बच्चे के जन्म देने से अच्छा है अबॉर्शन... सुप्रीम कोर्ट ने 14 साल की रेप पीड़िता को दी गर्भपात की अनुमति
सुप्रीम कोर्ट ने नाबालिग रेप पीड़िता के गर्भपात के मामले में अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने 14 वर्षीय एक रेप पीड़िता को गर्भपात की अनुमति दे दी है। नाबालिग पीड़िता 29 हफ्तों की गर्भवती है।
भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) डीवाई चंद्रचूड़ की पीठ ने फैसला सुनाते हुए बॉम्बे हाई कोर्ट का फैसला पलट दिया, जिसमें कोर्ट ने 4 अप्रैल को बच्ची को गर्भपात की मंजूरी देने से इनकार कर दिया था।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर पीड़िता इस गर्भ को जारी रखती है तो इससे उनके मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ेगा। सीजेआई चंद्रचूड़ ने कहा कि हमें बच्चों की सुरक्षा करनी होती है लेकिन कई मामले अपवाद के रूप में सामने आते हैं।
उन्होंने कहा कि अगर इस मामले में पीड़िता को गर्भ जारी रखने की इजाजत दी गई तो उनके लिए काफी परेशानी हो सकती है। बच्ची के लिए गुजरता हुआ हर एक घंटा भी अहम है।
इससे पहले यह मामला हाईकोर्ट पहुंचा था। तब इस मामले में हाईकोर्ट ने गर्भपात को खत्म करने की इजाजत देने से इनकार कर दिया था। हाईकोर्ट का कहना था कि गर्भ को काफी समय हो गया है ऐसे में इसे हटाने की इजाजत नहीं दी जा सकती है। इसके बाद पीड़िता की मां ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
शुक्रवार को इस मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में की गई। इस दौरान कोर्ट ने मामले की त्वरित सुनवाई करते हुए बच्ची का चिकित्सकीय परीक्षण कराने के आदेश दिया था। सोमवार को कोर्ट ने इसी मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर फैसला सुनाया।
इसके बाद कोर्ट ने 14 साल की नाबालिग की गर्भावस्था को समाप्त करने के लिए अनुच्छेद 142 के तहत अपनी अपरिहार्य शक्ति का प्रयोग किया। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में सायन अस्पताल के मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट के बाद कहा कि गर्भावस्था के एमटीपी की अनुमति दी जानी चाहिए।
कोर्ट ने कहा कि हमने एमटीपी अधिनियम को विधिवत ध्यान में रखा है। कोर्ट ने आदेश में कहा कि लोकमान्य तिलक नगरपालिका सामान्य अस्पताल के डीन उस नाबालिग की गर्भावस्था की चिकित्सीय समाप्ति करने के लिए एक टीम का गठन करेंगे, जिसके संबंध में चिकित्सा रिपोर्ट प्रस्तुत की गई थी। इसके लिए सभी सुविधाओं और जरूरतों का ध्यान रखा जाएगा।
हिन्दुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक इस प्रक्रिया में आने वाला पूरा खर्च खर्च राज्य वहन करेगा। प्रक्रिया पूरी होने का बाद भी यदि किसी चिकित्सा देखभाल की आवश्यकता हो तो इसे नाबालिग के हित में सुनिश्चित किया जाएगा।
गर्भपात को लेकर नियम क्या हैं?
गर्भपात को लेकर भारत में मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी (MTP) कानून, 1971 बना है। इस कानून में 2020 में कुछ संशोधन किए गए थे और इसके तहत कुछ शर्तों के साथ अधिकतम 24 हफ्ते के भ्रूण के गर्भपात की इजाजत है। मेडिकल बोर्ड की सिफारिश, रेप पीड़िता और बाकी कई पहलुओं को ध्यान में रखते हुए इस अवधि को बढ़ाया भी जा सकता है। संशोधन से पहले ये अवधि 20 हफ्ते तक थी।












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