Supreme Court ने सिंगल मदर की याचिका की सुनवाई करते हुए HC को दी सीख, 'माता-पिता की तरह बर्ताव करिए!'

Supreme Court News: सुप्रीम कोर्ट ने एक सिंगल मदर से जुड़ी याचिका की सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट के कामकाज के तरीके पर अहम टिप्पणी की है। सीजेआई बीआर गवई और जस्टिस के विनोद चंद्रन की बेंच ने एक महिला जज की याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि झारखंड हाई कोर्ट को महिला याचिकाकर्ता की याचिका पर शालीनता से सुनवाई करना चाहिए। कोर्ट ने अपनी टिप्पणी में यह भी कहा कि हाई कोर्ट के फैसलों में अहंकार नहीं दिखना चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट ने यह टिप्पणी एक महिला जज की याचिका पर सुनवाई के दौरान की है, जिसमें उन्होंने ट्रांसफर के लिए गुहार लगाई थी। महिला जज का ट्रांसफर दुमका कर दिया गया है। पहले वह हजारीबाग में पोस्टेड थीं। महिला ने सिंगल मदर होने और बेटे की शिक्षा का हवाला देते हुए किसी ऐसे शहर में ट्रांसफर की मांग की थी, जहां बेहतर स्कूल हों।

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Supreme Court ने महिला जज की याचिका पर की अहम टिप्पणी

बार एंड बेंच की रिपोर्ट के अनुसार सीजेआई समेत दो जजों की बेंच ने कहा कि यह जज की तरफ से सुविधा के लिए दी गई ट्रांसफर की याचिका नहीं है। यह एक बच्चे की शिक्षा से भी जुड़ा मामला है। कोर्ट ने झारखंड हाई कोर्ट से यह भी कहा कि अहंकारी रवैया अपनाने के बजाए महिला जज की तबादले की याचिका को संवेदना की नजरों से देखा जाना चाहिए। अनुसूचित जाति वर्ग से संबंधित एक अतिरिक्त जिला न्यायाधीश (ADJ) की याचिका पर बेंच ने यह टिप्पणी की है। कोर्ट कहा, 'हाई कोर्ट को अपने न्यायिक अधिकारियों की समस्याओं के प्रति सजग रहना होगा।'

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सिंगल मदर की याचिका पर CJI ने की अहम टिप्पणी

इस मामले में याचिकाकर्ता एक सिंगल मदर हैं और उन्होंने हाई कोर्ट में गुहार लगाई थी कि उन्हें बोकारो, रांची या हजारीबाग जैसे किसी शहर में ट्रांसफर किया जाए, क्योंकि वहां बेहतर स्कूल हैं। अगले साल उनके बेटे की 12वीं बोर्ड परीक्षा है। ऐसे में याचिकाकर्ता की कोशिश है कि न्यायिक सेवाओं के साथ ही वह बेटे की पढ़ाई पर ध्यान दे सकें। महिला जज ने 6 महीने के लिए चाइल्ड केयर लीव की याचिका लगाई थी, जिसे अस्वीकार कर दिया गया था। इसके बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया।

मुख्य न्यायाधीश बी आर गवई ने कहा, 'हाई कोर्ट को अपने न्यायिक अधिकारियों की याचिका पर विचार करते हुए किसी माता-पिता की तरह सोचना चाहिए। अहंकार का मुद्दा नहीं बनाना चाहिए। सीजेआई ने कहा,'अब आप या तो उन्हें (महिला जज) बोकारो स्थानांतरित करें या मार्च/अप्रैल, 2026 तक परीक्षा खत्म होने तक हजारीबाग में ही रहने दें।'

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