5 state assembly election result 2022: पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव के दिलचस्प फैक्ट
5 state assembly election result 2022: डेली हंट पर मिलेंगे पांच राज्यों के सबसे तेज नतीजे, व्यापक कवरेज और विश्लेषण
नई दिल्ली, 7 मार्च: देश के पांच राज्यों- उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, मणिपुर, गोवा और पंजाब में विधानसभा के चुनाव हुए हैं। 10 फरवरी को पहले चरण के मतदान के साथ शुरू हुए चुनाव सात मार्च को आखिरी चरण के साथ खत्म हुए। 10 मार्च को पांचों राज्यों के नतीजों का ऐलान किया जाएगा। पांचों राज्यों के ये चुनाव कई वजह से चर्चा में रहे, वहीं कई नेताओं ने भी अपने बयानों से खूब सुर्खियां बटोरी।

उत्तर प्रदेश का ये चुनाव कई लिहाज से खास रहा। चुनाव में कई ऐसी चीजें देखने को मिलीं जो पहली बार हुईं। उत्तर प्रदेश के इस चुनाव में आवारा पशुओं का मुद्दा खूब चर्चा में रहा, ये पहली बार है जब छुट्टा पशु इतनी बड़ी समस्या बने कि प्रधानमंत्री को अपने भाषण में इस पर बोलना पड़ा। वहीं बुल्डोडर का जिक्र भी खूब हुआ। यूपी सीएम आदित्यनाथ और दूसरे भाजपा नेता लगातार बुल्डोजर का जिक्र करते रहे। बुल्डोजर चुनाव में भाजपा के एक सिंबल की तरह इस्तेमाल हुआ। वहीं सपा प्रमुख अखिलेश यादव की ओर से बार-बार चिलम की बात इस इलेक्शन में हुई।
उत्तर प्रदेश
यूपी चुनाव में नेताओं की बात की जाए तो योगी आदित्यनाथ, अखिलेश यादव, मायावती, प्रियंका गांधी जैसे नेता तो चर्चा में रहे ही। कई दूसरे नेता भी खूब सुर्खियां बटोरे। पश्चिमी यूपी में आरएलडी प्रमुख जयंत चौधरी ने अपना दमखम दिखाया। उनके प्रचार अभियान का गाना 'आरएलडी आई रे' भी सोशल मीडिया पर भी बहुत लोकप्रिय हुआ।
अपने बोलने के खास अंदाज के चलते सुभासपा के मुखिया ओम प्रकाश राजभर भी काफी ट्रेंड में रहे। उनकी ओर से काफी तीखे हमले भाजपा पर किए गए। कुंडा से कई बार विधायक रह चुके राजा भैया इस बार अपनी पार्टी बनाकर चुनाव मैदान में उतरे हैं। वो भी इस चुनाव में काफी चर्चा पाए हैं। चुनाव में रॉबर्ट्सगंज से भाजपा के विधायक भूपेश चौबे का मंच से कान पकड़ कर उठक बैठक लगाते हुए माफी मांगना भी चर्चा में रहा।
पंजाब
पंजाब का चुनाव काफी खास रहा है। चुनाव में मुद्दों से ज्यादा नेताओं, खासतौर से कांग्रेस की खींचतान चर्चा में रही। चुनाव से कुछ दिन पहले कांग्रेस ने चरणजीत चन्नी को सीएम बनाया जिससे पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष नवजोत सिद्धू ही नाराज हो गए। वहीं पूर्व सीएम अरिंदर सिंह भी कांग्रेस पर काफी हमलावर दिखे।
पंजाब में सबसे ज्यादा चर्चा इस बार चरणजीत चन्नी की रही। कांग्रेस के सीएम फेस चन्नी को दलित लीडर के तौर पर भी लोगों ने देखा। वहीं सिद्धू भी काफी चर्चा में रहे। कई बार सिद्धू ने ऐसे बयान दिए जो उनकी ही पार्टी के लिए परेशानी का सबब बन गए। अमरिंदर सिंह ने पंजाब चुनाव में सिद्धू के पाकिस्तान से कथित कनेक्शन की बात कई बार उठाई। वहीं अकाली नेता विक्रम मजीठिया ने कोर्ट से राहत के बाद नवजोत सिंह सिद्धू के खिलाफ चुनाव लड़ा।
आम आदमी पार्टी प्रमुख अरविंद केजरीवाल और राज्य में आप के सीएम फेस भगवंत मान की भी चुनाव में खूब चर्चा रही। भगवंत मान के शराब पीने की बात को भी उठाया गया। वहीं पंजाब में मतदान से ठीक पहले कुमार विश्वास ने अरविंद केजरीवाल को खालिस्तान समर्थक बताकर सनसनी फैला दी। जिस पर भाजपा-कांग्रेस ने जमकर केजरीवाल को घेरा।
उत्तराखंड
उत्तराखंड में इस चुनाव में पलायन और रोजगार का मुद्दा काफी गर्म रहा। भाजपा की ओर से मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी सबसे अहम चेहरा बने रहे तो कांग्रेस की ओर से हरीश रावत के हाथों में कमान दिखी। राज्य में धामी और हरीश रावत के अलावा, डॉ. हरक सिंह रावत, पूर्व सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत, प्रणव सिंह चैंपियन, यशपाल आर्य कर्नल अजय कोठियाल (आप के सीएम फेस) जैसे नेता चर्चा में बने रहे।
गोवा
गोवा में बीते दस साल सत्ता पर काबिज भारतीय जनता पार्टी बीते दो विधानसभा चुनाव में अपने अहम चेहरे मनोहर पर्रिकर के बिना चुनाव लड़ी है। पिछले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस सबसे ज्यादा सीटें जीतकर भी सरकार नहीं बना पाई थी। इस बार भी राज्य में उन दोनों दलों में तगड़ा मुकाबला दिखा। कांग्रेस ने तो प्रत्याशियों को चुनाव बाद भाजपा में ना जाने की कसम भी दी।
गोवा में मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत, विपक्ष के नेता दिगंबर कामत, पूर्व सीएम रवि नाइक, लक्ष्मीकांत पारसेकर ट्रेंड में रहे। दिवंगत पूर्व सीएम मनोहर पर्रिकर के बेटे उत्पल पर्रिकर को भाजपा से टिकट ना मिलना और उनका निर्दलीय चुनाव मैदान में उतरने ने भी सुर्खियां बटोरीं। इस बार टीएमसी प्रमुख और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की गोवा चुनाव में काफी दिलचस्पी रही।
मणिपुर
पूर्वोत्तर के राज्य मणिपुर में भाजपा, कांग्रेस, एनपीपी, एनपीएफ, टीएमसी और कुछ अन्य दलों के बीच मुकाबला हुआ है। मणिपुर में 2017 में भाजपा को कांग्रेस से कम सीटों पर जीत हासिल हुई थी लेकिन अन्य दलों के सहयोग से भाजपा ने सरकार बना ली थी। पूर्वोत्तर को दिल्ली की सत्ता के ज्यादा करीब लाने के दावे के साथ भाजपा ने चुनाव लड़ा है। वहीं कांग्रेस की ओर से भाजपा पर मणिपुर की संस्कृति का सम्मान ना करने का आरोप लगाया गया। राज्य में एन बीरेन सिंह और ओकराम इबोबी सिंह ही सबसे ज्यादा चर्चा में रहे।












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