कक्षा 2 में हुआ निकाह, छठी क्‍लास में तलाक-तलाक-तलाक

Fatima
लखनऊ (इन्‍द्रमणि राजा)। यह कहानी एक ऐसे बहादुर गरीब खेत मजदूर की है जिसने खराब रीति रिवाजों को धता बताते हुए एक मिसाल कायम कर दी। जब वह रुढिवाद के अंधकार का शिकार था तो उसने अपनी तीन साल की बेटी फातिमा की शादी कर दी और जब उसे शिक्षा का प्रकाश मिला तो उसने पूरे गांव के सामने अपनी गलती स्वीकारी और गौना कराने आये लोगों का साहस से सामना ही नहीं किया बल्कि काजी को बुलाकर तलाक करा दिया। इसका नाम है मंगरे जो आज भी बाल विवाह के खिलाफ लोगों को जागरुक कर रहा है और उसके प्रयास रंग भी ला रहे हैं।

यह घटना देश के उस जिले की है जिसे भारत सरकार भी अति पिछड़ा मानती है। हम बात कर रहे हैं श्रावस्ती जिले की। पूरी दुनियां में श्रावस्ती को भगवान बुद्ध के लिए जाना जाता है, लेकिन भारत सरकार का योजना विभाग इसे अतिपिछडे़ जिले के तौर पर जानता है। भगवान बु़द्ध ने श्रावस्ती में अपने ज्ञान के प्रकाश से अंगूलीमाल नाम के डाकू का हृदय परिवर्तन कर उसे भिक्षु बना लिया था, लेकिन दूसरी तरफ वही जिला आज भी अंधकार में ही है। कारण है कि जब तक लोगों को ज्ञान का प्रकाश नहीं मिलेगा तब तक इनके हृदय नही बदलेगें।

श्रावस्ती पूरे प्रदेश में महिला साक्षरता और सामान्य साक्षरता मे सबसे पिछड़ा है। यहां पर आठ प्रतिशत महिला साक्षर हैं। यही नहीं श्रावस्ती सर्वोच्च प्रजन्न दर वाला जिला भी है और यही नही देश में सबसे ज्यादा शिशु मृत्यु दर भी यहीं है। प्रति 1000 पर 128 शिशुओं की यहां पर मौत हो जाती है। नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे बताता है कि सबसे ज्यादा बाल विवाह उत्तर प्रदेश के श्रावस्ती में ही होते हैं।

8 साल की फातिमा बनी 18 साल के युवक की दुल्‍हन

श्रावस्ती जिले में एक विकास खंड है जमुनहा और यहां के गांव नकही में एक मंगरे अपने परिवार के साथ रहता है। मंगरे की बेटी है फातिमा। उसने अपनी चार साल की बेटी फातिमा (मासूम की तस्‍वीर ऊपर इंसेट में) का निकाह बगल के गांव तुलसीपुर के रहने वाले 14 साल के लड़के बकरीदी से कर दिया। यह घटना लगभग चार साल पहले की है। इसी बीच भारतीय प्रबंध संस्थान अहमदाबाद के पूर्व छात्रों के आर्थिक सहयोग के बाद देहात नाम की संस्था ने श्रावस्ती के कई गांवों में शिक्षा केन्द्रों की स्थापना की।

मंगरे भी संपर्क में आया और उसे बाल विवाह की समस्याओं के बारे में पता चला। मंगो चूंकि गरीब था और मजदूरी करके काम चलाता था, लेकिन उसने ज्ञान के प्रकाश को अपने पास आने से नही रोका और इसका फायदा हुआ कि उसकी बेटी के निकाह के चार साल बाद वर पक्ष उसके गांव बिना बताये आ धमका कि वे गौना कराने आयें है। मंगरे का परिवार स्तब्ध था।

गांव का सामाजिक दबाव चारों तरफ और बीच में मंगरे। फातिमा के पिता मंगरे ने फोन पर बाताया कि वह घर के अंदर गया और अपनी आठ साल की बेटी की आंखों में आंख डाल कर उसने अपनी बेटी फातिमा से कहा कि वह घबराए नहीं उसे नही जाना है। इसके बाद आत्मविश्‍वास से भरे मंगरे ने पूरे गांव के सामने वर पक्ष से यह शर्त रखी कि उसकी बेटी अभी आठ साल की है ऐसे में वह गौना नहीं करेगा और अगर वर पक्ष को गौना करना है तो वह दस साल इंतजार करे और जब उसकी बेटी 18 साल की हो जायेगी तब वह आयें और गौना करायें।

इस पर लड़के वाले तैयार नहीं हुए और अंत में मंगरे के साहस के सामने किसी की नहीं चली। तो मंगरे ने काजी का बुलाकर तत्काल ही तलाक नामा लिखवा दिया और जो सामान वर पक्ष लाया था, उसका हरजाना भर दिया। कुल मिला कर उसने अपनी बेटी फातिमा को उसके अधिकार की सौगात दे दी। मंगरे ने बताया कि उसकी बेटी फातिमा कक्षा 6 में पढ़ रही है और वह उसे आगे पढ़ाना चाहता है साथ ही उसका बेटा भी कक्षा 8 में पढ़ रहा है। मंगरे ने बताया कि उसके कई बाल विवाह को रोकने का प्रयास किया है और यह काम करता रहेगा।

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