कौन हैं सुप्रीम कोर्ट के वो 5 जज, जिन्होंने धारा 370 पर मोदी सरकार के फैसले को ठहराया सही
Article 370 verdict 5 justices: जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने पर सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (11 दिसंबर 2023) को ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ पांच जजों की पीठ ने जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने के फैसले को बरकरार रखा है और केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार द्वारा लिए गए फैसले को उचित बताया है।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि जम्मू कश्मीर भारत का अभिन्न अंग हैं, इसकी कोई आंतरिक संप्रभुता नहीं है। कोर्ट ने चुनाव आयोग से 30 सितंबर 2024 तक जम्मू-कश्मीर विधानसभा के चुनाव कराने के लिए कदम उठाने का भी निर्देश दिया है। ऐसे में ऐतिहासिक फैसला सुनाने वाले पांचों जज सुर्खियों में आ गए हैं। आइए जानें कौन हैं ये पांचों जज?

जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने के फैसले को बरकरार रखने का ऐतिहासिक फैसला सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ (CJI Chandrachud), जस्टिस संजय किशन कौल (justices S K Kaul), जस्टिस संजीव खन्ना (Sanjeev Khanna), जस्टिस बीआर गवई (BR Gavai) और जस्टिस सूर्यकांत (Surya Kant) ने सुनाया है। ये फैसला तीन जजों ने लिखा है और एकमत से आया है।
CJI Chandrachud: जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़
जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ का पूरा नाम न्यायमूर्ति धनंजय यशवंत चंद्रचूड़ है। ये सुप्रीम कोर्ट में एक मौजूदा न्यायाधीश हैं। जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने 10 अक्टूबर, 2022 को सीजेआई यूयू ललित की जगह लिया था। 11 नवंबर 1959 को जन्में जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ मुंबई के रहने वाले हैं।
उनके पिता यशवंत विष्णु चंद्रचूड़ सबसे लंबे समय तक सेवा देने वाले और 16वें सीजेआई थे। यशवंत विष्णु चंद्रचूड़ 22 फरवरी, 1978 से 11 जुलाई, 1985 तक सीजेआई थे।
justices S K Kaul: जस्टिस संजय किशन कौल
जस्टिस संजय किशन कौल सुप्रीम कोर्ट के दूसरे नंबर के शीर्ष जज हैं। जस्टिस संजय किशन कौल कश्मीरी परिवार से ताल्लुक रखते हैं। इन्होंने 1987 से 1999 तक सुप्रीम कोर्ट में एक वकील के तौर पर प्रैक्टिस की है। दिसंबर 1999 में उन्हें वरिष्ठ अधिवक्ता के रूप में नामित किया गया था।
3 मई 2001 को दिल्ली हाई कोर्ट के अतिरिक्त न्यायाधीश के रूप में उन्हें पदोन्नत किया गया है। 02 मई 2003 को इन्हें स्थायी न्यायाधीश के रूप नियुक्त किया गया था। 2013 में इन्हें पंजाब हरियाणा हाई कोर्ट का मुख्य न्यायाधीश बनाया गया। 26 जुलाई 2014 को उन्हें मद्रास हाई कोर्ट का मुख्य न्यायाधीश बनाया गया। इसके बाद 17 फरवरी 2017 को वह सुप्रीम कोर्ट में जज नियुक्त किए गया था।
justices Sanjeev Khanna: जस्टिस संजीव खन्ना
जस्टिस संजीव खन्ना सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ जज हैं। उन्होंने 1983 में दिल्ली बार काउंसिल में नामांकन किया था। जस्टिस संजीव खन्ना ने दिल्ली हाई कोर्ट में बतौर अतिरिक्त लोक अभियोजक और न्याय मित्र के रूप में नियुक्ति पर कई बहस किए हैं। जस्टिस संजीव खन्ना ने दिल्ली हाई कोर्ट में आयकर विभाग के वरिष्ठ स्थायी वकील के रूप में तकरीबन 7 सालों तक काम किया था।
साल 2005 में उन्हें दिल्ली हाई कोर्ट के अतिरिक्त न्यायाधीश के रूप में पदोन्नत किया गया था फिर 2006 में स्थायी न्यायाधीश बनाया गया था। जस्टिस संजीव खन्ना को 8 जनवरी 2019 को सुप्रीम कोर्ट का न्यायाधीश बनाया गया था। जस्टिस खन्ना 13 मई 2025 को रिटायर होने वाले हैं।
justices BR Gavai: जस्टिस बीआर गवई
जस्टिस बीआर गवई सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ जज हैं। अमरावती के रहने वाले जस्टिस बीआर गवई ने 16 मार्च 1985 को बार काउंसिल में नामांकन करवाया था। उसके बाद उन्होंने 987 तक पूर्व महाधिवक्ता और हाई कोर्ट के जज राजा भोंसले के साथ काम किया था। उसके बाद वो बॉम्बे हाई कोर्ट में 1987 से 1990 वकालत की।
1990 के बाद जस्टिस बीआर गवई ने बॉम्बे हाई कोर्ट की नागपुर पीठ के समक्ष वकालत की थी। इसके बाद जनवरी 2000 को जस्टिस बीआर गवई को नागपुर बेंच के लिए सरकारी वकील और लोक अभियोजक के रूप में नियुक्त किया गया था।
उन्हें नवंबर 2005 को बॉम्बे हाई कोर्ट का स्थायी न्यायाधीश बनाया गया। 24 मई 2019 को बीआर गवई सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश बने। जस्टिस बीआर गवई 23 नवंबर 2025 को रिटायर होने वाले हैं।
justices Surya Kant: जस्टिस सूर्यकांत
हरियाणा हिसार के रहने वाले जस्टिस सूर्यकांत ने लॉ की डिग्री लेने के बाद 1984 में जिला न्यायालय, हिसार में वकालत शुरू की थी। पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट में प्रैक्टिस करने के लिए वह 1985 में चंडीगढ़ शिफ्ट हो गए थे। 7 जुलाई 2000 को जस्टिस सूर्यकांत हरियाणा के सबसे कम उम्र के महाधिवक्ता नियुक्त हुए। मार्च 2001 में जस्टिस सूर्यकांत को वरिष्ठ अधिवक्ता बनाया गया।
पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट में जनवरी 2004 में जस्टिस सूर्यकांत को स्थायी न्यायाधीश के रूप में पदोन्नत किया गया था। उसके बाद 05 अक्टूबर 2018 को जस्टिस सूर्यकांत हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश बनाए गए। 24 मई 2019 को जस्टिस सूर्यकांत को सुप्रीम कोर्ट का न्यायाधीश बनाया गया। जस्टिस सूर्यकांत 09 फरवरी 2027 को रिटायर होने वाले हैं।












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