपने खिलाफ लगे रेप के आपराधिक मुकदमें को रद्द करने की मांग की है। उसका कहना है कि ये आरोप उसकी लिव-इन पार्टनर ने उसके शादी से मुकरने के बाद लगाए हैं। युवक एक महिला के साथ पिछले छह सालों से लिव-इन रिलेशनशिप में रह रहा था। महिला ने युवक पर आरोप लगाए हैं कि इन छह सालों में उन दोनों के बीच शारीरिक संबंध बने जोकि हर बार सहमति से नहीं बनाए गए थे, इसलिए ये बलात्कार का मामला बनता है।
कर्नाटक हाईकोर्ट ने बेंगलुरू के याचिकाकर्ता आलोक कुमार की आपराधिक मुकदमों को रद्द करने की अपील ठुकरा दी थी। हालांकि उच्चतम न्यायालय ने फिलहाल युवक के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही रोक लगा दी है।












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